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आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है ई-20 पेट्रोल

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आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है ई-20 पेट्रोल


डॉ. आशीष वशिष्ठ

देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (ई-20) को अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि, इस बदलाव को लेकर वाहन मालिकों और विशेषज्ञों के बीच व्यापक विमर्श और कुछ चिंताएं भी सामने आ रही हैं। सरकार ने देश के ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और कृषि आय बढ़ाने के लक्ष्यों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। ई-20 पेट्रोल भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान का एक बड़ा प्रतीक माना जा रहा है। ऐसे में अहम प्रश्न यह है कि ई-20 पेट्रोल किस प्रकार आत्मनिर्भर भारत की नींव मजबूत कर रहा है?

वास्तव में, ई-20 पेट्रोल भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसान कल्याण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सोचा-समझा, वैज्ञानिक कदम है। यह कोई अचानक या जल्दबाजी का फैसला नहीं है। वर्ष 2001 में शुरू हुए पायलट प्रोजेक्ट से लेकर आज तक दो दशकों से अधिक के वैज्ञानिक परीक्षण, वाहन मूल्यांकन, इंजन मॉडिफिकेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के बाद इसे लागू किया गया है।

सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, ई-20 पेट्रोल से विदेशी मुद्रा की भारी बचत होती है और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होती है। वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की वजह से देश अब तक लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचा चुका है। कच्चे तेल के आयात बिल में सालाना करीब 30,000 से 40,000 करोड़ रुपये की बड़ी बचत हो रही है।

देश को हर साल करीब 1450 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है, जबकि हमारी उत्पादन क्षमता 1750-1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। एथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं, बल्कि मोलासेस, मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस से भी बनाया जा रहा है। इससे करीब 2 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात बचा है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों की आय बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर बायो-रिफाइनरीज खुलने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं।

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और तेल कंपनियों द्वारा गहन वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही इसे देशभर में लागू किया गया है। भारत ने समय से पहले एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्यों को हासिल कर ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों की कतार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है।

भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2023 से ही सभी वाहन निर्माताओं के लिए ऐसे वाहनों का उत्पादन अनिवार्य कर दिया था जो ई-20 पेट्रोल को बिना किसी परेशानी के झेल सकें। भारत स्टेज गाड़ियों में ई-10 पहले से ही इस्तेमाल हो रहा था। ई-20 के लिए फ्यूल सिस्टम, सील और इंजेक्टर को अपग्रेड किया गया है। भारतीय ऑटोमोबाइल निर्माता जैसे मारुति सुजुकी, टोयोटा और हीरो मोटोकॉर्प अब व्यापक रूप से ई-20 और फ्लेक्स-फ्यूल (ई85/ई100) इंजन वाली गाड़ियां बना रहे हैं।

ई-20 पेट्रोल को लेकर उपभोक्ताओं और वाहन मालिकों की भी चिंताएं हैं। केंद्रीय परिवहनमंत्री नितिन गडकरी का दावा है कि ई-20 पेट्रोल की व्यापक टेस्टिंग की गई है और ऐसी कोई प्रमाणित रिपोर्ट नहीं है, जो यह साबित करे कि केवल ई-20 से इंजन खराब हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, माइलेज सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करता है। एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में मामूली अंतर आ सकता है। लेकिन एथेनॉल सस्ता है, प्रदूषण कम करता है और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन आने के बाद यह अंतर और कम हो जाएगा।

तेल मंत्रालय ने भी स्वीकार किया है कि ई-20 ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में लगभग 3-5 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। जानकारों का मानना है कि, 2023 से पहले के निर्मित वाहनों पर लंबे समय तक ई-20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से माइलेज कम हो सकता है और फ्यूल सिस्टम पर असर पड़ सकता है। पुराने वाहनों जो ई-20 के लिए प्रमाणित नहीं हैं, में फ्यूल इंजेक्टर और इंजन के पुर्जों में जंग और खराबी की शिकायतें आ सकती है।

गौरतलब है कि 2004 से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक व्यापक तौर पर गाड़ियों के खराब होने की खबरें सामने नहीं आई हैं। लेकिन पिछले एक डेढ़ महीने से सोशल मीडिया पर ई-20 ईंधन को लेकर कई भ्रामक पोस्टों भी देखने को मिल रही है। बिहार के प्रसिद्ध यूटयूबर मनीष कश्यप ने दावा किया था कि उनकी नई टोयोटा गाड़ी ई-20 पेट्रोल के कारण खराब हो गई है। कंपनी द्वारा कराई गई तकनीकी जांच में यह दावा गलत पाया गया। कंपनी ने मनीष पर कंपनी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और जनता में ई-20 पेट्रोल को लेकर भ्रम पैदा करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं एक ओर प्रख्यात यूटयूबर सौरव जोशी ने ई-20 पेट्रोल से जुड़ी गलतफहमी वाली अपनी पोस्ट के लिये खेद जताया है।

वहीं हाल ही में, रायपुर जिला कंज्यूमर कोर्ट ने ई-20 पेट्रोल से कार का इंजन खराब होने के मामले में ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है। भारत में इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों में आ रही दिक्कतों पर कोर्ट का यह पहला सीधा फैसला है। कंपनी का दावा है कि ग्राहक की कार से निकाले गए ईंधन के सैंपल में दूषित पदार्थ पाए गए थे, जिसके कारण इंजन खराब हुआ, न कि ई-20 पेट्रोल की वजह से। हालांकि इस फैसले से एक नयी बहस जरूर शुरू हो गयी है।

अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में इथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। ब्राजील में 1970 से 100 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है। वहां एक ही पेट्रोल पंप पर कई तरह के ईंधन उपलब्ध हैं। इसमें कोई दो राय नहीं है कि हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं। भारत अपनी जरूरत और संसाधनों के हिसाब से नीति बना रहा है। सरकार का लक्ष्य तेल आयात कम करना और प्रदूषण घटाना है। साल 2025 में भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।

भारतीय मानक ब्यूरो और ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया के परीक्षणों में 80 प्रतिशत से अधिक वाहन बिना किसी समस्या के ई-20 पर चल सकते हैं। पुरानी गाड़ियों के लिए भी कम ब्लेंडिंग विकल्प उपलब्ध हैं। ई-20 में ऑक्टेन संख्या अधिक होने से दहन बेहतर होता है। कुछ गाड़ियों में 1-2 प्रतिशत अधिक खपत हो सकती है, लेकिन ईंधन आयात बिल में होने वाली बचत जो कि लगभग 30,000 करोड़ रुपये सालाना या इससे कहीं अधिक है।

पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में ई-20 ईंधन से कार्बन मोनोऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर (पीएम 2.5) के उत्सर्जन में भारी कमी आती है। एथेनॉल में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने के कारण ईंधन का दहन बेहतर ढंग से होता है। यह भारत के वैश्विक जलवायु लक्ष्यों (पेरिस एग्रीमेंट) को पूरा करने में मदद कर रहा है। यह हमारे प्रदूषित शहरों के लिए वरदान है।

जानकारों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बहुत कम होने पर एथेनॉल की आर्थिक बढ़त कम हो सकती है। लेकिन सरकार का उद्देश्य केवल लागत घटाना नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी, किसानों की आय बढ़ाना और भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। इसलिए वैकल्पिक ईंधन भविष्य की जरूरत हैं। ई-20 केवल पेट्रोल नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है। कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय दोगुनी करने और स्वच्छ हवा देने का यह एक शक्तिशाली माध्यम है।

(लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / मुकुंद