न्यू इंडिया में मोदी विजन : 12 वर्षों ने बदल दी भारत की दिशा और दशा
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में किसी भी सरकार का मूल्यांकन उन निर्णयों से होता है जो आने वाले समय की दिशा तय करते हैं। पिछले 12 वर्षों में भारत ने जिस परिवर्तन को महसूस किया है, उसे सिर्फ राजनीतिक बदलाव कहना पर्याप्त नहीं होगा। वर्ष 2014 से 2026 तक का दौर देश के लिए एक ऐसे परिवर्तनकारी कालखंड के रूप में उभरा है, जिसमें शासन, नीति-निर्माण, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सामाजिक सरोकार और वैश्विक कूटनीति यानी कि हर स्तर पर भारत ने नई पहचान बनाई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कई ऐसे साहसिक फैसले लिए, जिन्होंने भारत को “उभरती हुई शक्ति” से आगे बढ़ाकर “वैश्विक नेतृत्वकर्ता” के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वस्तुत: इन 12 वर्षों की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि सरकार ने घाषित योजनाओं को बड़े स्तर पर जमीन तक पहुंचाने का प्रयास किया। यही कारण है कि आज मोदी सरकार के इस कार्यकाल को कई लोग “न्यू इंडिया” के निर्माण का निर्णायक दौर मानते हैं।
साल 2016 में लिया गया नोटबंदी का फैसला इस दौर के सबसे चर्चित और साहसिक निर्णयों में शामिल रहा। सरकार ने इसे काले धन, नकली नोटों और आतंक वित्त पोषण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया। इस फैसले ने भारतीय अर्थव्यवस्था को डिजिटल लेन-देन की दिशा में तेज गति दी। यूपीआई आधारित भुगतान प्रणाली ने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया। आज कई देश भारत के डिजिटल पेमेंट मॉडल को अपनाने की इच्छा जता रहे हैं। डिजिटल इंडिया अभियान ने गांव से लेकर महानगर तक तकनीक को आम आदमी की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।
इसके बाद वर्ष 2017 में लागू हुआ जीएसटी भारतीय आर्थिक सुधारों का बड़ा अध्याय साबित हुआ। “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा ने पूरे देश को एकीकृत कर बाजार में बदल दिया। पहले जहां अलग-अलग राज्यों और केंद्र के अनेक कर व्यापारियों के लिए जटिलता पैदा करते थे, वहीं जीएसटी ने कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया। आज लगातार बढ़ता जीएसटी संग्रह इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था औपचारिक और मजबूत हो रही है।
मोदी सरकार के कार्यकाल का सबसे बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक फैसला जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को माना जाता है। दशकों से लंबित इस मुद्दे को हल कर सरकार ने “एक देश, एक विधान” की अवधारणा को लागू करने का दावा किया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में पुनर्गठित किया गया। इसके बाद वहां निवेश, पर्यटन और आधारभूत विकास को नई गति मिलने की बात कही गई। निश्चित ही सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता के रूप में आज हमारे सामने है।
सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में तीन तलाक कानून भी एक महत्वपूर्ण कदम रहा। मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक से कानूनी सुरक्षा देकर सरकार ने लैंगिक समानता की दिशा में बड़ा संदेश देने का प्रयास किया। इसे महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने वाला निर्णय बताया गया। इसके साथ ही नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी सीएए भी मोदी सरकार के प्रमुख फैसलों में शामिल रहा। सरकार ने इसे पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के लिए मानवीय पहल बताया। इसके जरिए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता देने का रास्ता खोला गया।
कोविड-19 महामारी के दौरान “आत्मनिर्भर भारत” अभियान ने सरकार की आर्थिक रणनीति को नई दिशा दी। 20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज के जरिए स्थानीय उद्योगों, एमएसएमई और विनिर्माण क्षेत्र को मजबूती देने की कोशिश की गई। “मेक इन इंडिया” अभियान ने भी इसी दिशा में भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने का प्रयास किया। रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश बढ़ा और भारत की भूमिका वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत हुई।
इन 12 वर्षों में वित्तीय समावेशन की दिशा में भी बड़ा बदलाव देखा गया। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करोड़ों लोगों को पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी के माध्यम से सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचने लगा। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका कम होने का दावा किया गया। विश्व बैंक जैसी संस्थाओं ने भी इस मॉडल की सराहना की।
दूसरी ओर उज्ज्वला योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाने का काम किया। करोड़ों परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन मिलने से धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में कमी आई और महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार हुआ। इसी तरह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देने का प्रयास किया।
मोदी सरकार के कार्यकाल में बुनियादी ढांचे के विकास को भी विशेष प्राथमिकता मिली। एक्सप्रेसवे, हाईवे, आधुनिक रेलवे स्टेशन, वंदे भारत ट्रेनें और नए एयरपोर्ट आज “विकसित भारत” की नई तस्वीर पेश करते दिखाई देते हैं। “उड़ान” योजना ने छोटे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ा, जबकि रेलवे और सड़क नेटवर्क के विस्तार ने लॉजिस्टिक्स लागत कम करने में मदद की।
विदेश नीति के मोर्चे पर भी भारत की भूमिका पहले से अधिक प्रभावशाली नजर आई। क्वाड जैसे रणनीतिक समूहों में भारत की भागीदारी मजबूत हुई। “वैक्सीन मैत्री” अभियान के जरिए कोविड संकट के दौरान अनेक देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराकर भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी सॉफ्ट पावर को बढ़ाया। जी-20 समिट की सफल अध्यक्षता ने भी भारत को विकासशील देशों की मजबूत आवाज के रूप में स्थापित किया।
स्वच्छ भारत मिशन ने देश में स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप दिया, जबकि आयुष्मान भारत योजना ने करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध कराई। जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना, नमो ड्रोन दीदी और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाओं ने ग्रामीण और कमजोर वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया।
कुल मिलाकर, यदि केंद्र की मोदी सरकार के पिछले 12 सालों के कार्यकाल को देखा जाए तो कहना यही होगा कि इन वर्षों में भारत ने आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और वैश्विक स्तर पर व्यापक बदलाव देखे हैं। गरीबी में कमी, डिजिटल क्रांति, आधारभूत ढांचे का विस्तार और वैश्विक मंच पर बढ़ती साख ने यह संकेत दिया है कि भारत अब दुनिया की दिशा तय करने वाली शक्तियों में अपनी जगह बनाने की ओर बढ़ रहा है। यही कारण है कि मोदी सरकार के ये 12 वर्ष आज “न्यू इंडिया” के निर्माण के निर्णायक अध्याय के रूप में देखे जा रहे हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

