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दिल्ली सरकार का एक साल और बदलाव की बयार

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दिल्ली सरकार का एक साल और बदलाव की बयार


मनोज कुमार मिश्र

27 साल के लंबे अंतराल के बाद दिल्ली में रेखा गुप्ता की अगुवाई में बनी भाजपा सरकार ने साल भर के शासन में भविष्य की विकसित दिल्ली की ठोस बुनियाद रखी। 20 फरवरी,2026 को सरकार के एक साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मंत्रिमंडल के अपने सभी सहयोगियों के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया। इस मौके पर पहला कदम बदलाव का, एक साल विकास का, नाम से एक बुकलेट भी जारी की गई। इसमें दावा किया गया कि दिल्ली की भाजपा सरकार ने बहाने बनाने के बजाए कड़ी मेहनत करके भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित दिल्ली बनाने के लिए हर दिन काम किए। 365 दिन में 370 आयुष्मान आरोग्य मंदिर(डिस्पेंसरी) बने, इसकी संख्या इस साल 1100 करने का लक्ष्य है। पांच रुपये में गरीबों को भाजन उपलब्ध कराने के लिए 71 अटल कैंटीन शुरू की गई। अभी हर रोज करीब 71 हजार लोग खाना खा रहे हैं। साल भर में ही पानी, बिजली, स्वास्थ्य, सार्वजनिक परिवहन, प्रदूषण दूर करने, यमुना की सफाई और दिल्ली के मूलभूत ढांचे को बेहतर करने की ठोस बुनियाद रखी गई हैं। जन सुनवाई की हर स्तर पर व्यवस्था और आम जन की शिकायतों पर कड़ाई से अमल होना शुरू हो गया है। वैसे अभी सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। उसका सामना करने और उसका निबटारा करने के लिए सरकार को लगातार युद्ध स्तर पर काम करना होगा।

वादे के मुताबिक मंत्रिमंडल की पहली बैठक में आम लोगों को मुफ्त उपचार के लिए आयुष्मान योजना न केवल दिल्ली में लागू किया गया। अब तक इस योजना में सात साख से ज्यादा लोग पंजीकरण कराकर इसका लाभ उठा रहे हैं। झुग्गी बस्तियों के लिए सात सौ करोड़ का बजट जारी किया गया है। दिल्ली में देश का सर्वाधिक न्यूनतम वेतन 22411 रुपये प्रति महीना लागू किया गया। कामकाजी महिलाओं की सुविधा के लिए 500 पालन केन्द्र खोले गए हैं। परिवहन क्षेत्र में चार हजार से अधिक ई-बसें चलाई जा रहा है। नौ हजार से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन बनाए गए हैं। नई ईवी नीति, ई- बाइक, ई-टैक्सी को बढ़ावा देने के अलावा दिल्ली के आखिरी छोर तक सार्वजनिक वाहन को पहुंचाने की दिशा में सरकार काम कर रही है। वैसे सरकार को हाई कोर्ट के हलफनामे के हिसाब से 11 हजार बसों को सड़क पर लाने की भी चुनौती है। यमुना साफ करने के लिए बड़े पैमाने पर काम हो रहा है। 37 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 28 को अपग्रेड किया गया है। नौ पर काम चल कहा है। 12 नए संयंत्र बनेंगे। दिल्ली को वायु प्रदूषण से मुक्त करने से लेकर दिल्ली के मूलभूत ढांचे को विकसित करने से लेकर दिल्ली को आधुनिकतम सुविधाओं से युक्त शहर बनाने के प्रयास के लिए दिल्ली सरकार केन्द्र की सरकार के सहयोग से दिन-रात काम कर रही है।

साल 1993 में दिल्ली में नए प्रशासनिक ढांचे में विधानसभा बनने पर हुए पहले चुनाव में भाजपा की सरकार बनी। पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बदलने के बावजूद उस सरकार ने कई ठोस काम किए। पहली बार यमुना के जल में राज्य की तरह दिल्ली को हिस्सा मिला। दिल्ली सरकार ने अपने अधिकार बढ़ाकर बिजली बोर्ड बनाकर बिजली का उत्पादन बढ़ाया। नए स्कूल कालेज ही नहीं नया विश्वविद्यालय बनाया गया। नए अस्पताल बने और बड़ी संख्या में दिल्ली के हर कोने में निर्माण कार्य हुए। दिल्ली मेट्रो की नींव रखी गई।1984 के सिख दंगा पीडितों को न्याय दिलाने के प्रयास हुए। इस सिलसिले को 1998 में शीला दीक्षित की अगुवाई बनी कांग्रेस सरकार ने और आगे बढ़ाया। दिल्ली के मूलभूत ढांचे के विकसित करने की सर्वाधिक श्रेय शीला दीक्षित के जाता है। पूरी दिल्ली में काम हुए। दिल्ली फ्लाईओवर का शहर बना। असंभव माने जाने वाले बारापूला नाले को ढक कर कई किलोमीटर लंबा फ्लाईओवर बना। ऐतिहासिक सलीम गढ़ किला के ऊपर से सड़क निकाली गई। मेट्रो दिल्ली समेत पूरी एनसीआर(राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में पहुंचा। 15 साल शीला दीक्षित के शासन के बाद आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी(आआपा) की दिल्ली में सरकार दस साल रही। बीच में करीब साल भर के लिए राष्ट्रपति शासन भी लगा। आआपा की अनुभवहीन सरकार ने कामकाज से ज्यादा विवाद ही किया। विकास कार्य पटरी से उतर गई। आम लोगों को लुभाने के लिए सरकार केवल मुफ्त की रेवड़ियां बांटती रही। इसी के बल पर वे दो बार प्रचंड बहुमत से विधानसभा चुनाव जीत गए।

उसके बाद साल भर पहले भाजपा की सरकार बनी। चुनाव प्रचार में भाजपा के नेताओं ने बड़े-बड़े वादे किए थे। उनमें से कुछ पर तो अमल शुरू हो गए हैं लेकिन काफी काम अभी करने हैं। कायदे में आआपा शासन के दस साल ने दिल्ली में विकास की दिशा ही बदल दी थी। उसे वापस पटरी पर लाना भाजपा सरकार के लिए पहली चुनौती थी। उसमें वे कामयाब रहे। दिल्ली की समस्या अनोखी है। उसका इलाका तो 1483 किलोमीटर ही रहना है लेकिन आबादी बेहिसाब बढ़ रही है। दिल्ली की आबादी में हर साल पांच लाख अतिरिक्त आबादी जुड़ती है। देश की राजधानी होने और नोट-वोट की राजनीति में कोई भी राजनीतिक दल इस पर अंकुश लगाना नहीं चाहता है। दिल्ली का अपना कुछ नहीं है। मौसम से लेकर बिजली-पानी के लिए दिल्ली पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली की सड़कों भी एक सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ सकती। शीला दीक्षित ने भी सड़क के ऊपर सड़क (डबल डेकर रोड) बनाने की योजना बनाई थी, उस पर अमल रेखा गुप्ता सरकार करने वाली है। सड़कों से वाहनों की भीड़ कम होना कठिन हो गया है। पेरेफेरियल सड़कों के अलावा चार सौ किलोमीटर मेट्रो चलने और दिल्ली से मेरठ के लिए नमो भारत रेल शुरू होने आदि के बावजूद सड़कों पर भीड़ लगातार बढ़ रही है। केन्द्र सरकार ने दो और रास्तों पर नमो भारत रेल चलाने की घोषणा की है।

पिछली सरकार से विपरीत इस सरकार ने फटाफट मेट्रो के अगले चरणों को मंजूरी दी है। नए चरणों के लिए बजट भी आवंटित किए गए हैं। मेट्रो के विस्तार से सड़कों पर से वाहनों की भीड़ कुछ कम होने की उम्मीद जगी है। लोक निर्माण विभाग की 1400 किलोमीटर सड़कों में से पहले साल में 550 किलोमीटर सड़कों की वाल-टू-वाल कारपेंटिंग का काम पूरा हो गया है। नंद नगरी फ्लाई ओवर जनता को समर्पित कर दिया गया है। मुकरबा चौक अंडर पास मार्च तक और बारापूला का अगला चरण जून तक पूरा होने के दावे किए गए हैं। 40 नए फुट ओवर ब्रिज का काम हो रहा है।

दिल्ली के अनेक सरकारी अस्पतालों की क्षमताएं बढ़ाई गई और सभी खाली पदों को भरा गया। यह प्रक्रिया लगातार जारी रहने वाली है। नए अस्पताल बनाने की घोषणा की गई है। हर महिला को 2500 रुपये प्रति माह महिलाओं को पेंशन देना यानी महिला समृधि योजना के लिए 5100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके लिए समिति काम कर रही है। लाडली योजना के अंतर्गत सालों से लंबित 1.75 लाख बच्चियों के भुगतान की पहले चरण में तीस हजार बच्चियों के खाते में 90 करोड़ रुपये भेजे गए। अब लाड़ली योजना के बजाए ज्यादा पैसा देने वाली लखपति योजना को लागू करने की योजना है। दिल्ली को वायु प्रदूषण से मुक्त करने के लिए वायु प्रदूषण शमन योजना बनाई गई है। सरकार का फोकस दिल्ली की साफ सफाई पर है, इसमें उसे काफी सफलता मिली है। पहला बरसात ऐसा बीता जिसमें बहुचर्चित मिंटो रोड को लंबे समय तक बंद न करना पड़ा। पिछले दिनों सरकार ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सरकार लैपटाप देने और ओलंपिक आदि जीतने वाले खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि बढ़ाई । राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी करने वाले खिलाड़ियों को बीस लाख रुपये की सहायता दी जा रही है। दिल्ली में खेल महाकुंभ का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि दिल्ली में हर रोज निकलने लावे 11 हजार मीट्रिक टन कचरे का निबटान करने की व्यापक योजना बनने से कूड़े के नए पहाड़ बनेंगे। इतना ही नहीं कूड़े के पहाड़ों से भी दिल्ली को जल्दी ही निजात मिल जाएगी।

आम आदमी पार्टी के हारने के कई कारणों में एक काम यह माना जाता है कि उसकी सरकार ने दिल्ली की मूल ढांचे की बेहतरी के लिए ठोस काम नहीं किए। लेकिन उसके कुछ अच्छे कामों में से एक काम निजी स्कूलों के फीस पर नियंत्रण रखना था। आआपा सरकार जाते ही निजी स्कूलों ने बेहिसाब फीस बढ़ा दी। भाजपा सरकार को इसके विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों को शांत करने के लिए सरकार को कठोर कदम उठाने पड़े। सरकार ने फीस रेगुलेशन बिल विधानसभा में पास करके निजी स्कूलों पर लगाम लगाई। इस साल 44 करोड़ रुपये की छात्रवृति बांटी गई। इस सरकार के सामने यमुना को साफ करने की बड़ी चुनौती है। सरकार बनते ही मुख्यमंत्री ने यमुना की आरती शुरू करवाई और यमुना को साफ करने का संकल्प लिया। दिल्ली जल बोर्ड में इसके लिए कई योग्य अधिकारी तैनात किए गए। इस साल यमुना से और दिल्ली के नालों से 22 लाख मीट्रिक टन सिल्ट निकाली गई। यमुना में गिरने वाले नालों को टैप (गंदगी गिरने से रोकने) करने के लिए ड्रोन सर्वे कराए गए। पुराने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने और 12 नए लगाने का काम हो रहा है। यमुना का जल अनवरत बहता रहे, इसके लिए पड़ोसी राज्यों से समन्वय का काम किया जा रहा है। सरकार को भरोसा है कि इसका असर आने वाले समय में दिखेगा।

बावजूद इसके इस सरकार के सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है। सबसे बड़ी चुनौती तो दिल्ली में अपने काम से बड़ी लकीर खींचने की है। भाजपा दिल्ली में विधानसभा बनने के बाद हुए पहले चुनाव यानी 1993-98 के बाद लगातार दिल्ली की सरकार से बेदखल होती रही है। उसे अपने काम के बल पर दिल्ली में लगातार चुनाव जीतने लायक माहौल बनाना है। सालों दिल्ली की सत्ता में रही कांग्रेस हाशिये पर है। दिल्ली पर दस साल राज करने वाली आआपा भी ढलान पर है। संयोग से केन्द्र, दिल्ली और दिल्ली नगर निगम के सत्ता में भाजपा काबिज है। ऐसे में दिल्ली की भाजपा सरकार के लिए दिल्ली की बहुशासन प्रणाली बाधा नहीं बन रही है। अभी तो शुरुआत है आने वाला समय बताएगा कि दिल्ली सरकार अपने लक्ष्य में कितना सफल हो पाई।

(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद