फुटबॉल का सबसे महान खिलाड़ी कौन?
-विवेक शुक्ला
फीफा विश्वकप के दौरान ये सवाल हमेशा उठता है कि फुटबॉल का असली बादशाह कौन है? इस बार 2026 विश्वकप में भी यही बहस जोरों पर है। फुटबॉल का पूरा इतिहास ही महान खिलाड़ियों की तुलना से भरा पड़ा है। ब्राजील के पेले और अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना को अक्सर सर्वकालिक महानतम माना जाता है। दोनों बिग मैच के सच्चे योद्धा थे, जिन्होंने विश्वकप जैसे सबसे बड़े मंच पर अपनी टीम को अकेले दम पर खिताब जिताया।
अब लियोनेल मेस्सी और फ्रांस के किलियन एम्बाप्पे लगातार कमाल कर रहे हैं। इस विश्वकप में इन दोनों का प्रदर्शन देखकर लगता है कि अब इन्हें भी पेले-माराडोना वाली श्रेणी में रखना चाहिए या नहीं? कुछ जानकार कहते हैं कि अभी इनका करियर चल रहा है इसलिए जल्दबाजी न करें। मेस्सी तो 2022 में विश्वकप जिताकर खुद को साबित कर चुके हैं। अगर एम्बाप्पे 2026 जीत गए तो उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी।
फुटबॉल प्रेमी एक राय नहीं हैं! एक पीढ़ी पेले को पूजती है, दूसरी मेस्सी को। बेशक, पेले और माराडोना ने फुटबॉल को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। मेस्सी ने इसमें सुंदरता और निरंतरता जोड़ी, जबकि एम्बाप्पे ने गति और भूख का जादू दिखाया। इन चारों को अलग-अलग श्रेणी में रखना ही बेहतर है। सब महान हैं, बस युग अलग-अलग हैं। 2026 विश्वकप ने इनकी तुलना को और रोचक बना दिया है।
तीन विश्वकप की विरासत
पेले को फुटबॉल का राजा ही कहते हैं। उन्होंने ब्राजील को 1958, 1962 और 1970 में विश्वकप जिताया। ये उपलब्धि आज भी अनोखी है। कोई और खिलाड़ी तीन विश्वकप नहीं जीत सका। 1958 में सिर्फ 17 साल की उम्र में उन्होंने विश्वकप जीता और फाइनल में दो गोल ठोके। कुल मिलाकर चार विश्वकप में 14 मैच खेले और 12 गोल किए।
फुटबॉल का मतलब सिर्फ लंबी शॉट मारना नहीं होता। असली बड़ा खिलाड़ी वो है जो ड्रिबलिंग में माहिर हो, जिसे देखने दर्शक स्टेडियम भरकर आते हैं। पेले इसमें कमाल के थे। उनके दोनों पैर चलते थे, हेडिंग भी जबरदस्त। अंतरराष्ट्रीय मैचों में 92 खेलों में 77 गोल किए। क्लब में सैंटोस के लिए ढेर सारे खिताब जीते। उन्होंने फुटबॉल को पूरी दुनिया में लोकप्रिय बनाया। हां, आलोचक कहते हैं कि उनके समय में प्रतिस्पर्धा कम थी।
जीनियस और विवाद
डिएगो माराडोना 1986 विश्वकप के असली नायक थे। उनका दायां पैर तो औसत था, हेडिंग भी औसत। लेकिन उनका बायां पैर? वो जादू था! गेंद उनके बाएं पैर पर आ गई तो फिर रोकना नामुमकिन। गेंद पर नियंत्रण, विरोधी को छकाने की कला ऐसी दोबारा नहीं देखी जाएगी। वो मैदान में हर जगह नजर आते थे। पेले की ड्रिबलिंग भी लाजवाब थी लेकिन माराडोना उनसे थोड़े ऊपर माने जाते हैं। फ्री किक में भी मास्टर। टीम पर उनका असर गजब का था।
उन्होंने अर्जेंटीना को खिताब दिलाया। क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 'हैंड ऑफ गॉड' गोल और मिडफील्ड से अकेले दौड़कर किया 'सेंचुरी का गोल' आज भी याद किया जाता है। 1986 में 5 गोल और 5 असिस्ट- एक विश्वकप में ऐसा करने वाले इकलौते खिलाड़ी। 91 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 34 गोल। चार विश्वकप में 21 मैच, 8 गोल। क्लब में नेपोलि को दो सीरी ए खिताब दिलाए, जो उस वक्त इटली की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। उनका जादू ड्रिबलिंग और विजन में था। बिग मैच में खिल उठते थे। लेकिन ऑफ-फील्ड विवाद, ड्रग्स और अनुशासन की कमी उनकी छवि पर असर डालती रही।
रिकॉर्ड्स का राजा
बहुत से लोग मेस्सी को पहले ही द ग्रेटेस्ट ऑफ ऑल टाइम मान चुके हैं। वे अभी 900 से ज्यादा गोल कर चुके हैं। 2022 में अर्जेंटीना को विश्वकप चैंपियन बनाया। अब 2026 विश्वकप में 38 साल की उम्र में भी कमाल कर रहे हैं। ग्रुप स्टेज में हैट्रिक समेत 6 गोल दाग चुके हैं। मेस्सी का खेल शांत लेकिन घातक है। उनकी पासिंग, फ्री किक और फिनिशिंग बेमिसाल है। पहले आलोचक कहते थे कि देश के लिए विश्वकप नहीं जिता पाएंगे लेकिन 2022 ने वो सवाल हमेशा के लिए खत्म कर दिया। 2026 में उनका प्रदर्शन साबित कर रहा है कि उम्र कोई बाधा नहीं।
नया सितारा
एम्बाप्पे फुटबॉल के सबसे तेज और घातक हमलावर हैं। उनकी गति अद्भुत है। डिफेंस को चकमा देकर तेजी से आगे बढ़ना उनका सबसे बड़ा हथियार। बाएं पैर से सटीक शॉट, हेडिंग और फिनिशिंग में माहिर। गोल करते हैं और पूरी टीम को गति देते हैं। आत्मविश्वास और ठंडा दिमाग उन्हें बड़े मैचों का खिलाड़ी बनाता है।2018 में 19 साल की उम्र में फ्रांस को खिताब दिलाया और यंग प्लेयर अवॉर्ड जीता। 2022 में 8 गोल किए। 2026 विश्वकप में अब तक 6 गोल कर चुके हैं। टूर्नामेंट के टॉप स्कोररों में शामिल हैं।
ये सब खिलाड़ी बड़े मैचों में चमके। माराडोना और मेस्सी ने अकेले टीम को कप जितवाया। एम्बाप्पे टीम प्लेयर भी हैं। आजकल फुटबॉल में शारीरिक फिटनेस, टैक्टिक्स और प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा है। मेस्सी-एम्बाप्पे ने यूरोपीय लीगों में खेला, जहां स्तर बहुत ऊंचा है। पेले-माराडोना के समय अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल कम ग्लोबल था लेकिन विश्वकप आज भी सबसे बड़ा मापदंड है।
फुटबॉल की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि बहस कभी खत्म नहीं होती। नए खिलाड़ी पुरानों की विरासत को आगे बढ़ाते रहते हैं। पेले-माराडोना की तरह मेस्सी और एम्बाप्पे भी इतिहास में अमर रहेंगे। अब आप बताएं कि आपका फेवरेट प्लेयर कौन है?
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार और जाने-माने स्तंभकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

