नसीरुद्दीन शाह बनाम पीयूष मिश्राः सवाल, शब्दों के वाण और बेबाकी
-राजेश शांडिल्य
एनएसडी के दौर से अपने बेबाक अंदाज और धमाकेदार अभिनय के लिए पहचाने जाने वाले पीयूष मिश्रा की एक किताब का नाम है- तुम्हारी औकात क्या है, पीयूष मिश्रा। वहीं, अस्सी के दशक में नसीरुद्दीन शाह की चर्चित फिल्म आई थी- अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है। संयोग देखिए, आज दोनों कलाकारों के बीच चल रहे शब्द बाणों में जैसे इन दोनों शीर्षकों की झलक दिखाई दे रही है। एक तरफ सवाल, दूसरी तरफ गुस्सा और बीच में है बेबाकी की अपनी-अपनी कसौटी।
नसीरुद्दीन शाह और पीयूष मिश्रा दोनों ऐसे कलाकार हैं, जिनकी पहचान सिर्फ अभिनय से नहीं बल्कि बेबाक राय और तीखी भाषा शैली से भी बनी है। खैर, दोनों के बीच 2026 में शुरू हुआ सार्वजनिक जुबानी टकराव दिलचस्प सवालों का हिस्सा बन चुका है। पीयूष मिश्रा के धोबी पछाड़ से फिलहाल नसीर चित दिख रहे हैं। इस बीच चर्चा यह हो रही है कि दूसरों की चुप्पी पर सवाल उठाने वाला व्यक्ति जब खुद सवालों के घेरे में आए तो उसकी अपनी कसौटी क्या होगी?
विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब नसीरुद्दीन शाह ने छात्र आंदोलन के मुद्दे पर बॉलीवुड के बड़े सितारों की चुप्पी पर सवाल खड़ा कर दिया था। उनके विचार से मेल खाने वाले एक न्यूज डिजिटल प्लेटफार्म से बातचीत में उन्होंने कहा था कि सेलेब्रिटीज तब बोलेंगे जब उनका जमीर उनसे ऐसा करने को कहेगा। एक कहावत है कि जिस कुत्ते के मुंह में हड्डी हो, वह भौंक नहीं सकता। जैसे ही हड्डी उसके मुंह से गिरेगी या उसके दांत टूटेंगे, तब वह भौंकेगा।
यह टिप्पणी यहीं खत्म नहीं हुई। झारखंड के छात्र आंदोलन में पहुंचे पीयूष मिश्रा ने उसी रूपक को लपका था। पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह से पलटकर सवाल किया था, नसीर साहब आपने कहा था कि जिनके मुंह में हड्डी होती है, वे बोल नहीं सकते, अब मैं पूछ रहा हूं कि वे दूसरे कुत्ते कौन हैं, जो चुप हैं? यहीं से मामला सिर्फ दो अभिनेताओं की नोकझोंक से आगे बढ़ता हुआ मुखरता की कसौटी पर बहस का मुद्दा बन गया।
मिश्रा ने सवाल उठाया कि यदि नसीरुद्दीन शाह छात्र आंदोलनों और राजनीतिक घटनाओं पर बॉलीवुड की चुप्पी को लेकर इतने मुखर हैं तो क्या उनकी अपनी आवाज भी हर ऐसे मुद्दे पर समान रूप से सुनाई देती है?
उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से तर्कसंगत सवाल पूछा कि कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर मौनधारण क्यों? मच्छार ने फ्लाई दुबई की उड़ान में सह-पायलट के हमले के बावजूद कॉकपिट का नियंत्रण बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 174 यात्रियों की जान बचाने में योगदान दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सहित दुनियाभर में स्मित मछार की बहादुरी को सराहा जा रहा है।
5 अक्टूबर को मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह पर फिर तीखा हमला किया। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह की मुंबई में सीजेपी प्रदर्शन के दौरान एक कार्यकर्ता से मुलाकात का उल्लेख करते हुए पूछा कि स्मित मच्छार की बहादुरी पर भी कुछ कहिए। साथ ही उन्होंने पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से जुड़े छात्र घटनाक्रम और झारखंड के छात्र आंदोलन के मुद्दे पर पर भी नसीरुद्दीन पर सवाल उठाए। हालांकि सबसे व्यक्तिगत और तीखा हिस्सा झारखंड को लेकर था। मिश्रा का दावा है कि उन्होंने नसीरुद्दीन शाह से वहां के छात्रों के लिए मदद मांगी थी लेकिन नसीरुद्दीन शाह की ओर से उन्हें एक पाकिस्तानी शायरा की नज्म मिली। मिश्रा ने कहा कि वहां कविता नहीं बल्कि आटा, दाल, रोटी, गुड़, लिट्टी-चोखा जैसी वास्तविक मदद की जरूरत थी।
मिश्रा का दावा है कि नसीर की ओर से इसका सार्वजनिक जवाब सामने नहीं आया है। और फिर आया वह वाक्य जिसने इस पूरे विवाद को अगला मोड़ दे दिया। पीयूष मिश्रा ने कहा कि अब जब भी आप (नसीरुद्दीन शाह) कोई बयान देंगे, आपको पीयूष मिश्रा का जवाब मिलेगा। यानी नसीरुद्दीन शाह ने जिस हड्डी के जरिए दूसरों की चुप्पी पर व्यंग्य कसे थे, मिश्रा ने उसी हड्डी को उठाकर सवाल उनके सामने परोस दिया।
पीयूष ने नसीर के शब्दों को ही उनके सामने सवाल बनाकर रख दिया है।
यही सवाल नसीरुद्दीन शाह की सार्वजनिक छवि पर भी लागू होता है। वे एक बड़े अभिनेता हैं, उनकी राजनीतिक-सामाजिक राय रखने की स्वतंत्रता पर सवाल नहीं है लेकिन जब वे दूसरे कलाकारों की चुप्पी पर टिप्पणी करते हैं, तब उनकी अपनी मुखरता भी स्वाभाविक रूप से जांची जाएगी। राजेश खन्ना, फरहान अख्तर और अनुपम खेर पर की गई टीका-टिप्पणी भारतीय सिने प्रेमी और विशेषकर इन कलाकारों के प्रशंसक शायद भूले नहीं होंगे। ऐसे में नसीरुद्दीन शाह को भारतीय सिनेमा की 100 वर्षों से अधिक की यात्रा में कौन-कौन सी सिनेमाई हस्तियां उनके मानदंड से योग्य और अयोग्य हैं, उनकी सूची जारी कर देनी चाहिये। उनकी कसौटी पर कौन उत्कृष्ट, कौन औसत और क्यों, तब नसीरुद्दीन शाह की यह कसौटी भारतीय सिनेमा में अभिनय मूल्यांकन की अलग नज़ीर के रूप में दर्ज हो सकती है। वर्ना उनकी तमाम टिप्पणियां पक्ष विशेष की मुखरता की श्रेणी में दर्ज होती रहेंगी।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

