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(व्यंग्य) चप्पलमार कल्चर के खिलाफ 'रेड हीट' का अहिंसक स्प्रे!

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(व्यंग्य) चप्पलमार कल्चर के खिलाफ 'रेड हीट' का अहिंसक स्प्रे!


- विनय के पाठक

दिल्ली के पीतमपुरा में इस बार दशहरे का त्योहार एकदम 'हाई-टेक' और 'लो-हाइजीन' के फ्यूजन जैसा था। मैदान में हमेशा की तरह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तो बेचारे सदियों पुरानी परंपरा निभा रहे थे लेकिन इस बार सबका ध्यान उनके बगल में खड़े एक 30 फीट ऊंचे चमचमाते 'महा-कॉकरोच' के पुतले ने खींच रखा था। जनता हैरान-परेशान थी कि प्रभु श्रीराम के तरकश में क्या अब 'हिट' और 'बेयगॉन' के बाण भी आ गए हैं? पुतला दहन कमेटी के अध्यक्ष ने मंच से धांसू भाषण ठोंका, देवियों और सज्जनों! रावण तो साल में एक ही बार आता है और दशहरे के बाद चला जाता है, पर यह कॉकरोच तो रोज हमारे सिस्टम की रसोई में घुसकर मलाई चाटता है। असल में, रावण की सेना का जो महा-भ्रष्ट 'गंदासुर' था, वही आज कलयुग में कॉकरोच बनकर पैदा हुआ है। इसलिए इसका फुंकना बहुत जरूरी है! जैसे ही गंदासुर यानी तिलचट्टासुर के पुतले की पूंछ में आग लगी और वो 'पटाक-पटाक' कर फटने लगा, जनता ने ऐसे तालियां पीटीं जैसे सबकी रुकी हुई सब्सिडी सीधे बैंक खाते में आ गई हो।

अब जरा इस कहानी के दूसरे पहलू पर आइए। इधर पीतमपुरा के पार्क में तिलचट्टासुर का पुतला स्वाहा हो रहा था, उधर देश के सबसे वीआईपी और बदबूदार पॉलिटिकल सीवर के भीतर फुल-ऑन डीजे पार्टी चल रही थी। 'सुपर कॉकरोच चिपके जी' अपने चमचों के साथ टीवी पर यह लाइव तमाशा देख रहे थे। राजनीति का सबसे पहला और आखिरी नियम यही है- बदनाम हुए तो क्या हुआ, प्राइम टाइम पर नाम तो हुआ! चिपके जी ने अपनी दोनों छह-इंच लंबी मूंछों पर ताव देते हुए ठहाका लगाया, अरे इंसानों, तुम हमारा पुतला क्या जलाओगे! इतिहास गवाह है कि तुम त्रेतायुग से आज तक हर साल रावण को फूंकते आ रहे हो, पर क्या रावण का बाल भी बांका हुआ? वह तो हर साल पहले से बड़ा और ज्यादा बजट वाला पुतला लेकर री-लॉन्च हो जाता है। हम तो फिर भी कॉकरोच हैं बॉस! दुनिया पर चाहे परमाणु हमला हो जाए या मंदी आ जाए, इंसानों की नस्ल भले खत्म हो जाए लेकिन हमारी 'कॉकरोच बचाओ पार्टी' की चिरकुट पॉलिटिक्स और उसकी गंदगी हमेशा अमर रहेगी। चिपके जी का यह 'मूंछतोड़' आत्मविश्वास देखकर नाले के बाकी छोटे-मोटे झींगुर और कनखजूरे भी खुशी से अपनी मूंछें हिला-हिलाकर भांगड़ा करने लगे।

लेकिन चिपके जी शायद अति-आत्मविश्वास के नशे में यह भूल गए कि इंडियन पॉलिटिक्स में अगर एक तरफ से 'ऑल आउट' का विज्ञापन आता है, तो जनता दूसरी तरफ 'लक्ष्मण रेखा' खींचने के लिए चॉक उठा लेती है। कॉकरोच बचाओ पार्टी के इस गंदे और अपराजेय साम्राज्य को सीधे पटखनी देने के लिए दिल्ली की चमचमाती सड़कों पर एक नई नवेली पार्टी ने हॉर्न बजाते हुए दस्तक दे दी है- 'रेड हीट जनता पार्टी'। इस पार्टी का इकलौता चुनावी वादा और वन-लाइनर घोषणापत्र है- कॉकरोचों का संपूर्ण और वैज्ञानिक तरीके से सफाया!

वैसे तो हमारे भारतीय समाज में, खासकर मिडिल क्लास घरों में कॉकरोचों से निपटने का एक सदियों पुराना, घरेलू और बेहद लोकप्रिय 'सर्जिकल स्ट्राइक' वाला इलाज रहा है- पैर से हवाई चप्पल निकालो, निशाना साधो और दे फटाक! एक ही शॉट में कॉकरोच की अंतड़ी-गुदड़ी का ऐसा 'दही-भल्ला' बनता है कि उसका पूरा पॉलिटिकल करियर एक ही बार में 'बमफलाट' हो जाता है। लेकिन 'रेड हीट जनता पार्टी' ठहरी थोड़ी पढ़ी-लिखी और स्टैंडर्ड भी है थोड़ा इंटरनेशनल वाला। वे इस देसी चप्पलमार कल्चर के सख्त खिलाफ हैं।

रेड हीट जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने आंखों पर चश्मा चढ़ाकर और गंभीर चेहरा बनाकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने कहा, भाइयों और बहनों! चप्पल से कॉकरोच को बेरहमी से मारना घोर अमानवीय, बर्बर और असभ्य कृत्य है। इससे उनके 'तिलचट्टा अधिकारों' मतलब कॉकरोच राइट्स का सरेआम कत्ल हो जाता है। आखिर वे भी इसी पॉलिटिकल सीवर के वोटर हैं, हमारे भाई-बंधु हैं। हम ऐसा खूनी खेल नहीं खेलेंगे। इसलिए हमारी पार्टी ने एक अहिंसक, डिजिटल और आधुनिक रास्ता निकाला है- लाल रंग का 'हीट' स्प्रे! आप इन कॉकरोच नेताओं पर गुस्सा मत करिए, उन पर 'दे फटाक' करके चप्पल मत चलाइए। बस बहुत ही प्यार और इज्जत से उनके चेहरों पर थोड़ा सा 'हीट' छिड़क दीजिए।

देखा जाए तो बात तकनीकी और सियासी दोनों रूप से एकदम सटीक है। चप्पल मारने से फर्श गंदा होता है, बाद में अंतड़ी-गुदड़ी साफ करने का घिनौना झंझट अलग से पालना पड़ता है। इसके विपरीत, 'रेड हीट' का छिड़काव होते ही कॉकरोच को पहले हल्का-सा नशा चढ़ेगा, वो थोड़ा लड़खड़ाकर फिल्मी स्टाइल में अपनी मूंछें घुमाएगा, दो-चार बार गोल-गोल घूमेगा और फिर बिना किसी शोर-शराबे या धरने के, चुपचाप शांति से लोकतंत्र के हित में अपनी जान दे देगा। न गंदगी फैलेगी, न मानवाधिकार वाले छाती पीटेंगे।

इस पूरे मामले की सबसे मजेदार बात देखिए कि इधर चिपके जी अभी भी टीवी स्क्रीन पर अपनी फ्री की पब्लिसिटी देखकर मूंछों में मुस्कुरा रहे हैं और उधर देस की जागरूक जनता अपने हाथों में लाल रंग के सैनिटाइजिंग कैन लेकर उनके हेडक्वार्टर की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रही है। अब तो बस कुछ ही स्प्रे की बात है; जैसे ही इस पॉलिटिकल सीवर में 'रेड हीट' का छिड़काव पूरा होगा, वैसे ही इन जहरीले तिलचट्टों का काम तमाम हो जाएगा। उसके बाद आम जनता बड़ी नजाकत से इनकी मूंछ पकड़ेगी, इन्हें हवा में लहराएगी और सीधे इतिहास के बड़े वाले डस्टबिन में डाल आएगी। तब जाकर देश के लोकतंत्र की रसोई सचमुच साफ और सुरक्षित हो पाएगी!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

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हिन्दुस्थान समाचार / योगिता पाठक