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जीएसटी संग्रह ने फिर दिखाया भारत की आर्थिक ताकत को

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जीएसटी संग्रह ने फिर दिखाया भारत की आर्थिक ताकत को


- डॉ. मयंक चतुर्वेदी

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक बार फिर कर संग्रह के ताजा आंकड़ों ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। फरवरी 2026 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में 8.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज होना यह बताता है कि घरेलू मांग, आयात गतिविधियों और कर ढांचे की स्थिरता मिलकर अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार दे रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह बढ़त उस समय सामने आई है जब सरकार ने हाल ही में जीएसटी दरों में कटौती और टैक्स ढांचे को सरल बनाने जैसे बड़े सुधार लागू किए हैं।

फरवरी 2026 में जीएसटी संग्रह 8.1 प्रतिशत बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया, जोकि पिछले वर्ष इसी महीने 1.69 लाख करोड़ रुपये था। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार हो रहा है। विशेष रूप से आयात और घरेलू खपत दोनों में तेजी ने कर संग्रह को मजबूती दी है।यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर आर्थिक चुनौतियां और आपूर्ति शृंखला में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे माहौल में भारत का राजस्व संग्रह स्थिर वृद्धि दिखा रहा है, जोकि आर्थिक मजबूती का स्पष्ट संकेत है।

घरेलू मांग में सुधार बना मुख्य आधार

जीएसटी संग्रह में वृद्धि का एक बड़ा कारण घरेलू मांग में सुधार रहा है। फरवरी में घरेलू सकल राजस्व 5.3 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये रहा।यह संकेत देता है कि उपभोक्ता खर्च में धीरे-धीरे तेजी आ रही है। त्योहारों के बाद भी खपत का स्तर मजबूत बना रहना इस बात की पुष्टि करता है कि भारत की आंतरिक मांग अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी इंजन बन चुकी है। खासतौर पर खुदरा बाजार, सेवा क्षेत्र और विनिर्माण गतिविधियों में सुधार का असर कर संग्रह पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

आयात से राजस्व में तेज उछाल

फरवरी के आंकड़ों में एक और उल्लेखनीय पहलू आयात से मिलने वाले कर राजस्व में तेज वृद्धि है। आयात से प्राप्त सकल राजस्व 17.2 प्रतिशत बढ़कर 47,837 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह वृद्धि दो महत्वपूर्ण संकेत देती है; पहला, भारत में औद्योगिक उत्पादन और उपभोग के लिए कच्चे माल और उत्पादों की मांग बढ़ रही है; दूसरा, वैश्विक व्यापार में भारत की भागीदारी सक्रिय बनी हुई है।

जीएसटी 2.0 सुधारों के बावजूद स्थिर वृद्धि

सितंबर 2025 में सरकार ने जीएसटी ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए करीब 375 वस्तुओं पर कर दरें घटा दी थीं। इसके साथ ही चार टैक्स स्लैब को घटाकर दो प्रमुख स्लैब 05 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर दिया गया।सुधार लागू होने के शुरुआती महीनों में संग्रह में हल्की गिरावट देखी गई थी। नवंबर 2025 में जीएसटी संग्रह घटकर 1.70 लाख करोड़ रुपये रह गया था। लेकिन इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से संतुलन स्थापित किया और दिसंबर में संग्रह 1.74 लाख करोड़ रुपये तथा जनवरी में 1.93 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। फरवरी के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि कर दरों में कटौती के बावजूद राजस्व स्थिर बना हुआ है।

वित्त वर्ष में लगातार बढ़ रहा कुल संग्रह

वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से फरवरी तक कुल जीएसटी संग्रह 20.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 18.71 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 8.3 प्रतिशत अधिक है।उच्च आधार के बावजूद इतनी वृद्धि यह दर्शाती है कि कर संग्रह में संरचनात्मक मजबूती आ रही है।यह प्रवृत्ति यह भी बताती है कि डिजिटल कर प्रणाली, ई-इनवॉइसिंग और बेहतर अनुपालन जैसे कदमों का देश भर में सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है।

कर संरचना में संतुलन का संकेत

फरवरी के जीएसटी संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 37,473 करोड़ रुपये और राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,900 करोड़ रुपये रहा। वहीं इंटीग्रेटेड जीएसटी (आईजीएसटी) 1,00,236 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह वितरण इस बात को दर्शाता है कि केंद्र और राज्यों के बीच कर साझेदारी संतुलित तरीके से आगे बढ़ रही है।

रिफंड में वृद्धि से उद्योग को राहत

फरवरी में सरकार ने 22,595 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.2 प्रतिशत अधिक है। रिफंड प्रणाली का तेज और पारदर्शी होना निर्यातकों और उद्योगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे उनकी नकदी प्रवाह की समस्या कम होती है और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलती है। रिफंड को घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह 1.61 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.9 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों की नजर में परिपक्व हो रही कर व्यवस्था

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े भारत की खपत आधारित अर्थव्यवस्था की ताकत को दर्शाते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में कमोडिटी मार्केट में कार्यरत आर्थिक विशेषज्ञ रवि रंजन सिंह के अनुसार, दरों में कटौती के बावजूद संग्रह में वृद्धि यह दिखाती है कि उपभोग में आई तेजी ने राजस्व को संतुलित कर दिया है। उनका कहना है कि जीएसटी अब एक स्थिर और अनुमानित वृद्धि के चरण में प्रवेश करता दिखाई दे रहा है। चालू वित्त वर्ष में अब तक कुल संग्रह 20.27 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जोकि 8.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है और यह बताता है कि उच्च आधार के बावजूद राजस्व में संरचनात्मक स्थिरता बनी हुई है। वास्तव में यह भारत के कर ढांचे के परिपक्व होने और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार का संकेत है।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी