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परिवर्तन के 12 वर्ष : संकल्प, सेवा और सिद्धि

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परिवर्तन के 12 वर्ष : संकल्प, सेवा और सिद्धि


डॉ. शिवानी कटारा

पिछले 12 वर्षों में भारत ने राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक परिवर्तनों का एक नया युग देखा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास ने केवल गति ही नहीं, बल्कि नई दिशा और नई चेतना भी प्राप्त की। आर्थिक सुधारों से लेकर डिजिटल क्रांति, राष्ट्रीय सुरक्षा से सामाजिक समावेशन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण तक भारत ने आत्मनिर्भरता, सुशासन और वैश्विक प्रतिष्ठा की ओर उल्लेखनीय यात्रा तय की है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र के साथ प्रारंभ हुई यह यात्रा आज “विकसित भारत 2047” के व्यापक राष्ट्रीय संकल्प में रूपांतरित होती दिखाई देती है।

आर्थिक सुधार और वित्तीय समावेशन

मोदी सरकार की शुरुआती और सबसे महत्वाकांक्षी पहलों में वर्ष 2014 का “मेक इन इंडिया” अभियान प्रमुख रहा, जिसने भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा प्रदान की। घरेलू उत्पादन, विदेशी निवेश और सरल नियमों के कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा निर्माण और मोबाइल उत्पादन जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। इससे रोजगार और औद्योगिक विकास को नई गति मिली।

इसी दौरान “अंत्योदय” के संकल्प के तहत आर्थिक समावेशन पर विशेष ध्यान दिया गया। वर्ष 2015 में शुरू हुई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने छोटे उद्यमियों, महिलाओं और युवाओं को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराकर स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को नई पहचान दी। 6.3 करोड़ से अधिक MSME उद्यमों को सहायता मिली। वहीं, जन धन योजना के तहत 55 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले गए, जिनमें 30.80 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं। 36.73 करोड़ ग्रामीण खातों के साथ यह दुनिया का सबसे बड़ा वित्तीय समावेशन अभियान बना।

वर्ष 2017 में लागू GST को स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े कर सुधारों में माना जाता है। अनेक अप्रत्यक्ष करों को हटाकर “एक राष्ट्र, एक कर” की अवधारणा को मजबूत किया गया, जिससे पारदर्शिता बढ़ी, कर आधार विस्तृत हुआ और राजस्व संग्रह अधिक व्यवस्थित बना। IMF के अनुसार भारत का GDP वर्ष 2014 के लगभग 2 ट्रिलियन डॉलर से बढ़कर 2025 में 4.18 ट्रिलियन डॉलर से अधिक हो गया है। भारत जापान को पीछे छोड़ विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जबकि Economic Survey 2025-26 ने FY26 में 7.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया है।

कोविड के बाद “आत्मनिर्भर भारत” अभियान आर्थिक रणनीति का केंद्र बना। Production Linked Incentive (PLI) योजना के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेलीकॉम और ऑटोमोबाइल सहित 14 रणनीतिक क्षेत्रों को बढ़ावा मिला, जिससे 5.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ। Ease of Doing Business, GST सुधार और डिजिटल पारदर्शिता के कारण 2025-26 में रिकॉर्ड 94.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ। वहीं, नोटबंदी ने अल्पकालिक चुनौतियों के बावजूद डिजिटल भुगतान, औपचारिक अर्थव्यवस्था तथा काले धन, नकली मुद्रा और आतंक वित्तपोषण पर रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला।

वहीं, योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग की स्थापना ने सहकारी संघवाद, तकनीक-आधारित शासन और प्रशासनिक दक्षता को नई मजबूती प्रदान की।

डिजिटल इंडिया, सामाजिक सशक्तिकरण और आधारभूत विकास

डिजिटल इंडिया अभियान ने पिछले दशक में भारत की आर्थिक और तकनीकी तस्वीर को व्यापक रूप से बदल दिया। भीम ऐप, आधार और UPI जैसी पहलों ने भारत को डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाया, जहाँ आज विश्व के लगभग 49 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल ट्रांजैक्शन भारत में होते हैं। UPI कई देशों में सक्रिय है, जबकि IMPS और FASTag ने डिजिटल अर्थव्यवस्था को और गति दी। DBT, ऑनलाइन सेवाओं और डिजिटल पारदर्शिता ने सरकारी योजनाओं में लीकेज कम किए तथा लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया।

स्टार्टअप इंडिया और स्टैंड-अप इंडिया जैसी पहलों ने उद्यमिता को नई ऊर्जा प्रदान की। इन योजनाओं ने युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों को रोजगार खोजने वालों से रोजगार सृजित करने वालों में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना ने पारंपरिक कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण और डिजिटल बाज़ार से जोड़कर नई पहचान प्रदान की।

सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में “स्वच्छ भारत अभियान” के तहत 11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ, जबकि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध हुई। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान ने बालिका शिक्षा, सुरक्षा और जागरूकता को राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप दिया। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने करोड़ों गरीब महिलाओं को धुएँ से मुक्ति दिलाकर स्वच्छ ईंधन, बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की नई दिशा दी। “तीन तलाक” प्रथा पर रोक लगाकर मुस्लिम महिलाओं को समानता, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की नई सुरक्षा प्रदान की गई।

कृषि क्षेत्र में PM-KISAN योजना के माध्यम से 11 करोड़ किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की प्रत्यक्ष सहायता दी गई। आधारभूत संरचना के क्षेत्र में पीएम गति शक्ति योजना के तहत 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य निर्धारित किया गया। 3.5 लाख किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें तथा तीव्र गति से विस्तारित राष्ट्रीय राजमार्गों ने देश की कनेक्टिविटी को नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। नए हवाई अड्डों के निर्माण और ‘उड़ान’ योजना ने देश की हवाई कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार किया, जबकि वंदे भारत और तेजस जैसी आधुनिक ट्रेनों ने भारतीय रेल के आधुनिकीकरण को नई गति दी।

शिक्षा क्षेत्र में 2014 के बाद 1,200 से अधिक नए विश्वविद्यालय, 10 नए IIT तथा 7 नए IIM स्थापित किए गए। वहीं, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर सामाजिक न्याय के दायरे का विस्तार किया गया, जिससे आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा और रोजगार में नए अवसर प्राप्त हुए।

नई शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, कौशल-आधारित और आधुनिक स्वरूप प्रदान किया। “स्किल इंडिया मिशन” और “प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना” के माध्यम से युवाओं को उद्योग आधारित प्रशिक्षण उपलब्ध कराया गया। वर्ष 2025 तक 2.27 करोड़ से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है। AI, 5G, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में 400 से अधिक आधुनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए गए। इंडिया AI मिशन और सेमीकंडक्टर मिशन ने भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया। नई दिल्ली में आयोजित AI Impact Summit ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारत की वैश्विक नेतृत्वकारी भूमिका को और सुदृढ़ किया।

वहीं, “खेलो इंडिया” अभियान ने युवाओं में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा दी। 2025 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 10,000 से अधिक खिलाड़ियों की भागीदारी ने भारत की उभरती खेल प्रतिभा और “फिट इंडिया” विज़न को और मजबूत किया।

सुरक्षा, सांस्कृतिक और वैश्विक नेतृत्व

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में मोदी सरकार ने अधिक स्पष्ट, आक्रामक और निर्णायक नीति अपनाई। उरी और पुलवामा आतंकी हमलों के बाद सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक ने आतंकवाद के प्रति भारत की कठोर रणनीति को विश्व के सामने स्थापित किया। “ऑपरेशन सिंदूर” में भारतीय वायुसेना द्वारा आतंकी ठिकानों पर की गई सटीक कार्रवाई ने भारत की सामरिक क्षमता का परिचय दिया। “अग्निपथ योजना” ने युवाओं को सेना से जोड़ते हुए सशस्त्र बलों को अधिक युवा और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में पहल की। वहीं, वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटाकर जम्मू-कश्मीर के पूर्ण राष्ट्रीय एकीकरण और विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया गया।

नक्सली हिंसा का खात्मा और ‘रेड कॉरिडोर’ के सिमटने से नक्सल-मुक्त भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हुई। सुरक्षा और विकास की समन्वित रणनीति ने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक पहुँच, आधारभूत सुविधाओं और जनविश्वास को मजबूत किया।

इसी अवधि में भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत के पुनर्जागरण को नई ऊर्जा मिली। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक, गौतम बुद्ध सर्किट, केदारनाथ पुनर्विकास और सोमनाथ मंदिर परिसर के आधुनिकीकरण ने आध्यात्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाया। राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ के राष्ट्रप्रेरक स्वरूप को रेखांकित करते हुए राष्ट्र गान के समानांतर दर्जा दिया गया।

नया संसद भवन आधुनिक भारत की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं का प्रतीक बनकर उभरा। वहीं, डॉ. भीमराव आंबेडकर राष्ट्रीय स्मारक, स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, राष्ट्र प्रेरणा स्थल और प्रधानमंत्री संग्रहालय जैसे संस्थानों ने भारत की ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय गौरव को नई मजबूती दी।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भी भारत ने ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल कीं। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग के साथ भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुँचने वाला विश्व का पहला देश बना, जबकि मंगलयान मिशन ने भारत को सबसे कम लागत में मंगल तक पहुँचने वाले देशों की अग्रणी श्रेणी में स्थापित किया।

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका पिछले वर्षों में लगातार सशक्त हुई है। सफल G20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी और “ग्लोबल साउथ” की प्रभावशाली आवाज़ के रूप में भारत ने नई पहचान बनाई। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया जाना भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक बना। वहीं, “वैक्सीन मैत्री” अभियान के तहत 100 से अधिक देशों को कोविड वैक्सीन उपलब्ध कराकर भारत ने वैश्विक मानवीय सहयोग और जिम्मेदारी का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

मोदी सरकार के 12 वर्ष भारत के “अमृत काल” की मजबूत आधारशिला के रूप में उभरे हैं। “विकसित भारत 2047” का विज़न केवल आर्थिक प्रगति का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह एक समावेशी, तकनीक-सक्षम, सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण का व्यापक संकल्प है। मतभेदों के शोर से परे, परिवर्तन की यह यात्रा स्वयं साक्षी है कि बीते 12 वर्षों में भारत ने विकास, विरासत और वैश्विक नेतृत्व की एक नई गाथा रची है।

(लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश