परिवार में महिलाओं को भी अपने सपने पूरे करने के पर्याप्त अवसर मिलें
कृष्णमोहन झा
विगत दिनों विश्व मांगल्य सभा के तत्वावधान में आयोजित युगानुकूल मातृत्व कार्यक्रम के समापन सत्र में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने जो सारगर्भित व्याख्यान दिया वह पूरी तरह मातृत्व विमर्श पर केंद्रित था। संघ प्रमुख ने अपने व्याख्यान में इस बात को विशेष रूप से रेखांकित किया कि आदिकाल से मातृत्व ही सृष्टि का आधार रहा है और मातृत्व के बिना सृष्टि का सृजन,संवर्धन और पोषण संभव नहीं है।मनुष्य की प्रथम गुरु माता होती है जो संस्कारित करने के साथ ही उसके विचारों को सही दिशा प्रदान करती है। माता जीवन भर उसे भावनात्मक संबल भी प्रदान करती है। मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय परंपरा में मातृत्व और परिवार लंबे समय से चिंतन का विषय रहा है ।स्वामी विवेकानंद, महात्मा गॉंधी और रवींद्र नाथ टैगोर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण विचार रखे हैं।
संघ प्रमुख ने आगे कहा कि परिवार में समय देना और संवाद बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान करना माता पिता का दायित्व है इसलिए उन्हें निरंतर अपना स्वयं का ज्ञान भी बढाते रहना चाहिए। माता पिता को बच्चों के सामने खुद आदर्श आचरण प्रस्तुत करना होगा क्यों बच्चों में बडो़ं का अनुकरण करने की प्रवृत्ति होती है।
भागवत ने कहा कि समाज में अनेक विमर्श भ्रम के कारण चलते हैं। भारतीय संस्कृति के बारे में यह भ्रम फैलाया गया कि हमारी परंपराएं गलत हैं जबकि वास्तविकता यह है कि हमारा सांस्कृतिक आधार अत्यंत प्रबल और प्रत्यक्ष है। भागवत ने कहा कि हमें अपने इतिहास, ज्ञान और परंपराओं पर विश्वास रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
संघ प्रमुख ने विविधता में एकात्म भाव को भारतीय संस्कृति का मूल संदेश बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों के अनुरूप जीवन जीना चाहिए। भागवत ने अपने भाषण में अन्य देशों के जीवन मूल्यों का अंधानुकरण करने के बजाय भारतीय दृष्टिकोण के आधार पर समाज और परिवार व्यवस्था को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
गौरतलब है कि संघ प्रमुख भागवत मोहन भागवत अपने व्याख्यानों में हमेशा ही राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए इस बात पर विशेष जोर देते हैं कि राष्ट्र की उन्नति के लिए महिला सशक्तिकरण अत्यंत आवश्यक है।विगत दिनों नई दिल्ली में विश्व मांगल्य सभा के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमयुगानुकूल मातृत्व के समापन समारोह में दिए गए अपने उदबोधन में उन्होंने अपने इसी मंतव्य को दोहराते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए पुरुषों में भी जागरूकता लाना आवश्यक है और इसकी शुरुआत परिवार से होना चाहिए।भागवत ने कहा कि केवल इसलिए कि महिलाएं सक्षम हैं ,उन पर परिवार की सारी जिम्मेदारी नहीं डाली जाना चाहिए बल्कि परिवार को एक टीम की तरह काम करना चाहिए जिसमें परिवार के हर सदस्य की जिम्मेदारी तय होना चाहिए।
भागवत ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए आगे कहा कि परिवार को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवार की जिम्मेदारियों के निर्वहन करते महिलाओं को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने का पर्याप्त अवसर मिले।परिवार को स्वयं से यह पूछना चाहिए वह महिलाओं को ऐसे कौन से अवसर प्रदान कर सकता है जिसमें वह अपने सपनों को साकार कर सके यह तभी संभव हो सकता है इसके परिवार के सभी सदस्यों की प्राथमिकताएं तय होना चाहिए ।
संघ प्रमुख का कहना था कि व्यक्ति को शांति और संतोष की अनुभूति तभी हो सकती है जब उसे अपनी पसंद का कार्य करने का अवसर मिले। संघ प्रमुख ने समाज में ऐसा वातावरण बनाने का आह्वान किया जिसमें महिलाओं वह सम्मान और सहयोग जिसकी वे हकदार हैं। भागवत ने कहा जिस तरह पहले के समय में घर की वित्तीय व्यवस्था और महत्वपूर्ण फैसलों में महिलाओं की भूमिका प्रमुख होती थी और परिवार आपसी सलाह मशवरा से चलते थे वही साझेदारी की भावना विकसित करने की आज आवश्यकता है।
विश्व मांगल्य सभा के एक अन्य कार्यक्रम में संघ प्रमुख ने कहा कि कहा कि विवाह जीवन में अनुशासन लाता है और धर्म व जिम्मेदारी का भाव पैदा करता है। इसके विपरीत लिव इन रिलेशनशिप में लोग जिम्मेदारी से बचकर केवल सुख चाहते हैं। जब तक मन करे, साथ रहो और जब मन न करे अलग हो जाओ। इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होती भागवत ने लिव इन रिलेशनशिप के परिणाम सारी दुनिया देख रही है। आधुनिकता का विरोध नहीं किया जा सकता लेकिन परंपराओं को पूरी तरह छोड़ देना भी उचित नहीं है।भागवत ने कहा इस बात पर जोर दिया कि समय के साथ बदलाव जरूरी है लेकिन वह परिवार और समाज को मजबूत करने वाला होना चाहिए।
उल्लेखनीय है कि मातृ शक्ति के सशक्तिकरण, परिवार व सामाजिक जागरण के लिए समर्पित संगठन विश्व मांगल्य सभा की स्थापना 2010 में स्वामी जितेंद्र नाथ महाराज ने की थी। यह संगठन आज देश के प्रांतों में सामाजिक सांस्कृतिक एवं वैचारिक क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन के लिए अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है
(लेखक राजनैतिक विश्लेषक है)
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

