‘मनरेगा‘ और ‘विकसित भारत जी राम जी‘
-हृदयनारायण दीक्षित
कांग्रेस ’मनरेगा बचाओ संग्राम’ अभियान चला रही है। कांग्रेस बीते 11 वर्षों से सत्ताहीन है। अच्छी बात है कि कांग्रेस ने केन्द्र का विरोध करने के लिए सड़क पर आने का निर्णय लिया है। रोजगार योजनाएं गरीबों की आय बढ़ाने की दृष्टि से चलाई गई हैं। कोई भी व्यवस्था जड़ नहीं होती। देशकाल की गति में जीर्ण-शीर्ण और पुराना विस्थापित होता है। नया उसकी जगह लेता रहता है। भाजपा ने कांग्रेस को विस्थापित किया। वह पुरानी होने के साथ-साथ ध्येयनिष्ठ भी नहीं रही। जन समर्थन घटा। भाजपा ने कांग्रेस को विस्थापित कर दिया। कांग्रेस मनरेगा को लेकर अपना रोना रो रही है। मनरेगा में कानूनी तौर पर रोजगार पाने की गारंटी थी लेकिन प्रमुख विपक्षी दल होने के बावजूद वह नए वी.बी.जी राम जी एक्ट का विरोध कर रही है। देखना यह चाहिए कि राजग सरकार द्वारा लाए गए नए अधिनियम की अच्छाइयां बुराइयां क्या हैं? आइए नए अधिनियम वी.बी.जी राम जी की खास विशेषताएं जान लें।
इस अधिनियम द्वारा ग्रामीण परिवारों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत कार्य दिवसों को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन प्रतिवर्ष कर दिया गया है। अभी तक लागू कानून में मजदूरी देने की कोई सुनिश्चित अवधि नहीं थी। लेकिन नए अधिनियम में 15 दिन के भीतर मजदूरी का भुगतान जरूरी बताया गया है। ऐसा न किए जाने पर मजदूरों को पांच प्रतिशत की दर से प्रतिदिन ब्याज मिलेगा। रोजगार प्राप्त करने के 15 दिनों के भीतर काम न मिलने पर भी बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है।
भारत में शिक्षित बेरोजगारों की संख्या लगातार बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा मजदूरी के लिए महानगरों की ओर रुख करता है। सड़क के किनारे सोता है। सुबह प्रतीक्षा करता है कि कोई मकान बनाने वाला, दुकान चलाने वाला उसको दिनभर का काम दे दे। गांव में रोजगार के अवसर नहीं हैं। खेत मजदूर की मोलभाव करने की क्षमता नहीं होती है। बडे़-बड़े महानगरों में मजदूरों के मार्केट लगते हैं। वहां से लोग कम पैसे में तय करके मजदूर लाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के मजदूरों की व्यथा सिर्फ आंकड़ों से नहीं जानी जा सकती। ताजा ’वी बी राम जी’ योजना ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों के लिए सुखद आश्वासन है।
भारत कृषि प्रधान देश है। कृषि अभी भी घाटे का सौदा है। पीछे लगभग 28 वर्षों से किसानों को किसान क्रेडिट योजना के माध्यम से कृषि कार्य के लिए ऋण दिया जाता है। योजना अच्छी है। ऋण लेकर बुवाई आदि के सीजन में खाद-पानी देने के लिए पूँजी उपलब्ध कराने की योजना अच्छी है। तमाम योजनाएं अच्छी तो हैं लेकिन किसानों को उनकी जानकारी नहीं है। गांव में रोजगार के अवसर नहीं हैं। पढ़े-लिखे युवा भी शहर भागते हैं।
रोजगार योजनाओं का इतिहास दिलचस्प है। यह योजना सबसे पहले स्थानीय कठिनाइयों के चलते साल 1970 में महाराष्ट्र में लागू हुई थी। तब इसे ’महाराष्ट्र रोजगार गारंटी योजना’ कहा गया। साल 1980 में भारत की पहली केन्द्रीयकृत योजना लागू हुई। भ्रष्टाचार के कारण योजना का लाभ नहीं मिला। योजनाओं का धन बिचैलिए मार देते थे। इसके बाद गाजे-बाजे के साथ आई जवाहर रोजगार योजना। यह भी अपने उद्देश्यों में असफल रही। इसका फिर नाम बदला और इसे ’नरेगा’ नाम से जाना गया। फिर साल 2008 में यह ’मनरेगा’ हो गई। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की योजनाएं इसी तरह असफल होती गईं।
भारत की मिट्टी में उपजाऊ शक्ति ज्यादा है। कृषि कार्य में गरीब परिवार जुटे रहते हैं। सभी सदस्य काम करते हैं। तब किसी प्रकार गरीब परिवार चलता है। बुवाई और फसल कटाई के समय के दौरान 60 दिनों का अवकाश रखा गया है। इससे लाभ यह होगा कि कृषि कार्यों के लिए भी श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित रहेगी।
ग्राम सभाएं बुनियादी लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं। ग्राम स्वराज गांधीजी का स्वप्न था। भारत की संविधान सभा में ग्राम पंचायत के गठन पर लंबी बहस हुई थी। ज्यादातर सदस्यों ने ग्राम पंचायत को स्वायत्तशासी और आत्मनिर्भर बनाने का आग्रह किया था। डॉ. आम्बेडकर ने कहा था कि, ”ग्राम पंचायतें मेरे विचार से स्थानीय कलह का अड्डा होंगी।” पीछे 10-12 साल में सरकारी स्तर पर ग्राम पंचायतों को विकसित और समृद्ध बनाने की मद पर भारी व्यय हुआ है। निःसंदेह कहीं-कहीं कुछ ग्राम पंचायतों ने बहुत अच्छा काम किया है लेकिन तमाम ग्राम सभाओं द्वारा विकास कार्यों की धनराशि को हड़पने का भी काम किया है।
विकसित ग्राम पंचायत योजना का विकास स्थानीय संस्थाओं द्वारा किया जाना है। ये सब करने के लिए समय-समय पर प्रशासनिक खर्च भी आता है। योजनाओं के ठीक से कार्यान्वयन में व्यय होने वाले धन को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत कर दिया गया है।
वैसे तो इस योजना का उद्देश्य लोगों को रोजगार देना है। गांव में सरकारी स्तर पर सेवा देने वाले कोई कार्यालय नहीं हैं। उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में पंचायत भवन बनाए गए हैं। इसके लिए अलग बजट का प्रावधान करना होता है। ऐसी संपत्ति का निर्माण इसी रोजगार अधिनियम के अंतर्गत चार मुख्य क्षेत्र में केन्द्रित किया गया है।
रोजगार योजना के धन से ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। खेत मजदूर पलायन नहीं करेंगे और श्रमिकों को रोजगार मिलेगा और इसी धन से जल संरक्षण जैसे कार्य किए जा सकेंगे। जल आपूर्ति को लेकर अक्सर शिकायतें रहती हैं। उत्तर प्रदेश में अनेक जिले प्रदूषित जल के कारण पेयजल संकट में हैं। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद में बलाई, निबई, टिकरी गणेश, आटा, सुपासी, रामचरामऊ, लखापुर, बंथर, अनूपपुर, खटुहा नौगवा, रिठानई, बण्ड हमीरपुर, सलेथू, गढ़ाकोला, कतहर आदि गांवों में सरकार ने स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की है। लेकिन काम अभी बाकी है। जल की आवश्यकता को लेकर ही इंदौर में काफी बवाल हुआ है। कांग्रेस ने इंदौर में आंदोलन किया। इन पंक्तियों के प्रेस में जाने तक राहुल गाँधी कुछ लोगों के साथ इंदौर में प्रदर्शन कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ’हर घर नल’ नामक महत्वाकांक्षी योजना और उसका क्रियान्वयन किया। जल निकासी की योजना भी इसी धन से बनाई जा सकेगी। जरूरत इस बात की है कि वीबी जी राम जी के ठीक से अनुपालन के लिए विकासखण्ड स्तर पर सक्षम अधिकारियों की टीम गठित की जानी चाहिए। इस टीम को कार्यदायी संस्थाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। साथ में गलती होने पर चेतावनी और दुरुपयोग पर कार्यवाही भी करना चाहिए। वीबी जी राम जी योजना में जल संरक्षण और जल सम्बन्धी अन्य कार्य होंगे। गांव में स्थानीय स्तर पर बुनियादी ढांचा, गांव की सड़क और संपर्क के साधन विकसित करना भी इस योजना का अंग है।
पंचायती राज संस्थाएं अपना काम ठीक से नहीं कर पा रही हैं। कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसर कम हैं। कृषकों के पास कृषि कार्य के लिए जरूरी पूंजी का अभाव रहा। सरकारों ने इस समस्या को चिन्हित कर लिया। त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव, वोट के बदले नोट योजना में फंसे हैं। क्षेत्र पंचायत प्रमुख, जिला पंचायत अध्यक्षों के चुनाव में करोड़ों रुपए का लेनदेन होता है। बहुत समय से मांग की जा रही है कि पंचायती राज के चुनाव आम मतदाता से कराए जाएं लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। जो लाखों करोड़ों रुपए देकर पद पाए हैं या चुनाव जीते हैं, वह उस धनराशि की वसूली भी करते हैं। केन्द्र में योजनाओं के क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति है। विश्वास है कि योजना सफल होगी।
(लेखक, उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

