दुबई से मप्र के युवाओं के लिए रोजगार की नई राह खोलने की तैयारी
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को निवेश, रोजगार और निर्यात के नए अवसरों से जोड़ने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दुबई दौरा उस व्यापक रणनीति के हिस्से के रूप में देखना चाहिए, जिसमें प्रदेश को देश के भीतर निवेश के विकल्प के साथ-साथ वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक आकर्षक गंतव्य बनाने का प्रयास दिखाई देता है। एआईएम कांग्रेस-2026 में मुख्यमंत्री की भागीदारी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि मध्यप्रदेश अब निवेश के लिए इंतजार करने के बजाय निवेशकों तक स्वयं पहुंच रहा है।
दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित “एनुअल इन्वेस्टमेंट मीटिंग” जैसे वैश्विक मंच पर 180 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों, निवेशकों, कंपनियों और सोवरिन वेल्थ फंड्स के बीच मध्यप्रदेश की उपस्थिति राज्य की बदलती आर्थिक आकांक्षाओं को सामने रखती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों को भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए आमंत्रित कर साफ संकेत दिया है कि मध्यप्रदेश वैश्विक पूंजी को अपने औद्योगिक और रोजगार ढांचे से जोड़ने के लिए तैयार है।
इस पहल का सबसे बड़ा लाभ मध्यप्रदेश के युवाओं को मिल सकता है। किसी भी बड़े निवेश का वास्तविक अर्थ तब बनता है, जब उससे कारखाने लगें, सेवाओं का विस्तार हो, नए उद्यम खड़े हों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार पैदा हों। नवकरणीय ऊर्जा, फार्मास्युटिकल्स, मेडिकल डिवाइस, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं सीधे तौर पर रोजगार के नए अवसरों से जुड़ी हैं। यही वह क्षेत्र है जहां निवेश को युवा शक्ति और आर्थिक विकास के बीच सेतु बनाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री की पहल का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष मध्यप्रदेश की स्थानीय पहचान को वैश्विक बाजार से जोड़ना है। दुबई में ओडीओपी और जीआई उत्पादों की प्रदर्शनी का उद्घाटन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है। बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर का कारपेट, वस्तुतः ये सिर्फ पारंपरिक उत्पाद के पीछे हजारों कारीगरों की मेहनत, स्थानीय कौशल और पीढ़ियों से चली आ रही आर्थिक परंपरा है।
यदि इन उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय खरीदार और स्थायी बाजार मिलते हैं, तो इसका प्रभाव गांव और छोटे शहरों तक पहुंचेगा। वैश्विक बाजार से जुड़ाव का अर्थ कारीगर की आय में वृद्धि, स्थानीय उत्पादन का विस्तार और युवाओं के लिए अपने ही क्षेत्र में रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर पैदा होना है।
मुख्यमंत्री की अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही से मुलाकात भी इसी व्यापक आर्थिक कूटनीति का हिस्सा है। कृषि, व्यापार, निवेश, पर्यटन और शिक्षा में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत मध्यप्रदेश को पश्चिम एशिया के साथ नए आर्थिक संबंधों की दिशा में आगे ले जा सकती है। नवकरणीय ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स से लेकर लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण तक, मध्यप्रदेश के पास ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। सबसे महत्वपूर्ण अवसर कृषि क्षेत्र में दिखाई देता है। दुबई और व्यापक यूएई बाजार खाद्य आयात पर काफी निर्भर है। ऐसे में मध्यप्रदेश की कृषि क्षमता को अंतरराष्ट्रीय मांग से जोड़ना राज्य के किसानों के लिए बड़ा अवसर बन सकता है।
दाल, गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसे उत्पादों में मध्यप्रदेश की मजबूत स्थिति पहले से मौजूद है। यदि इस उत्पादन क्षमता के साथ ग्रेडिंग, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और फूड प्रोसेसिंग का आधुनिक ढांचा जुड़ता है, तो किसान वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।यहीं डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा का किसान और युवा इन दोनों से संबंध स्थापित होता है। कृषि निर्यात बढ़ेगा तो प्रसंस्करण उद्योग बढ़ेंगे; प्रसंस्करण उद्योग बढ़ेंगे तो लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग, भंडारण और गुणवत्ता परीक्षण जैसी सेवाओं का विस्तार होगा।
ऐसे में इन क्षेत्रों में रोजगार पैदा होगा तो प्रदेश के युवाओं के लिए अवसरों का दायरा भी बढ़ेगा।लूलू ग्रुप के यूसुफ अली एम.ए. जैसे बड़े कारोबारी समूहों के साथ संवाद को इसी संदर्भ में देखना चाहिए। दूसरी ओर डॉ. मोहन यादव की दुबई यात्रा को सिर्फ निवेशकों को आमंत्रित करने वाली यात्रा मानना इसकी व्यापक आर्थिक तस्वीर को छोटा कर देगा। वस्तुत: इसके पीछे मध्यप्रदेश को उत्पादन, निवेश, निर्यात और रोजगार का वैश्विक केंद्र बनाने की कोशिश दिखाई देती है।
भोपाल में 2025 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में सामने आया विशाल निवेश प्रस्ताव हो, ग्वालियर का टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन हो, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी में आ रहा निवेश हो या मध्यप्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की कोशिश, वस्तुतः इन सभी को एक ही आर्थिक रणनीति की कड़ियों के रूप में देखा जा सकता है।कुल मिलाकर डॉ. मोहन यादव सरकार का यह प्रयास स्थानीय उत्पादन, किसान की आय और युवा रोजगार के एक साझा मॉडल से जोड़ने की कोशिश कर रहा है।,दुबई में मध्यप्रदेश की आवाज पहुंचना अपने आप में उपलब्धि है।
(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

