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(व्यंग्य) टीम इंडिया में परफॉर्मेंस की नो एंट्री

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(व्यंग्य) टीम इंडिया में परफॉर्मेंस की नो एंट्री


(व्यंग्य) टीम इंडिया में परफॉर्मेंस की नो एंट्री


- विनय के पाठक

भारतीय क्रिकेट टीम में सिलेक्शन का एक गुप्त नियम है- 'अगर आप बहुत अच्छा खेल रहे हैं तो तुरंत अपना बोरिया-बिस्तर समेट लीजिए क्योंकि आपकी विदाई का समय आ गया है।' हमारे देश में फॉर्म में होना सबसे बड़ा अपराध है। 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने शायद बड़ों की बातें ठीक से नहीं सुनी थीं। इस मासूम ने न्यूज़ीलैंड के खिलाफ 19 गेंदों में 45 रन क्या कूट दिए, चयनकर्ताओं के दिल पर सांप लोट गया। उन्होंने तुरंत पंचांग निकाला और कहा- 'बालक, खेलोगे तो रन बनाओगे, रन बनाओगे तो सीनियर्स के पेट में दर्द होगा इसलिए तुम्हारा बाहर बैठना ही ठीक है।'

चयनकर्ताओं की सोच नासा के वैज्ञानिकों के बस की भी बात नहीं है। जब टीम आयरलैंड जैसी कमजोर टीम से खेलने जा रही थी, जहां यह बच्चा अपने आंकड़े चमका सकता था, तब चयनकर्ताओं ने उसे बड़े प्यार से आराम दिया। लेकिन जैसे ही इंग्लैंड जैसी खूंखार टीम सामने आई, चयनकर्ताओं ने कहा, जाओ बेटा वैभव, परीक्षा दो। पांच मैचों की सीरीज में तीन मैच खिलाकर उसे बाहर बैठा दिया गया, ताकि वह दुनिया का दस्तूर समझ सके।

वैभव का टी-20 अंतरराष्ट्रीय का स्ट्राइक रेट 185.53 का है। 10 मैचों में 295 रन, 26 चौके और 22 छक्के! जिम्बाब्वे के खिलाफ जब उसे तीन मौके मिले, तो उसने 19 गेंदों पर 50 रन, 9 गेंद पर 20 रन और 49 गेंद पर 81 रन ठोक दिए। चयनकर्ता परेशान कि इस लड़के को फ्लॉप कैसे किया जाए? एशियन गेम्स के सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ उसने 21 गेंद पर 38 और फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 9 गेंद पर 15 रन बनाकर गोल्ड मेडल की राह आसान कर दी।

आखिरकार न्यूज़ीलैंड सीरीज आई। पहले दो मैचों में उसे बाहर बैठाकर 'तपस्या' कराई गई। तीसरे मैच में जब मौका मिला, तो उसने चयनकर्ताओं की इच्छा का सम्मान करते हुए 8 गेंद पर सिर्फ 4 रन बनाए। चयनकर्ता खुश हुए कि लड़का लाइन पर आ रहा है। लेकिन चौथे मैच में वैभव ने फिर वही गुस्ताखी कर दी- 19 गेंदों पर 45 रन! भारत ने पावरप्ले में 118 रनों का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाला। बस, अच्छा खेलने की इतनी बड़ी सजा मिली कि उसे अगले ही मैच में टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

वैसे, हमारे चयनकर्ताओं का यह इतिहास पुराना है। आज से सालों पहले एक सीनियर खिलाड़ी मोहिन्दर अमरनाथ ने इन सेलेक्टर्स को सरेआम जोकरों का समूह कह दिया था। तब बड़ा बवाल हुआ था। लेकिन आज के समय को देखकर लगता है कि अमरनाथ जी ने कोई व्यंग्य नहीं किया था, बल्कि वे तो आने वाले भविष्य की सटीक भविष्यवाणी कर रहे थे।

करुण नायर का तड़का तो इस खेल का सबसे तीखा स्वाद है। दिसंबर 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में इस बल्लेबाज ने अपने करियर के सिर्फ तीसरे मैच में नाबाद 303 रन बना दिए। वीरेंद्र सहवाग के बाद तिहरा शतक लगाने वाले वे दूसरे भारतीय बने। लेकिन फरवरी 2017 में जब बांग्लादेश के खिलाफ अगला टेस्ट हुआ तो करुण नायर को इनाम में मिली- मैदान के बाहर डगआउट के बेंच की सबसे आरामदायक सीट! वे प्लेइंग-11 से दूध में पड़ी मक्खी की तरह सीधे बाहर कर दिए गए। उसके बाद उनका आत्मविश्वास ऐसा टूटा कि वे फिर कभी उस लय में लौट ही नहीं सके।

ऐसा ही कुछ ईशान किशन के साथ भी हुआ। दिसंबर 2022 में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने 210 रनों की विस्फोटक डबल सेंचुरी लगाई। दुनिया तालियां बजा रही थी लेकिन चयनकर्ताओं ने अगली सीरीज के पहले ही मैच में शुभमन गिल को जगह देने के लिए दोहरा शतक लगाने वाले खिलाड़ी को मिट्टी के लोंदे की तरह स्टेडियम की बाउंड्री के बाहर फेंक दिया।

गेंदबाजों के साथ तो और भी क्रूर मजाक होता है। कुलदीप यादव ने दिसंबर 2022 में चटगांव टेस्ट में 40 रन बनाए और मैच की पहली पारी में 5 विकेट समेत कुल 8 विकेट चटकाए। उन्हें 'मैन ऑफ द मैच' का अवॉर्ड मिला। पर मीरपुर के अगले ही टेस्ट में मैनेजमेंट ने उन्हें ड्रॉप कर दिया। इस तरह पिछले मैच का हीरो अगले मैच में ड्रिंक्स की ट्रॉली खींच रहा था।

इस लिस्ट में प्रवीण आमरे का नाम भी दर्ज है, जिन्होंने 1992 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ डरबन की मुश्किल पिच पर अपने डेब्यू टेस्ट में ही 103 रनों का शानदार शतक जड़ा था। इनाम में उन्हें भी टीम संयोजन के नाम पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।

अमित मिश्रा को भी याद होगा साल 2011 का ओवल टेस्ट। इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने बल्ले से 84 रन बनाए और दूसरी पारी में 5 विकेट भी चटकाए। लेकिन चयनकर्ताओं ने अगली टेस्ट सीरीज में उन्हें अंतिम ग्यारह से ही गायब कर दिया। यही हाल 1976-77 में करसन घावरी का हुआ था, जिन्होंने मुंबई टेस्ट में इंग्लैंड के खिलाफ पारी में 5 विकेट लिए और अगले ही टेस्ट में ड्रॉप कर दिए गए।

इन सारे उदाहरणों को देखकर वैभव सूर्यवंशी को परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। भारतीय क्रिकेट का नियम साफ है- अगर टीम में लंबे समय तक टिकना है तो कछुए की चाल से चलिए, कभी-कभार शून्य पर भी आउट होइए, ताकि चयनकर्ताओं को आप पर तरस आए। अगर आप 15 साल की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड सेट करेंगे, तो चयनकर्ता तो यही कहेंगे न- बेटा वैभव, तुम बहुत अच्छा खेले, अब जाओ और घर पर बैठकर टीवी पर मैच देखो!

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक