भारत-न्यूजीलैंड एफटीए है इन दो देशों के बीच नए युग का उदय
-डॉ. मयंक चतुर्वेदी
भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी आर्थिक शक्ति और रणनीतिक दूरदर्शिता का दमदार परिचय दिया है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर लगी आधिकारिक मुहर आज उस नए भारत की तस्वीर है जो अवसरों को पहचानता है, उन्हें आकार देता है और पूरी दुनिया को अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ता है।
वस्तुत: एक दशक लंबे इंतजार के बाद साकार हुआ यह समझौता हर भारतीय के भीतर नई ऊर्जा, नया आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान का एहसास जगा रहा है। इसके आरंभ में जाएं तो भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस समझौते की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। कई दौर की बातचीत के बाद 2015 में यह प्रक्रिया थम गई थी। समय ने करवट ली, वैश्विक आर्थिक समीकरण बदले और वर्ष 2025 में दोनों देशों ने एक बार फिर इस दिशा में कदम बढ़ाया। महज कुछ महीनों की गहन वार्ताओं के बाद यह समझौता अपने अंतिम स्वरूप तक पहुँच गया। यह तेज गति अपने आप में इस बात का संकेत है कि भारत आज निर्णायक फैसले लेने में कितना सक्षम और आत्मविश्वासी बन चुका है।
इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक प्रभाव है। यह रोजगार, निवेश, शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसे अनेक क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। खास तौर पर भारत के युवाओं के लिए यह समझौता एक सुनहरा अवसर लेकर आया है। भारतीय युवा जो विदेश में अपने कौशल का प्रदर्शन करना चाहते हैं, उनके लिए अब रास्ते और भी सरल हो गए हैं। न्यूजीलैंड द्वारा शुरू की जाने वाली नई वीजा व्यवस्था के तहत हजारों भारतीय पेशेवरों को वहाँ काम करने का अवसर मिलेगा। आईटी, शिक्षा, हेल्थकेयर, फाइनेंस और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा का डंका बजेगा।
भारतीय संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान की भी इस समझौते में विशेष झलक दिखाई देती है। योग प्रशिक्षकों, आयुष विशेषज्ञों, भारतीय व्यंजनों के जानकार शेफ और संगीत सिखाने वाले कलाकारों के लिए वैश्विक मंच तैयार हो रहा है। ऐसे में कहना यही होगा कि यह अवसर रोजगार के साथ ही भारत की सांस्कृतिक विरासत को दुनिया तक पहुँचाने का एक प्रभावशाली माध्यम भी बनकर हमारे सामने आया है।
इस समझौते का असर भारतीय उद्योगों पर भी बेहद सकारात्मक दिखाई देगा। टेक्सटाइल, चमड़ा, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों को अब न्यूजीलैंड के बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। इसका सीधा अर्थ है कि भारतीय उत्पाद वहाँ अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिलेगी। आगरा जैसे शहर, जहाँ चमड़ा उद्योग की मजबूत पहचान है, वहाँ के उद्यमियों के लिए यह समझौता नई उम्मीदों का द्वार खोलता है।
फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर के लिए भी यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड में तेजी से स्वीकृति मिलने लगेगी। इससे लागत में कमी आएगी और भारत की दवाओं की पहुँच वहाँ के लोगों तक और अधिक तेजी से होगी। यह वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग को भी मजबूत बनाएगा। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के लिए भी यह समझौता किसी बड़े अवसर से कम नहीं है। भारत जैसा विशाल उपभोक्ता बाजार अब उनके उत्पादों के लिए और अधिक सुलभ हो जाएगा। कीवीफ्रूट, चेरी, ब्लूबेरी, एवोकाडो, ऊन, लकड़ी और समुद्री खाद्य पदार्थ भारतीय बाजार में आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे।
निवेश के क्षेत्र में भी यह समझौता नई संभावनाओं का द्वार खोलता है। आने वाले वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में बड़े पैमाने पर निवेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। बुनियादी ढाँचा, कृषि तकनीक, शिक्षा, पर्यटन और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में यह निवेश भारत की आर्थिक गति को और तेज करेगा, जिसके फलस्वरूप देश की विकास यात्रा को नई ऊर्जा मिलेगी।
इस समझौते की एक और महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें भारत के किसानों और छोटे उद्योगों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। डेयरी, चीनी और कुछ धातु जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा गया है। इससे घरेलू उत्पादकों को सुरक्षा मिलेगी और उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनी रहेगी। सेब, कीवी और मनुका शहद जैसे उत्पादों पर सख्त आयात नियम बनाए गए हैं, जिससे भारतीय किसानों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा।
इस तरह से देखें तो भारत की योजना स्पष्ट रूप से सामने आती है। देश छोटे मगर महत्वपूर्ण वैश्विक बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाना चाहता है। न्यूजीलैंड के साथ यह समझौता उसी दिशा में एक बड़ा कदम है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्तमान व्यापार आंकड़े आने वाले समय में कई गुना बढ़ने की संभावना है। नए अवसर, नई संभावनाएँ और नई सफलताएँ इस समझौते के साथ जुड़ी हुई हैं।
कुल मिलाकर कहें कि भारत–न्यूजीलैंड एफटीए आज हर भारतीय के लिए बहुत ही गर्व का क्षण है। यह समझौता उस आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी भारत की गाथा कह रहा है जो दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। यह एक नई शुरुआत है, एक नई दिशा है, जहाँ भारत वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर हर दिन अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी

