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एक रिपोर्ट जो बताती है, कैसे भारत पर्यटन को नई गति दे रहा !

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एक रिपोर्ट जो बताती है, कैसे भारत पर्यटन को नई गति दे रहा !


-डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारत अब पर्यटन को आर्थिक विकास, सांस्कृतिक संरक्षण, रोजगार सृजन और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के प्रमुख इंजन के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी सोच को मजबूती देते हुए नीति आयोग और केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय की पिछले दिनों एक रिपोर्ट पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को खोलने विषय पर जारी हुई है। संयोग से यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है, जब भारत वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्था में लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उक्त रिपोर्ट इस क्षेत्र में आशा के द्वार खोलती है।

दरअसल, इस रिपोर्ट में पर्यटन क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जटिल नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाने, निवेश को बढ़ावा देने, विश्वस्तरीय पर्यटन अवसंरचना विकसित करने तथा स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुझाव दिए गए हैं। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद (WTTC) के अनुसार भारत वैश्विक पर्यटन अर्थव्यवस्थाओं में आठवें स्थान पर पहुंच चुका है और अगले दशक में शीर्ष चार देशों में शामिल होने की क्षमता रखता है।

प्रधानमंत्री का विजन : ‘देखो अपना देश’ से ‘विकसित भारत’ तक

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार पर्यटन को देश की आर्थिक शक्ति और सांस्कृतिक एकता का सबसे प्रभावी माध्यम बताते रहे हैं। उनका मानना है कि भारत का प्रत्येक जिला अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक, प्राकृतिक अथवा ऐतिहासिक पहचान के कारण पर्यटन की अपार संभावनाएं रखता है। प्रधानमंत्री ने कई अवसरों पर देशवासियों से वर्ष में कम-से-कम कुछ नए स्थलों की यात्रा करने का आह्वान किया है, ताकि स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिले।

उनके अनुसार पर्यटन ऐसा क्षेत्र है, जिसमें सबसे अधिक रोजगार सृजित करने की क्षमता है। एक पर्यटक केवल होटल में ठहरता ही नहीं बल्कि परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय बाजार, लोक कलाकारों, किसानों और छोटे व्यापारियों तक आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करता है।

पर्यटन बनेगा आर्थिक विकास का नया इंजन

इस संबंध में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का कहना है, “पर्यटन क्षेत्र भारत की विकास यात्रा में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है। इसके लिए निवेशकों को सरल और पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराना आवश्यक है। आनेवाले समय में गुणवत्तापूर्ण होटल, बेहतर आवास क्षमता, आधुनिक पर्यटन सुविधाएं और आसान अनुमोदन प्रक्रिया भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।आज हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”

इसके साथ ही इस विषय पर नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने भी स्पष्ट किया, “निवेश वहीं आता है जहां नीतिगत स्पष्टता और समयबद्ध अनुमोदन उपलब्ध हो। यदि पर्यटन परियोजनाओं के लिए अनुमति प्रक्रिया सरल होगी तो निजी निवेश तेजी से बढ़ेगा और उसका लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचेगा।”

सरल नियमों से बढ़ेगा निवेश

रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष पर्यटन क्षेत्र में नियामकीय सुधारों पर केंद्रित है। वर्तमान में होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर या पर्यटन परियोजनाओं के लिए विभिन्न विभागों से अलग-अलग अनुमति लेनी पड़ती है, जिससे परियोजनाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं। रिपोर्ट में सिंगल विंडो क्लीयरेंस, ऑनलाइन अनुमोदन, समयबद्ध स्वीकृति, विभागों के बेहतर समन्वय तथा अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने की अनुशंसा की गई है। इससे परियोजनाओं की लागत घटेगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को नई गति मिलेगी।

आंकड़े बता रहे पर्यटन की बढ़ती ताकत

भारत का पर्यटन क्षेत्र आज देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में लगभग 9.02 मिलियन (90.2 लाख) विदेशी पर्यटक (FTAs) आए थे। इसके बाद, 2026 की शुरुआत (जनवरी-अप्रैल) में भारत में लगभग 10 लाख से 5.34 लाख मासिक विदेशी पर्यटक दर्ज किए गए हैं, जबकि इससे पहले वर्ष 2024 में भारत में लगभग 2.06 करोड़ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया, तब विदेशी पर्यटकों से 35 अरब डॉलर से अधिक विदेशी मुद्रा अर्जित हुई।

इस तरह यदि देखें तो पर्यटन उद्योग का देश की जीडीपी में योगदान लगभग 231.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। रोजगार के क्षेत्र में भी यह उद्योग बड़ी भूमिका निभा रहा है। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 8.4 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका पर्यटन क्षेत्र से जुड़ी हुई है, जो देश के कुल रोजगार का लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा है। घरेलू पर्यटन भी अभूतपूर्व गति से बढ़ा है। देश में एक वर्ष के दौरान 290 करोड़ से अधिक घरेलू पर्यटन यात्राएं दर्ज की गईं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण क्षेत्रों में आय के नए अवसर विकसित हुए हैं।

बदलता बुनियादी ढांचा बना सबसे बड़ी ताकत

पिछले एक दशक में सड़क, रेल और हवाई संपर्क में हुए व्यापक सुधारों ने पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा प्रदान की है। उड़ान योजना के माध्यम से नए हवाई अड्डों और क्षेत्रीय हवाई सेवाओं का विस्तार हुआ है। वंदे भारत एक्सप्रेस, आधुनिक रेलवे स्टेशन, एक्सप्रेस-वे तथा राष्ट्रीय राजमार्गों के विस्तार से अनेक पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गई है। वहीं, डिजिटल भुगतान प्रणाली यूपीआई, ऑनलाइन टिकटिंग तथा ई-वीजा जैसी सुविधाओं ने विदेशी पर्यटकों के लिए भी भारत यात्रा को अधिक सहज बनाया है।

स्वदेश दर्शन और प्रसाद योजनाओं से बदली तस्वीर

केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के अंतर्गत देशभर में विभिन्न थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित किए जा रहे हैं। दूसरे चरण में टिकाऊ और गंतव्य आधारित पर्यटन विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर प्रसाद (PRASHAD) योजना के माध्यम से काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, अयोध्या, केदारनाथ, सोमनाथ और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विकास किया गया है। इससे आध्यात्मिक पर्यटन को नई पहचान मिली है और देश-विदेश से श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

ग्रामीण और होमस्टे पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

रिपोर्ट में बड़े होटलों के साथ-साथ होमस्टे, ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प और सामुदायिक भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है। होमस्टे मॉडल के माध्यम से पर्यटक स्थानीय संस्कृति, खान-पान और परंपराओं से सीधे जुड़ते हैं। इससे ग्रामीण परिवारों, महिलाओं और युवाओं की आय बढ़ती है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, केरल, सिक्किम और पूर्वोत्तर राज्यों में होमस्टे मॉडल की सफलता के बाद अब इसे देशभर में विस्तार देने की योजना है।

मेडिकल, वेलनेस और इको-टूरिज्म की बढ़ती संभावनाएं

भारत अब केवल ऐतिहासिक और धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं है। योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण मेडिकल एवं वेलनेस पर्यटन तेजी से विकसित हो रहा है। इसी प्रकार इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वन्यजीव पर्यटन, क्रूज टूरिज्म और एस्ट्रो-टूरिज्म जैसे नए क्षेत्रों में भी भारत वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। सरकार की 'ट्रैवल फॉर लाइफ' पहल पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विश्व पर्यटन महाशक्ति बनने की दिशा में मजबूत कदम

उल्लेखनीय है कि भारत के पास हिमालय, समुद्र तट, रेगिस्तान, जैव विविधता, आध्यात्मिक परंपराएं, विश्व धरोहर स्थल, योग, आयुर्वेद और हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत जैसी अनूठी संपदा है। आवश्यकता केवल इन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं, आधुनिक अवसंरचना और प्रभावी विपणन से जोड़ने की है।

नीति आयोग और पर्यटन मंत्रालय की यह नई रिपोर्ट इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण रोडमैप प्रस्तुत करती है। यदि इसकी सिफारिशों को समयबद्ध ढंग से लागू किया जाता है, तो पर्यटन न केवल विदेशी मुद्रा अर्जन और रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत बनेगा, बल्कि विकसित भारत-2047 की परिकल्पना को साकार करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा।

(लेखक, हिन्दुस्थान समाचार से संबद्ध हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी