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मोदी पर व्यक्तिगत प्रहार टिकेगा नहीं!

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मोदी पर व्यक्तिगत प्रहार टिकेगा नहीं!


विक्रम उपाध्याय

जब पूरी दुनिया अपने अस्तित्व पर चुनौती महसूस कर बचाव के लिए संघर्ष करने में लगी है, तो भारत में अस्तित्वहीन पड़ा विपक्ष अपने लिए इस संकट की घड़ी को सत्ता में लौटने का एक अवसर मान रहा है। ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग में जब हर देश में राजनीतिक रूप से पक्ष विपक्ष एक टेबल पर बैठ कर चुनौतियों से पार पाने का दम भर रहा है, तो भारत में विपक्ष और विरोधियों की ओर से सरकार के मुखिया पर सबसे भीषण प्रहार किया जा रहा है, केवल नीतिगत ही नहीं, व्यतिगत रूप से भी, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमा और विश्वसनीयता को चोट पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

एक तरफ उन्हें कमजोर प्रधानमंत्री ठहराने का एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है, तो दूसरी तरफ उनके व्यक्तित्व और आचरण को ही तार-तार करने का षड्यंत्र रचा रहा है। वैसे ही जैसे 2013 में कोबरापोस्ट और गुलेल द्वारा किसी नारी की निजता भंग करने के आरोप के सहारे मोदी की छवि बिगाड़ने का एक प्रयास किया गया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी बिना विचलित हुए ईरान और अरब दोनों के साथ अद्भुत सामंजस्य बिठाते हुए, केवल भारतीयों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा संरक्षता के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।

विपक्ष के कुछ बड़े नेता पहले भी कुछ विदेशी ताकतों के साथ मिलकर प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ निजता भंग करने के आरोप लगाते रहे हैं, उनमें ही एक आरोप प्रयास पेगासस स्पाइवेयर के इस्तेमाल के जरिए जासूसी करने का भी रहा, मामला उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) तक गया। वहां विरोधियों की दाल नहीं गली, और वे झटका खा कर लौट आए। वर्तमान सरकार के मुखिया विपक्ष के नेताओं से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, यह बात आम लोगों को भी हास्यास्पद लगी।

विपक्ष में इस समय कोई ऐसा नेता नहीं है, जो प्रधानमंत्री मोदी की व्यक्तिगत छवि पर दाग लगाने और जनता में उसकी विश्वसनीयता स्थापित करने का माद्दा रखता है। कारण केवल यह नहीं कि विपक्ष के किसी नेता की इतनी हैसियत नहीं है एक राजनीतिज्ञ के नाते नरेन्द्र मोदी द्वारा स्थापित अपने सार्वजनिक जीवन के मानदंड पर उंगली उठा सके, बल्कि मोदी की जीवनशैली ऐसी रही है, कि वहां किसी तरह की कोई शंका की गुंजाइश ही नहीं बनती है।

मोदी जब सत्ता की राजनीति के नायक बने तब उम्र की 50 वीं दहलीज पार कर चुके थे। उसके पहले वे या तो संघ के काम में देश भर के संघ कार्यालयों में रहे या फिर भाजपा की व्यवस्था में। निजी जिंदगी और निजता के संरक्षण का कोई विकल्प भी अपने लिए नहीं चुना। मीडिया में भी सुब्रमण्यम स्वामी को छोड़कर किसी और राजनीतिज्ञ ने प्रधानमंत्री मोदी के बारे में अनर्गल टिप्पणी नहीं की। स्वामी ने तो अटल बिहारी वाजपेयी के बारे में भी कई ऐसी टिप्पणियां की हैं और इसके कारण ही उन्होंने एक गंभीर राजनेता की पहचान खो दी है।

प्रधानमंत्री मोदी लगभग 25 वर्षों से विपक्ष के लिए एक बड़ी समस्या बने हुए हैं। काम के मामले में कोई उन्हें चुनौती दे नहीं पा रहा है। राजनीति के मैदान में वे विपक्ष की पकड़ से बहुत आगे निकल गए हैं। इसीलिए विरोधी राजनतिक पार्टियां जनता में मोदी के प्रति बनी धारणा को ही कमजोर करने की जरूरत शिद्दत के साथ महसूस कर रही हैं। कांग्रेस का नेतृत्व चुनावी मुकाबले में कमजोर और अक्षम सिद्ध हो चुका है। प्रधानमंत्री के साथ विकास के मुद्दे पर कांग्रेस बहस से भी बचती है। जनता से किये हर वादे पर भी मोदी खरे उतरते हैं। हर भारतीय को मोदी सरकार के कारण अपने अपने जीवन में कोई ठोस सुधार दिखाई देता है। 12 साल के केंद्र में शासन में किसी भ्रष्टाचार या घोटाला का नाम तक नहीं आया। इसलिए ही मोदी की व्यक्तिगत छवि पर लगातार हमले की रणनीति पर विपक्ष अब काम कर रहा है और मोदी के जीवन के कुछ पहलुओं को बुरा दिखाने का प्रयास कर रहा है, ताकि लोगों के मन में कुछ सवाल पैदा कर सके। पर वे शायद भूल रहे हैं कि उनके इस बचकाने रवैये से उनकी थोड़ी-बहुत साख जो बची है उसे भी गंवा बैठेंगे।

कांग्रेस के रणनीतिकारों ने देश-विदेश के अपने सलाहकारों से मंत्रणा करने के बाद शायद यह तय कर लिया है कि मोदी को कमजोर करने के लिए एंटी परसेप्शन मैनेजमेंट पर ही सारा जोर देना होगा और सोशल मीडिया के जरिए उनकी व्यक्तिगत छवि पर आघात करना होगा। कांग्रेस के लिए यह रणनीति कितना काम करेगी यह तो आने वाला ही समय बताएगा, लेकिन ग्रामीण मतदाताओं के बीच इस मुकाबले को ले जाने की चुनौती बहुत बड़ी होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने ग्रामीणों को आर्थिक सहायता देने के मामले में कांग्रेस से बहुत ज्यादा बेहतर तरीके से काम किया है और प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता इसी से सबसे ज्यादा स्थापित भी हुई है। वहां भाजपा की छवि धूमिल करना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित होगी।

कांग्रेस के अपने पास मोदी पर व्यक्तिगत लांछन लगाने वाले विश्वसनीय चेहरे भी नहीं हैं, क्योंकि महिलाओं के प्रति कांग्रेस नेताओं के दुर्व्यवहार और जहरीले बोल की एक लंबी फेहरिस्त है। पीछे की छोड़िए वर्तमान के ही कई कांग्रेसी नेता महिलाओं के मान मर्दन के आरोपी हैं। नाम लीजिए राहुल गांधी के करीबी रणदीप सुरजेवाला का, उन्होंने भाजपा सांसद हेमा मालिनी के राजनीतिक योगदान पर अभद्र टिप्पणी की थी। नाम लीजिए कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत का, उन्होंने 2024 के आम चुनाव के दौरान हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा उम्मीदवार कंगना रनौत का भाव पूछ लिया था। कर्नाटक के एक कांग्रेस नेता ने महिलाओं को घर पर खाना बनाने तक ही रखने की सलाह दे डाली थी। बंगाल के वरिष्ठ कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भी नहीं बख्शा, उन्हें राष्ट्रपत्नी बना डाला। कांग्रेस की एक पूर्व नेता चेरियन फिलिप ने तो यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस के टिकट यौन लाभ के बदले भी दिए जाते थे।

अब मधु किश्वर के सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के बारे में एक सनसनी रिपोर्ट प्रकाशित किये जाने पर विपक्ष के नेता फूले नहीं समा रहे हैं। कांग्रेस महिला मोर्चा की नेता अलका लांबा हों या तृणमूल कांग्रेस की मोईया मित्रा सबने अपने-अपने तरीके से मोदी के बारे में भ्रामक जानकारी फैलाने का सिलसिला शुरू कर दिया। अब मीडिया वाले ही बता रहे हैं कि मधु किश्वर पहले भी कई गलत या भ्रामक पोस्ट कर चुकी हैं। जाहिर है कांग्रेस का उद्देश्य बिना किसी पूर्ण शोध के जंगल की आग की तरह भ्रम फैलाना है। कांग्रेस पहले भी ब्लैक लाइव्स मैटर की तरह देश में जाति आधारित आंदोलन को, काले कानून के नाम पर किसानों के आंदोलन को और कोविड के दौरान एंटी-लॉकडाउन प्रोटेस्ट को हवा देकर प्रधानमंत्री मोदी को कमजोर करने की कोशिश कर चुकी है। यह बात अलग है कि इसमें वह विफल रही।

दुनिया प्रधानमंत्री मोदी के अनुशासन की कायल है। उनके बारे में यह लोगों को पता है कि वे शायद अकेले नेता हैं जो खरी-खरी कहने और किसी की भी अक्षमता पर उसकी आलोचना करने से नहीं हिचकते। उनका सीधा सिद्धांत है -काम करो नहीं तो बाहर निकलो। वे समय के बहुत पाबंद और बहुत व्यवस्थित नेता हैं। उनमें औरों की तरह अमीर बनने का जुनून नहीं है। वह मीडिया को भी खुश करने की कोशिश नहीं करते। वह बहुत कम लोगों पर भरोसा करते हैं। उनके करीबी साथियों की भी संख्या कम है। इसलिए उनके राजदार भी कम है। उनकी मं के अलावा उनके किसी दोस्त या रिश्तेदार को प्रधानमंत्री आवास में नहीं देखा गया, इसलिए मोदी पर व्यक्तिगत लांछन लगाना और उसे सिद्ध करना संभव नहीं है।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद