एआई स्मार्ट स्वदेशी मदरचिप का बड़ा सपना: सेवाएँ देने को तत्पर भारतीय सुपरचिप ॐ
-धर्मेन्द्र तिवारी
दूरदर्शी वही होता है जो दूर तक देखता है, बहुत दूर की सोचता है। जिसे मौजूदा अवसरों में ही दूरगामी परिणामों की भनक लग जाती है। सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते आज भारत में मौन इलेक्ट्रॉनिक जनक्रांति हो रही है, जिसके परिणाम दूरगामी हैं। एआई युग में हो रही इस इलेक्ट्रॉनिक क्रांति को क्या आप महसूस कर पा रहे हैं? इस लेख में हम इलेक्ट्रॉनिक जगत में जनक्रांति के 'दृश्य सत्य' को मिलकर तलाशेंगे।
इसका माध्यम बनेगा एक बड़ा सपना- एआई स्मार्ट स्वदेशी मदरचिप का बड़ा सपना। इस लेख में हम ऐसे कई लोगों से मिलेंगे जो इस बड़े स्वप्न को साकार करने में लगे हैं, ताकि हम भारतीय इलेक्ट्रॉनिक जगत में जल्द ही कुछ क्रांतिकारी सेवाएँ दे सकें। साथ ही हम उन संस्थानों से भी मिलेंगे जो एक एआई स्मार्ट, बहुउद्देशीय, त्वरित गणना की दृष्टि से सटीक और स्वदेशी सुपरचिप- मदरचिप ॐ (AUM) तैयार कर रहे हैं।
हम पत्रकारों ने भी पिछले महीने इस जनक्रांति का अनुभव किया। अपनी आँखों से देखने के बाद मानना पड़ा कि हम भारतीय एआई स्मार्ट स्वदेशी मदर सुपरचिप का बड़ा सपना साकार करने की दिशा में संतोषजनक प्रगति कर रहे हैं। 17 से 19 सितंबर तक राजधानी नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन 2026 प्रदर्शनी में पत्रकारों ने इस इलेक्ट्रॉनिक क्रांति के कई साक्ष्य देखे। हमें यह एहसास भी हुआ कि 'मेड इन इंडिया' चिप्स ने चुपचाप इस बड़ी
जनक्रांति को शक्ति देना शुरू कर दिया है। कम बिजली खपत में अधिक काम करने वाली एआई स्मार्ट स्वदेशी मदर सुपरचिप, समय की माँग है।
एआई युग में एआई स्मार्टफोन उपयोगकर्ता एआई सर्वरों से कठिन सवाल पूछते हैं, वो भी एक साथ कई। एक साथ सबका सटीक व सही जवाब देना इस इलेक्ट्रॉनिक क्रांति का चरम बिंदु होगा। यह बड़ा काम संतोषजनक तरीके से करने के लिए दुनिया के सभी देशों को चाहिए एक एआई स्मार्ट स्वदेशी मदरचिप, जिसे हमने इस प्रदर्शनी में आकार लेते देखा।
हम सभी भारतीयों के आज किए जा रहे सामूहिक महाउद्यम का दूरगामी परिणाम है ॐ नाम की यह एआई स्मार्ट स्वदेशी मदरचिप। सेमीकॉन प्रदर्शनी के C-DAC स्टॉल पर भारत में ही तैयार हो रही इस एआई स्मार्ट मदरचिप की झलक हमने देखी। साथ ही हमने देखा भारतीय एआई सर्वर 'परम रुद्र', जो बड़ी बेसब्री से अपनी मदरचिप का इंतजार कर रहा है। यह मदर सुपरचिप जल्द एक ऐसा महामस्तिष्क होगी जो कि 'परम रुद्र' जैसे स्वदेशी सर्वर्स में लगेगी।
सेवाएँ तो 'परम रुद्र' जैसे सर्वर आज भी देश के लोगों को दे रहे हैं पर वे पूरी तरह से स्वदेशी नहीं हैं। आज इसकी मदरचिप विदेशी है। C-DAC की यह मदरचिप AUM ॐ एक स्वदेशी 96-कोर हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग प्रोसेसर है। वैज्ञानिकों ने हमें बताया कि ॐ वर्तमान में विकास के उन्नत चरण में है। पिछले 11 वर्षों में भारत ने जो बड़ी सुपरकंप्यूटिंग उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उन्हें देखना आँखें खोलने वाला था। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की वरिष्ठ वैज्ञानिक सुश्री सुनीता वर्मा ने हमें बताया कि सरकार की दूरगामी नीतियों और वैज्ञानिकों के सटीक गणना शोध के कारण हम इस बड़े मदर सुपरचिप स्वप्न के साकार होने के बेहद करीब हैं। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और C-DAC इसके लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। ॐ को 5nm प्रोसेस नोड पर फैब्रिकेट किया जा रहा है और इसे Arm Neoverse V2 आर्किटेक्चर का उपयोग करके बनाया गया है।
ॐ बड़े पैमाने पर एआई, मशीन लर्निंग और वैज्ञानिक सिमुलेशन जैसे समानांतर वर्कलोड को बड़ी कुशलता से लक्षित कर सकता है। यह न केवल सूचनात्मक रूप से बुद्धिमान है बल्कि स्वाभाविक रूप से एक समझदार मदरचिप भी है। हम इसे स्वयं विकसित कर रहे हैं ताकि भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक बाजार की सभी वैश्विक सुपरकंप्यूटिंग जरूरतों को, जो तेजी से एआई-स्मार्ट हो रही हैं, आवश्यकता पड़ने पर पूरा किया जा सके। वैश्विक बाजार में हम भारतीय गुणवत्तापूर्ण एआई स्मार्ट सेवाएँ तभी दे पाएँगे, जब हम धैर्य और समझदारी से दुनिया के अनेक स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं को एक साथ सर्व करने की क्षमता रखेंगे।
भावी पीढ़ियाँ आज की पीढ़ी को तभी दूरदर्शी कहेंगी, जब हम सभी भारतीय मिलकर एआई स्मार्ट स्वदेशी मदरचिप तैयार करने के बड़े सपने को साकार कर पाएँगे। यह सपना शोधकर्ता, चिप उद्योग के दिग्गज, युवा मस्तिष्क और नीति-निर्माता सभी मिलकर देख रहे हैं और इसे साकार करने के लिए एकजुट भी हैं।
मैनें प्रदर्शनी में अनेक स्टॉलों का दौरा किया और वहाँ प्रतिनिधियों से बातचीत की, कई गहन प्रश्न पूछे। जिस इलेक्ट्रॉनिक जनक्रांति का चरम भारतीय मदरचिप है, उसकी कहानी सरल है। सरकार नींव रख रही है, राष्ट्र को इस सपने को साकार करना है। नींव दो हैं- छोटी-छोटी कई भारतीय चिप्स और एक एआई स्मार्ट मदरचिप। पहली नींव अच्छी तरह से रखी जा चुकी है, दूसरी नींव पर भी हम अच्छी गति से आगे बढ़ रहे हैं, ताकि हम इलेक्ट्रॉनिक्स की इस एआई-स्मार्ट दुनिया में जल्द ही एक शीर्ष वैश्विक शक्ति बन सकें।
हमारी 'मेड इन इंडिया' भारतीय चिप्स, जो प्रदर्शनी में दिखाई गईं, इस स्वदेशी एआई स्मार्ट सुपरचिप स्वप्न का मजबूत आधार हैं। सौ-दो सौ रुपये से लेकर 1,500 रुपये तक की कीमत वाली कई स्वदेशी चिप्स मैंने प्रदर्शनी में देखीं। ये चिप्स इलेक्ट्रॉनिक सामानों में लगती हैं और हमें छोटे किचन मिक्सर, माइक्रो-ड्रिल व अन्य घरेलू उपकरण बनाने में मदद करती हैं। पारंपरिक मोटर के बिना भी रोटेशन को संभव बनाती हैं ये जादुई चिप्स। इनकी मदद से भारतीय उद्यमी एआई-स्मार्ट उपकरण बना रहे हैं, जैसे ड्राइवर को झपकी आने पर यात्रियों को सतर्क करने में सक्षम इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद। ये अद्भुत चिप्स हमें निगरानी उपकरणों को डिजाइन करने में मदद करती हैं।
हम भारतीय चिप्स को टेप-आउट कर रहे हैं और उन्हें वैश्विक बाजार में निर्यात भी कर रहे हैं। इस प्रकार पहली नींव अच्छी तरह से रखी जा चुकी है।
ये छोटी-छोटी चिप्स ज्यादातर वाणिज्यिक उपयोग की हैं। हम इनके अलावा आधुनिक गणना शोधों पर केंद्रित कुछ एआई स्मार्ट, सटीक और समझदार ॐ जैसी अन्य स्वदेशी चिप्स भी बना रहे हैं। दोनों ही हमारे सुपरचिप स्वप्न को उद्यम बल दे रही हैं। इस स्वप्न को साकार करने के लिए हमें शांत दिमाग से अनेक काम एक साथ करने में माहिर जिस स्वदेशी मदर सुपरचिप की जरूरत है, AUM ॐ उसी दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों का एक अति-प्रभावी रोडमैप है। बाजार में मौजूद सुपरचिप्स से अधिक समझदार और बुद्धिमान एआई सर्वर चिप्स हमें भारत में ही बनानी होंगी। एआई सुपरचिप्स न केवल कई चुनौतियों को एक साथ सेंस करती हैं बल्कि एआई आधारित इलेक्ट्रॉनिक्स लगाकर विभिन्न प्रणालियों में अक्षमताओं को अपनी 'पिछली समझ' से ठीक भी करती हैं। ये चिप्स इसीलिए स्मार्ट हैं।
आजकल जीवन के हर क्षेत्र में ऐसी एआई स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लग रहे हैं। भारत के उद्यमी इन्हें सस्ती कीमत पर वैश्विक बाजार में निर्यात भी कर रहे हैं।
रोजमर्रा के जीवन में सहूलियत देने में ये चिप्स और मदरचिप्स काफी कारगर हैं। चाहे स्वास्थ्य क्षेत्र की कोई प्रणाली हो या शैक्षिक उपकरण, मनोरंजन की दुनिया हो या जीवन में सुख-सुविधाएँ बढ़ाते इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, सभी में छोटी-बड़ी चिप्स ही सर्किट का दिमाग बनकर मनुष्य जीवन को आसान कर रही हैं। समय आ गया है कि भारतीय उद्योग दूसरी नींव के बड़े सपने को भी साकार करे और भारत को सटीक, सही व अति त्वरित गणना करने में माहिर एआई स्मार्ट मदरचिप्स का वैश्विक कारखाना बनाए, ताकि एआई युग में हम कई लोगों की मनोरंजन की भूख भी एक साथ मिटा सकने की क्षमता स्वदेशी चिप्स से देश में ही विकसित कर सकें।
दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले मोबाइल ऐप्स के ग्राहकों की सेवा करने में भी हम भारतीय सक्षम हों। हमारे सिद्ध सॉफ्टवेयर कौशल और हाल की चिप डिजाइनिंग व फैब्रिकेशन पहलों को देखते हुए यह इतना मुश्किल नहीं है।
विशाल बाजार को देखते हुए हम भारतीय मूक उपभोक्ता बने नहीं रह सकते। हमें भारत में एआई स्मार्ट सुपरचिप सर्वर बनाने होंगे और वैश्विक मांग को पूरा करना होगा। 1987 में अमेरिका ने हमें नवीनतम सुपरकंप्यूटिंग तकनीक देने से इनकार कर दिया था। हाल ही में बढ़ती मांग के दौरान हमने चिप की कमी की मार झेली। चिप आपूर्ति श्रृंखला पर वर्तमान में चीन सहित कुछ देशों का वर्चस्व है। रणनीतिक रूप से हमें सटीक और समझदार सुपरचिप्स की आवश्यकता है। वे राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। हमें संप्रभु बनने की जरूरत है। सूचना के युग में हमारे पास समझदार एआई वाली बुद्धिमान मदरचिप होनी चाहिए। इसलिए जब से चीन ने लैपटॉप, पीसी और मोबाइल में इस्तेमाल होने वाली वाणिज्यिक चिप्स की आपूर्ति कड़ी की, तब से भारत में C-DAC द्वारा स्वदेशी AI स्मार्ट सुपरचिप्स बनाई जा रही है।
भारत में ही एआई स्मार्ट सुपरचिप सर्वर और अनेक वाणिज्यिक उपयोग की जरूरी चिप्स बनाने के लिए सेमीकंडक्टर उद्योग में आवश्यक कच्चे माल पर हमारा पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए। इस बात का ध्यान उद्योग, युवा मस्तिष्क और सरकारी नीतियों द्वारा समर्थित नए जमाने के उद्यमियों द्वारा रखा जा रहा है। सरकार चिप्स के लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत कर रही है। हाफनियम जैसी ट्रांजिशन धातुएं जो चिप बनाने में लगती हैं, उन्हें हम शुद्ध कर भारतीय कंपनियों को मुहैया भी करा रहे हैं। हाफनियम के ऑक्साइड और कार्बाइड का उपयोग चिप्स में किया जाता है। भारत में हाफनियम का पर्याप्त भंडार है, जो हमें इस धातु से बनने वाली महत्वपूर्ण मेमोरी चिप्स की सुनिश्चितता आश्वस्त करती है। चिप उद्योग में हाफनियम जैसे कच्चे माल पर हमें आत्मनिर्भर बनाता है।
अगला स्टॉल C-MET, यानी सेंटर फॉर मैटेरियल्स फॉर इलेक्ट्रॉनिक टेक्नोलॉजी का था। महानिदेशक डॉ. आर. रतीश ने वहीं मुझे हाफनियम का एक छोटा टुकड़ा दिया और बताया कि यह चिप्स की दुनिया में उतना ही कीमती है जितना हमारी स्थूल दुनिया में सोना, चांदी और प्लैटिनम। बहुत कम मात्रा के लिए इसकी कीमत 5 लाख रुपये से अधिक है। अगर हम हमारे पास पहले से मौजूद हाफनियम की नैनोस्कोपिक शुद्धता पर ध्यान दें, तो यह हमें चिप सामग्री आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करने में स्पष्ट बढ़त देगा। हमने केमिकल और मेटलर्जी से जुड़ी एक भारतीय कंपनी को भी हाफनियम में गहरी रुचि लेते देखा। मुझे C-MET स्टॉल पर फोटोरेसिस्ट तकनीक के बारे में पता चला। फोटोरेसिस्ट चिप आपूर्ति श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह एक प्रकाश-संवेदनशील कार्बनिक सामग्री या रेजिन है जिसका उपयोग सर्किट पैटर्न को सब्सट्रेट, सिलिकॉन वेफर पर स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार चिप्स की फोटोलिथोग्राफी और माइक्रोफैब्रिकेशन के दौरान फोटोरेसिस्ट महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
तो इस प्रकार जहाँ हम चिप आपूर्ति चेन को मजबूत कर रहे हैं, वहीं छोटी-छोटी भारतीय वाणिज्यिक व एआई स्मार्ट मदरचिप भी बना रहे हैं, ताकि भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनियाँ जब अपने स्वदेशी एआई मॉडल्स बनाएँ तो हमारे पास खुद का बुनियादी ढांचा हो। हमारी पारम्परिक विद्याएँ व आधुनिक शोध संस्थानों का ज्ञान एआई सर्वर्स के इसी बुनियादी ढांचे के माध्यम से हम भारतीय लोगों तक पहुँचा सकें, वो भी बिल्कुल सस्ते में। हमारे इसी स्वप्न के साकार होने के लिए AUM ॐ को भारतीय एआई सर्वर की मदरचिप बनना है। ॐ क्लाउड रेंटल के माध्यम से उपलब्ध प्रोप्राइटरी हाइपरस्केलर चिप्स के विपरीत है। लॉन्च होने पर AUM हम भारतीयों के लिए भौतिक संप्रभु बुनियादी ढांचे के लिए सुलभ हार्डवेयर होगा।
हम AUM ॐ को एक वाइज सुपरचिप मान सकते हैं जो सेवा अनुरोधों को तेजी और समझदारी दोनों से संसाधित करती है। एक बार AUM का टेप-आउट हो जाने के बाद भारत आम जनता के लिए ड्रीम रियलाइजेशन प्लान को लागू करने की स्थिति में होगा।
यदि हम भारतीय चाहें तो रील देखने वाले देश से दुनिया के बाजार के लिए भी रील बनाने का उद्यम कर सकते हैं। इस प्रकार हम प्रतिस्पर्धी कीमत पर दुनिया के लिए रचनात्मक सामग्री बना सकते हैं।
यह न केवल नौकरियाँ पैदा करेगा, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं के अलावा भारत को एक क्रिएटर इकोनॉमी भी बनाएगा। सुपरचिप स्वप्न के साकार होने के साथ हम इलेक्ट्रॉनिक क्रांति की लहर पर सवार होकर एआई गुरु राष्ट्र बनने की आशा कर सकते हैं।
प्राचीन काल से ही भारत के पास कहानी कहने की महारत रही है। आज भी यह हमारे साहित्य और भाषाई वैविध्य में है। इसे देखते हुए किफायती एआई सुपरचिप्स हमें सोशल मीडिया कंटेंट बाजार में बढ़त देंगी। यह डबल जैकपॉट होगा। इसीलिए आइए अपनी सुपरचिप्स को स्वदेशी एआई के साथ किफायती कीमत पर और अधिक समझदार बनाएँ ताकि हम एक एआई स्मार्ट देश बनें और दुनिया के इलेक्ट्रॉनिक बाजार में शीर्ष खिलाड़ी बनकर छा जाएँ।
(लेखक, पीआईबी अधिकारी हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

