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डॉ. आम्बेडकर के विचारों को समझने की जरूरत

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डॉ. आम्बेडकर के विचारों को समझने की जरूरत


डॉक्टर लोकेश चंदेल

देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. भीमराव आम्बेडकर को आधुनिक भारत का निर्माता और सामाजिक सुधारों का अग्रदूत कहा था। डॉ. आम्बेडकर ने कानून मंत्री के पद से महिलाओं को समान अधिकार दिलाने के लिए संसद में हिन्दू कोड बिल पेश किया । इसमें संपत्ति और तलाक के अधिकार भी शामिल थे। वे कहा करते थे- महिलाओं की सामाजिक स्थिति देखकर उस समाज की प्रगति का अनुमान लगाया जाना चाहिए। शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम है। डॉ. आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रेल, 1891 को मध्यप्रदेश के महू में हुआ था। उनका मुख्य विचार‘ शिक्षत बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।बना था’। ये शब्द सामाजिक सशक्तीकरण और सामूहिक प्रगति के प्रति उनके दृष्टिकोण को दर्शाते हैं। वे महात्मा ज्योतिबा फुले को अपना गुरू मानते थे, क्योंकि उनके विचारों और सामाजिक आन्दोलनों से बहुत प्रेरित हुए। संत कबीर और महात्मा बुद्ध को भी अपना दार्शनिक गुरू मानते थे।

उन्होने बुद्ध के समानता और भाईचारे के सिद्धांत को जीवनभर अपनाया। कबीर के आडम्बर मुक्त और सामंतवादी विचारों का भी प्रभाव रहा। डॉ. आम्बेडकर अपने अधिकतर भाषणों में महिलाओं, मजदूरों और समाज के वंचित वर्गों को शिक्षा लेने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने श्रमिकों के लिए काम के घंटे, न्यूनतम वेतन और अन्य अधिकार सुनिश्चित कराने में भूमिका निभाई। उनकी परिकल्पना से ही भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई । वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पी, समाज सुधारक, अर्थशास्त्री, महिला उदारक , मजदूरों के हितैषी और दलितों के मसीहा थे। उन्होंने समानता, बंधुत्व और सामाजिक न्याय के लिए जीवन भर संघर्ष किया, जाति आधारित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीय संविधान के माध्यम से शोषितों, महिलाओं व श्रमिकों को मौलिक अधिकार दिलाकर राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान दिया।

वे संविधान सभा की ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष थे। उन्होंने सभी नागरिकों के लिए न्याय, स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करने वाला संविधान तैयार किया। उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ लम्बी जंग लड़ी, दलितों के सम्मान और अधिकारों के लिए मूकनायक, बहिष्कृत भारत जैसी पत्रिकाएं प्रारंभ करके उनमें जनचेतना संचार किया। उन्होंने भारत में मजदूर वर्ग के अधिकारों, समानता और सुरक्षा के लिए ऐतिहासिक योगदान दिया, जिसमें काम के घंटे 14 से घटाकर 8 करना, महिलाओं के लिए प्रसूति अवकाश, न्यूनतम वेतन, और कर्मचारी राज्य बीमा की शुरुआत शामिल हैं।

उन्होंने ट्रेड यूनियनों को मान्यता दिलाई और भारतीय संविधान के माध्यम से शोषण के खिलाफ कानूनी अधिकार सुनिश्चित करवाए। उन्होंने मजदूरों के संगठित होने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार को कानूनी मान्यता दिलाने का काम किया। संविधान में अनुच्छेद 23, 24, 39 और 43 के तहत बंधुआ मजदूरी, बाल श्रम, और समान काम के लिए समान वेतन जैसे प्रावधानों को शामिल किया। उन्होंने 1942 में 7वें भारतीय श्रम सम्मेलन में कारखानों में काम के घंटे 14 से घटाकर 8 घंटे करने का नियम लागू किया। उसी दौरान न्यूनतम मजदूरी अधिनियम का मसौदा तैयार किया, हालांकि इसे 1948 में कानून के रूप में लागू किया गया। वे 1944 में वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक पेश किया। इसमें महंगाई भत्ता (डीए), छुट्टी लाभ, वेतनमान में संशोधन, ओवरटाइम के लिए अतिरिक्त भुगतान, रियायती भोजन आदि प्रावधान शामिल थे।

डॉ .आम्बेडकर भारतीय महिलाओं को समानता, शिक्षा और संपत्ति के अधिकार दिलाने के लिए हिंदू कोड बिल के माध्यम से ऐतिहासिक संघर्ष किया। संविधान निर्माता के रूप में उन्होंने महिलाओं के लिए समान अधिकार, तलाक, गोद लेने और विरासत के अधिकार सुनिश्चित किए। भारतीय संविधान के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को मतदान का अधिकार, समान काम के लिए समान वेतन, और शिक्षा व रोजगार में समानता सुनिश्चित की।

उन्होंने महिलाओं को तलाक लेने, पिता की संपत्ति में हिस्सा पाने, और गोद लेने का अधिकार देने के लिए हिन्दू कोड बिल पेश किया। यद्यपि यह तुरंत पास नहीं हुआ, लेकिन बाद में इसके प्रावधानों को ही हिन्दू कानून के रूप में अपनाया गया। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित होने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उनका प्रसिद्ध कथन था कि पुरुषों की शिक्षा से अधिक महिलाओं की शिक्षा महत्वपूर्ण है। वे बाल विवाह, पर्दा प्रथा, और देवदासी जैसी कुरीतियों का कड़ा विरोध करते हुए महिलाओं को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कार्यस्थल पर महिलाओं को मातृत्व अधिकार का लाभ दिलाने की वकालत की थी। डॉ. आम्बेडकर ने कहा था कि सरकार को कश्मीर में रह रहे हिन्दू और बौद्ध की सुरक्षा की चिंता सबसे पहले करनी चाहिए। वह भविष्यवाणी सही साबित हुई। 90 के दशक में कश्मीर से हिन्दुओं और बौद्धों को निकाला गया।

काश सरकारें उनके कथन को गंभीरता से लेतीं तो आज परिणाम कुछ और होते। भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय पाकिस्तान में रह गए हिन्दुओं के लिए कहा था कि वे शीघ्र ही पाकिस्तान छोड़कर आ जाएं, क्योंकि उनका पाकिस्तान में भविष्य सुरक्षित नहीं है। यह भविष्यवाणी वर्तमान में सही सिद्ध हो रही है। वहां पर हिन्दुओं को जबरन इस्लाम स्वीकार करवाया जा रहा है। बहरहाल, हम यह कह सकते हैं कि इस महामानव के साथ उस दौर में न्याय नहीं किया गया। लेकिन आज उनके विचार विश्वविद्यालय की गोष्ठियों से निकलकर आम सभाओं में सुने जा रहे हैं। उनके कार्यों के बारे में जानकारी देने के लिए आम्बेडकर कथा की जा रही है। उनके किए गए कार्यों को देखकर उनके अनुयायियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

(लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं)-------------

हिन्दुस्थान समाचार / रोहित