गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा की प्रभावशाली जीत
मृत्युंजय दीक्षित
गुजरात नगर निगम, पंचायत तथा पालिका चुनावों के नतीजों ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम रहने का संकेत दे दिया है। भाजपा ने अहमदाबाद, सूरत, बडोदरा, राजकोट समेत सभी 15 नगर निगमों व 34 जिला पंचायत में अपना नियंत्रण बरकरार रखा। जिला पंचायत, नगर पालिका व तहसील पंचायत में 90 प्रतिशत से भी अधिक सीटों पर कमल खिला है। भाजपा ने मोरबी व पोरबंदर मनपा में क्लीन स्वीप किया है। अहमदाबाद में एआईएमआईएम का भी सफाया हो गया और आम आदमी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। अभी नए बने नगर निगम नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नडियाद, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर में भाजपा का कमल खिला।
गुजरात में भाजपा की यह जीत इसलिए बड़ी है क्योंकि इस बार प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री अमित शाह चुनाव प्रचार में शामिल नहीं हुए। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा की जोड़ी का यह पहला चुनाव था। चुनाव परिणामों से भाजपा नेतृत्व को काफी राहत मिली है। इसका एक कारण नयी पीढ़ी का धीरे-धीरे सक्षम होना और स्थानीय चुनावों का नेतृत्व करने का सामर्थ्य जुटा लेना भी है। यदि दूसरी पंक्ति का नेतृत्व चुनावी रणनीति में निपुण होगा तो पार्टी के लिए यह निश्चय ही आश्वस्ति का विषय है।
विगत वर्षों से गुजरात में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने सक्रियता दिखाई और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि ये दोनों दल भाजपा के खिलाफ वातावरण तैयार करने में कुछ हद तक सफल हो रहे हैं किंतु गुजरात की जनता ने एक बार फिर लिख कर दे दिया है कि वहां अभी भाजपा का गढ़ हिलाने के लिए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी व अन्य दलों को बहुत पसीना बहाना होगा। सूरत नगर निगम में आम आदमी पार्टी जैसे दलों का सफाया हो जाना इस बात का प्रमाण है कि वहां अब भी हिन्दुत्व की विचारधारा की जड़ें मजबूत हैं। गुजरात में आम आदमी पार्टी की हालत खस्ता होने के पीछे एक बड़ा कारण उसके सात राज्यसभा सदस्यों का भाजपा में शामिल होना भी रहा।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने उत्तर प्रदेश की अयोध्या और गुजरात की एक सीट पर भाजपा को हराने में सफलता प्राप्त की तब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को हराने की बात कहकर कई बार गुजरात का दौरा किया था। राहुल सपा सांसद अवधेश प्रसाद को भी गुजरात लेकर गए और अहंकारपूर्ण शब्दों में कहा कि हमने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के हिंदुत्व की विचारधारा को उनके मुख्य केंद्र में पटखनी दी है, अब गुजरात की बारी है।
गुजरात में मिली इस सफलता पर भाजपा के राज्य नेताओं ने कहा कि यह विकास की राजनीति की जीत है। गुजरात की छवि को खराब करने वाले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को अपना बोरिया-बिस्तर समेट लेना चाहिए। इन पारिणामों ने साफ कर दिया है कि गुजरात में भाजपा की पकड़ शहरों से लेकर गांवों तक बनी हुई है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी दोनों राज्य में नैरेटिव की लड़ाई भाजपा से हार गयीं। इन परिणामों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भाजपा सतर्क रही तो राज्य में वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव आसानी से निकल लेगी।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

