सड़क दुर्घटनाओं की चौंकाती हकीकत
-ऋतुपर्ण दवे
भारत में सड़क दुर्घटनाओं में कमी न आना बेहद दुर्भाग्यजनक है। कई वर्षों के आधिकारिक सरकारी आंकड़े बताते हैं कि लाख कोशिशों के बावजूद आशातीत सफलता न मिलना, कहीं-न-कहीं सड़क पर चलने वालों की मनोदशा पर भी निर्भर करता है। इसी चलते हर रोज देश में कहीं-न-कहीं से भीषण सड़क दुर्घटनाओं के दुखद समाचार मिलते रहते हैं। भारत सरकार की परिभाषा में एक से ज्यादा लोगों की मौत को भीषण सड़क हादसा माना जाता है। सड़क हादसों में बेवजह हजारों लोगों की जान हर वर्ष जाती है।
यदि केवल किसी एक वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें तो काफी चिंताजनक स्थिति है। वर्ष 2023 के आंकड़े ही लें तो दुर्घटनाओं की भयावह तस्वीर उभरती है। इस वर्ष 68783 हिट एण्ड रन मामलों में 31209 मौतें हुईं जबकि 54574 लोग घायल हुए। सभी तरह की दुर्घटनाओं का विश्लेषण काफी सोचने और डराने को मजबूर करता है। इसी वर्ष सड़क पर खड़े वाहनों से टकरा कर 13810 दुर्घटनाओं में 5636 मौतें और 12575 घायल हुए। पीछे से टकराने की दुर्घटनाओं में 36804 मौतें 107161 घायल हुए। साइड से टक्कर की 73805 घटनाओं में 20623 मौतें और 74017 घायल हुए। सड़क से नीचे गिरने की 21527 घटनाओं में 10196 लोगों की मृत्यु हुई, 20719 घायल हुए। स्थिर वस्तु से टकराने की 17451 घटनाओं में 8291 मृत्यु और 16416 घायल हुए। जबकि वाहन पलटने की 18905 घटनाओं में 9124 की मृत्यु और 21216 घायल हुए। वहीं, आमने-सामने की टक्कर की 84348 दुर्घटनाओं में 28989 की मृत्यु और 89867 घायल हुए। अन्य दुर्घटनाओं में 71298 घटनाओं में 22109 की मृत्यु हुई जबकि घायलों की संख्या 66280 रही। इस तरह केवल 2023 में 480583 दुर्घटनाओं में 172890 मौतें और 462825 दुर्घटना के शिकार हुए जो अन्य क्षति छोड़कर, मानवीय हैं।
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि ज्यादातर दुर्घटनाएँ तेज गति, बिना हेलमेट, वाहनों के बीच बिना सुरक्षित दूरी, सुस्ती, नींद के झोंके, वाहन चलाते समय धूम्रपान, शराब या किसी अन्य नशे में होने से दुर्घटनाएँ होती हैं। रात में हमारे वाहन के हेडलाइट्स, टेल लाइट्स और इंडिकेटर्स खराब होने या काम नहीं करने, टायरों का ध्यान नहीं रखने और ज्यादा पुराने, घिसे, कटे-फटे, क्रैक्स से भरपूर टायरों का उपयोग, बरसात के मौसम में घिसे टायरों पर ट्रैक्शन कम होने से वाहन फिसलने और प्रायः ब्रेक नहीं लगने से भी दुर्घटनाएं आम हैं। ब्रेक की नियमित जांच से कई तरह की दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। वाहन चलाते समय मोबाइल पर बातें भी ध्यान भटकाता है।
गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी में आगे निकलने की होड़ और ओवरटेक भी वजह है। छोटी सड़कों पर ध्यान नहीं देना कि कहीं सामने दूसरा वाहन तो नहीं आ रहा? जबकि हाइवे पर इंडीकेटर का सही उपयोग नहीं करना, दुर्घटनाओं का सबब बनता है। ओवरटेक की होड़ से भी दुर्घटनाएँ होती हैं। यह सभी वो छोटे-छोटे उपाय व यातायात के नियम हैं जिन्हें हम जानते तो हैं पर अमल में नहीं लाते हैं। थोड़ी सतर्कता, थोड़ी सजगता से बड़ी-बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सकता है। इसीलिए यातायात विभाग का बेहद लोकप्रिय नारा है- दुर्घटना से देर भली।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

