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वायुमण्डलीय ट्रैफिक जाम की चपेट में यूरोप

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वायुमण्डलीय ट्रैफिक जाम की चपेट में यूरोप


-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

बात अचरज भरी लग सकती है पर सही मायने में देखा जाए तो यूरोप जिस तरह हीटवेव की चपेट में आया है, उसका बड़ा और प्रमुख कारण वायुमण्डलीय ट्रैफिक जाम है। यूरोपीय देश गंभीर हीटवेव की चपेट में हैं। इस तरह की हीटवेव का कारण ओमेगा ब्लॉक की स्थिति होती है। यूरोप के वायुमण्डल में हीट डोम बनने के कारण ऐसा हुआ है।

मौसम विज्ञानियों का मानना है कि सामान्य रुप से हवाएं पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए आगे बढ़ती है। ओमेगा ब्लॉक की स्थिति में हवाएं उत्तर और दक्षिण की ओर मुड़कर ग्रीक शब्द ओमेगा का आकार बना लेती है और इस तरह वायुमण्डल में ट्रैफिक जाम के हालात हो जाते हैं। इससे आसमान साफ हो जाता है, गर्म हवाएं क्षेत्र विशेष में फंस जाती है और सूरज की किरणें सीधे उस इलाके में पड़ने लगती है। यह स्थिति तेज गर्मी और उसके असर के रूप में सामने आती है। इसी वजह से हीटवेव का असर अधिक हो जाता है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि सामान्यतः यह हालात दो-तीन दिन या सप्ताह तक रह सकते हैं पर इस बार यूरोप में यह दौर लंबा चला। इससे इंग्लैण्ड, फ्रांस, इटली, जर्मनी सहित यूरोप के करीब 23 देश प्रभावित हैं।

आस्ट्रेलियाई नेशनल यूनिवर्सिटी और सिडनी यूनिवर्सिटी की नेचर पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वैज्ञानिकों ने छह बड़े हीटवेवों का अध्ययन किया है। जलवायु परिवर्तन, नमी बढ़ने, गगनचुंबी इमारतों में तापमान रोधक सामग्री का उपयोग ना के बराबर होने और सुविधा के नाम पर इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के अत्यधिक उपयोग से वातावरण प्रभावित हो रहा है। सामान्यतः यह माना जाता है कि अधिक गर्मी बच्चों-बुजुर्गो के लिए जानलेवा हो जाती है पर इस बार की हीटवेव अपना रौद्र रुप दिखा रही है। दरअसल, यूरोपवासी इतनी गर्मी के आदी भी नहीं हैं। इसके साथ हीटवेव का असर इतना अधिक है कि शरीर स्वयं अपने आपको तापमान अनुकूल नहीं बना पा रहा है।

यूरोप में हीटवेव के चलते हालात इतने खराब हो गए कि सड़कों की डामर पिघल गई, रेल की पटरियां टेड़ी-मेड़ी हो गई। इससे हालात की गंभीरता को समझा जा सकता है। इसके कारण यातायात तक बाधित हो गया है। हीटवेव के कारण जंगलों में आग के समाचार आम हो रहे हैं तो विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हालात के चलते चेतावनी जारी की है। यूरोपीय देशों में तापमान 40 सेल्सियस से अधिक पहुंच गया और इससे जनजीवन बुरी तक प्रभावित हो गया है। देखा जाए तो यूरोप का मौसम संतुलन बिगड़ गया है।

प्रकृति के साथ अत्यधिक छेड़छाड़ का परिणाम समूचा विश्व भुगत रहा है। तापमान में बढ़ोतरी वैश्विक है पर यूरोप में इस बार हीटवेव के हालात अधिक गंभीर हो गये हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की मानें तो हीटवेव के कारण यूरोप में एक तरह से हेल्थ इमरजेंसी के हालात बन गए और तेज गर्मी के कारण मौसम जनित बीमारियों और हीटवेव की चपेट में आने से बड़ी संख्या में लोगों को जीवन से हाथ धोना पड़ा है। प्रकृति की नाराजगी का असर अब गंभीरता से सामने आ रहा है। जनजीवन जहां अस्त-व्यस्त हो रहा है, वहीं विश्लेषकों की मानें तो यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्था पर आज के हालात में 11 लाख करोड़ का असर पड़ने की आशंका है, वहीं साल 2030 तक यूरोप को 61 लाख करोड़ का नुकसान भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।

सीधी-सी बात है कि यह प्राकृतिक प्रकोप एक दिन की देन नहीं है। हालात को देखते हुए यूरोपीय देशों में एयर कण्डीशनर जैसे उपकरणों की अत्यधिक मांग बढ़ी है। यहां तक कि इंग्लैण्ड में 300 फीसदी से अधिक तो फ्रांस में हजार फीसदी तक मांग बढ़ गई है। इसके साथ तापमान नियंत्रित करने वाले अन्य उपकरण फ्रीज आदि की मांग बढ़ी है। हीटवेव का असर जहां सीधे तौर पर स्वास्थ्य पर पड़ता है वहीं, पूरी इकोनॉमी को तहस-नहस करने या प्रभावित करने में हीटवेव की भूमिका रहती है। स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने के साथ हीटवेव के कारण हालात सबकुछ ठहर जाने जैसे हो जाते हैं।

ऐसा नहीं है कि ओमेगा ब्लॉक पहली बार बन रहे हों बल्कि ओमेगा ब्लॉक पहले भी बनते रहे हैं पर एक ओर जिस तरह धरती का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और जिस तरह ग्लेशियरों की पिघलने की गति तेज हुई और प्रदूषण का स्तर दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है उसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। अब ओमेगा ब्लॉक की अवधि बढ़ती जा रही है। इसका प्रभाव पहले से अधिक गंभीर रहा है। ऐसे में कहीं-ना-कहीं गंभीर प्रयास करने होंगे ताकि इस तरह के हालात ना हो। हमें इस तरह के हालात बनाने होंगे जो प्रकृति अनुकूल हो। अन्यथा पृथ्वी पर जीवन को ही संकट में डालने की दिशा में हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। यह मानव सभ्यता के लिए गंभीर चुनौती से कम नहीं है। वैज्ञानिक तो यहां तक कहने लगे हैं कि भविष्य में दो से तीन डिग्री तापमान में बढ़ोतरी भी गंभीर संकट वाली होगी।

(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश