आम लोगों के आशियाने का सपना और भूमाफिया का संजाल
-दीपक कुमार त्यागी
आम लोगों के सस्ते आशियाने की जरूरत को पूरा करने के लिए ताकतवर लोगों और सिस्टम में बैठे भ्रष्टाचारी लोगों व भूमाफियाओं के ताकतवर गठजोड़ की कृपा से अवैध फ्रीहोल्ड कॉलोनियों का जन्म आये दिन होता रहता है। इस गठजोड़ को बखूबी पता होता है कि अवैध फ्रीहोल्ड कॉलोनियां देश व प्रदेशों के नियम-कायदे व कानून को पूरी तरह से ठेंगा दिखाते हुए स्वयं सुनियोजित विकास में सबसे बड़ी बाधक बन रही है, लेकिन भ्रष्ट लोगों की कृपा से देश में पिछले तीन दशकों में लाखों की संख्या में अवैध कॉलोनियां कुकुरमुत्ते की तरह फल-फूल गयी हैं।
पिछले कुछ दशकों से तो आलम यह हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट व एनजीटी आदि के समय-समय पर दिये गये सख्त आदेशों व दिशा-निर्देशों तक की अवहेलना करते हुए मोटी कमाई के लालच में बेहद ताकतवर लोगों का यह पूरा गठजोड़ देश में अवैध फ्रीहोल्ड कॉलोनियों को शहर-दर-शहर फलने-फूलने का पूरा अवसर प्रदान कर रहा है, जो स्थिति देश के सुनियोजित विकास के लिए बेहद चिंताजनक है। रही-सही कसर उस वक्त पूरी हो जाती है जब इन अवैध कॉलोनियों में मकान बनवाने के नाम पर व मकान बनने के बाद तोड़ने से बचाने के नाम पर अवैध उगाही करके भ्रष्टाचारियों के बीच धन की बंदरबांट होती है, बेचारे लुटे-पिटे गरीब पर जीवन भर ही दोहरी मार पड़ती रहती है, हर पल वह अपने सपने का आशियाना व जीवन भर की गाढ़ी कमाई छिनने के भय में जीवन यापन करता रहता है।
देश के सुनियोजित विकास में शहर-दर-शहर अवैध कॉलोनियां बहुत बड़ी बाधक बन गयी है। समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट व एनजीटी तक भी पूरे देश में कुकुरमुत्ते की तरह फैली इन अवैध फ्रीहोल्ड कॉलोनियों पर चिंता जता चुका है। लेकिन फिर भी देश में लाखों की संख्या में अवैध कॉलोनियों का जाल बन चुका है, सरकार व सिस्टम की इन कॉलोनियों पर कार्रवाई के बाद भी स्थिति दिन-प्रतिदिन चिंताजनक होती जा रही है। जिसके चलते अब इन अवैध कॉलोनियों पर न्यायालयों को सख्त रुख अपनाना पड़ रहा है। एनजीटी के सख्त रुख के बाद ही गाजियाबाद में हिंडन नदी के रीवर फ्रंट (नदी के फाट) डूब क्षेत्र में बसी हुई इन अवैध कॉलोनियों पर गाजियाबाद प्रशासन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के मूड में पूरी तरह से नज़र आ रहा है। जिलाधिकारी के सख्त कार्रवाई करने के आदेश के बाद अब डूब क्षेत्र में अपने सपनों का आशियाना बनाने वाले लोगों को अपने घरों की चिंता सताने लगी है। लोगों का तर्क है कि दशकों बाद अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चलवाने के आदेश से मकान मालिकों की जीवन भर की गाढ़ी कमाई धूल में मिल जाने की आशंका है।
वैसे अवैध कॉलोनियों के जाल वाली इस स्थिति के लिए देश के अधिकांश प्रदेशों में जिस तरह वहां के विकास प्राधिकरण की आम लोगों को बिना लाभ-हानि के प्लाट व भवन मुहैया करवाने के अपने मूल उद्देश्य से भटक कर भारी लाभ कमाने के लिए स्वयं ही प्रोपर्टी डीलर बनकर सम्पत्ति को अधिक से अधिक महंगा करके बेचने के लिए डीलिंग की सोच काफी हद तक जिम्मेदार है। इस चिंताजनक स्थिति का लाभ पूरे देश में भूमाफिया जमकर उठा रहे हैं। आलम यह है कि भूमाफियाओं की नज़र शहर, कस्बे व गांवों तक में भी सरकारी जमीन, पट्टे की भूमि, कृषि भूमि, औद्योगिक भूमि, तालाब, चरवाहे, श्मशान, कब्रिस्तान, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे, आर्मी व नदी के फाट (रीवर फ्रंट) आदि तक की भूमि को बेचने पर लगी हुई है, भूमाफिया अपने ताकतवर गठजोड़ के दम पर आम लोगों को अवैध जमीन बेचने में व्यस्त हैं और उनको ऐसा करने देने से रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले सिस्टम में बैठे हुए कुछ लोग उनसे पैसे कमाने में मस्त हैं।
कमाल की बात यह है कि जब तक यह भूमाफिया इन जमीनों की पर अवैध प्लाटिंग करके बंदरबांट करते हुए आम आदमी को ठगने का कार्य जारी रखते हैं, तब तक ना जाने क्यों शासन व पुलिस-प्रशासन की तरफ से इन लोगों को स्थाई रूप से रोकने के लिए ठोस कार्रवाई धरातल पर नहीं होती है जिससे कि इन भूमाफिया पर सख्ती के साथ लगाम लगायी जा सके। आशियाना बनाने के आम लोगों के सपनों का भूमाफिया जमकर के लाभ उठा रहे हैं। अपने आकाओं के आशीर्वाद से भूमाफियाओं के इस पूरे ताकतवर गठजोड़ पर सिस्टम में बैठे हुए ईमानदार लोगों के लाख प्रयासों के बावजूद भूमाफिया द्वारा आम लोगों से की जा रही जीवन भर की गाढ़ी कमाई की ठगी पर लगाम नहीं लग पा रही है।
विचारणीय तथ्य यह है कि जब अवैध फ्रीहोल्ड कॉलोनियां भूमाफियाओं के गठजोड़ के द्वारा विकसित की जाती है, उस वक्त सिस्टम अपनी आंखों पर पट्टी बांध करके आखिर क्यों बैठ जाता है और कॉलोनी बसने के बाद वहां के निवासियों को आये दिन बुलडोजर का भय क्यों दिखाया जाता है। क्यों अक्सर बसने के बाद ही अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त करने की सिस्टम द्वारा कोशिश की जाती है और भूमाफिया व उसके ताकतवर गठजोड़ के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हो पाती है।
अवैध कॉलोनियों का मुद्दा केवल कानून और अतिक्रमण का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की जवाबदेही, भ्रष्टाचार और आम नागरिकों के आवासीय अधिकारों से भी जुड़ा है। यदि किसी भूमि पर अवैध प्लाटिंग हो रही है, तो उसे प्रारंभिक स्तर पर ही रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लिहाजा, उन भूमाफियाओं, भ्रष्ट अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए जिन्होंने नियमों को ताक पर रखकर ऐसी कॉलोनियों को पनपने दिया।
जब तक आम आदमी के लिए वैध और किफायती आवास के पर्याप्त विकल्प उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक भूमाफियाओं का संजाल नए-नए रूपों में पनपता रहेगा। इसलिए जरूरत है कि आवास नीति का केंद्र आम नागरिक की आवश्यकता बने और व्यवस्था ऐसी हो कि किसी परिवार को अपने घर के सपने और कानूनी सुरक्षा के बीच चुनाव करने की मजबूरी न झेलनी पड़े।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

