अन्नू कपूर की फिल्म उत्तर दा पुत्तर’ के गहरे संदेश को समझें
-विवेक शुक्ला
प्रख्यात अभिनेता अन्नू कपूर अपने पुराने शहर दिल्ली में वापस आ गए हैं। अपनी नई कॉमेडी फिल्म 'उत्तर दा पुत्तर' की शूटिंग के लिए वो दिल्ली की उन्हीं गलियों में घूम रहे हैं, जहां उन्होंने जवानी गुजारी थी। बंगाली मार्केट, मंडी हाउस, हैली रोड जैसी जगहें उनके दिल के बहुत करीब हैं। 1970 के दशक में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) में पढ़ते समय वो इन इलाकों में बहुत घूमा करते थे। अब इस फिल्म की टीम के साथ फिर से दिल्ली पहुंच गए हैं।
फिलहाल शूटिंग साउथ दिल्ली के एक घर में चल रही है। ब्रेक के समय अन्नू कपूर आराम से बैठे थे। उनके चेहरे पर वही गर्मजोशी भरी मुस्कान थी, जो दर्शक दशकों से देखते आ रहे हैं। फिल्म का पोस्टर पहले ही लोगों का ध्यान खींच रहा है। इसमें अन्नू कपूर एक टॉयलेट पर बैठे दिख रहे हैं, जो एक बड़े वास्तु चक्र के ऊपर रखा है। वो हाथ से उत्तर दिशा की तरफ इशारा कर रहे हैं। आसपास बाकी कलाकार मस्ती कर रहे हैं। उनका हैरान-खुश चेहरा फिल्म की हल्की-फुल्की मूड को बखूबी दिखाता है।
फिल्म में अन्नू कपूर एक फिजिक्स टीचर का रोल निभा रहे हैं। वो आईआईटी एंट्रेंस की तैयारी कराते हैं। पढ़ाई में विज्ञान पर पूरा यकीन रखते हैं लेकिन वास्तु शास्त्र पर भी बहुत भरोसा करते हैं। उनका सबसे बड़ा सपना है कि एक परफेक्ट उत्तरमुखी घर बनाना। उन्हें लगता है कि ऐसा घर बन गया तो उनकी किस्मत बदल जाएगी। फिल्म में दिशाएं बदलते-बदलते उनके जीवन में मजेदार और प्यारे बदलाव आते हैं।
फिल्म के लेखक, निर्देशक और प्रोड्यूसर संदीप कपूर ने बताया कि ये कहानी दिल्ली, मुंबई और देश के बड़े महानगरों और शहरों के लोगों की है। अन्नू कपूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “ये फिल्म उन महत्वाकांक्षी लोगों के बारे में है, जो दिशा, तारे या घर के कमरे बदल कर जवाब ढूंढते हैं। लेकिन असली बदलाव तो अंदर से आता है।”
अपने किरदार के बारे में उन्होंने बताया, “मेरा किरदार वास्तु के सख्त नियमों और असली जिंदगी की उलझनों के बीच फंसा है। फिल्म इसे हंसी-मजाक के साथ दिखाती है। ये आस्था का मजाक नहीं उड़ाती। बस इतना कहती है कि वास्तु से घर में सुकून आ सकता है लेकिन असली बदलाव हमारे कर्म से आता है। यही बात मुझे सबसे ज्यादा पसंद आई।”
संदीप कपूर, जिन्होंने पहले 'जुगाड़', 'अनारकली ऑफ आरा' और नेशनल अवॉर्ड जीत चुकी फिल्म 'भोंसले' बनाई है, कहते हैं, “दिल्ली और दूसरे शहरों में बहुत से लोग सोचते हैं कि घर की दिशा ठीक कर देने से सब ठीक हो जाएगा। लेकिन मेहनत के महत्व को कम नहीं किया जा सकता है। फिल्म में उम्मीद, संघर्ष और छोटी-छोटी खुशियों की बात है।”
फिल्म की शूटिंग दिल्ली की मशहूर जगहों पर हुई है जैसे क़ुतुब मीनार, करोल बाग का 108 फीट ऊंचा हनुमान मंदिर, कनॉट प्लेस और इंडिया गेट।
फिल्म का मुख्य सवाल है- “कर्म बड़ा या किस्मत?” अन्नू कपूर कहते हैं, “कर्म और किस्मत दुश्मन नहीं, साथी हैं। किस्मत मंच तैयार करती है लेकिन असली सफलता हमारे कर्म, मेहनत और रोज के फैसलों से मिलती है।”
संदीप कपूर कहते हैं कि फिल्म उन करोड़ों लोगों का सम्मान करती है जो फर्नीचर घुमाते हैं या पंडित जी से सलाह लेते हैं। लेकिन ये भी बताती है कि असली शांति तब मिलती है जब आस्था और मेहनत दोनों साथ चलें। फिल्म हल्की-फुल्की, थोड़ी चुटकुलेदार बनी है।
अन्नू कपूर ने सबको निमंत्रण दिया है- “24 जुलाई 2026 को फिल्म रिलीज हो रही है। प्लीज आकर देखना। हंसते हुए घर जाना और थोड़ा अपने जीवन के बारे में भी सोचना। ये कोई भारी-भरकम लेक्चर नहीं है। बस इतना कहती है कि दिशा ठीक कर लो अगर मदद करती है लेकिन खुद पर काम करना कभी मत भूलना।”
'उत्तर दा पुत्तर' हंसी, गर्मजोशी और थोड़ी-सी समझदारी के साथ बनी फिल्म है। इस फिल्म से दर्शकों को मनोरंजन के साथ कुछ सोचने को भी मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

