सत्येन्द्र जैन के जेल जाने के खतरे
मनोज कुमार मिश्र
आम आदमी पार्टी (आआपा) के बड़े नेता और उसकी दिल्ली की सरकार में मंत्री रहे सत्येन्द्र जैन की दिल्ली जल बोर्ड के भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तारी ने पार्टी पर आने वाले भारी संकट के संकेत दे दिए हैं। धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मई 2022 में सत्येन्द्र जैन को गिरफ्तार किया था। उसके नौ महीने बाद उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। वे दो साल से ज्यादा जेल में रहे। उनकी गिरफ्तारी के बाद ही दिल्ली के चर्चित शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी का सिलसिला शुरु हुआ। पहले 26 फरवरी 2023 को उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी हुई। फिर सांसद संजय सिंह 4 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार हुए और आखिरकार 21 मार्च 2024 को पार्टी के सर्वेसर्वा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हुए। उन्हें लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए उच्चतम न्यायालय ने 10 मई 2024 को एक जून तक के लिए जमानत दी। जमानत के बाद ने दो जून 2024 को वापस तिहाड़ जेल गए। 26 जून को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया, वे जेल में ही रहे। 13 दिसंबर 2024 को वे जमानत मिलने पर बाहर आ पाए। फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने सभी 23 आरोपितों को बरी कर दिया। उसके खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं। यानी केजरीवाल और उनके लोगों पर से तलवार पूरी तरह से हटी नहीं है। दिल्ली से सत्ता जाने के बाद आम आदमी पार्टी केवल पंजाब में काबिज है, जहां अगले साल विधानसभा चुनाव हैं।
पुराने मामलों का कैग (सीएजी) से जैसे-जैसे भ्रष्टाचार के मामले सार्वजनिक हो रहे हैं, आआपा सरकार पर सरकारी जांच एजेंसियों का शिकंजा कसना तय सा माना जा रहा है। माना जा रहा है जल बोर्ड ही नहीं, मुख्यमंत्री के सरकारी निवास (आम बोलचाल में शीश महल) समेत, स्कूलों के निर्माण और मरम्मत से लेकर अनेक निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले पहले से ही सार्वजनिक हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में आम आदमी पार्टी पर खतरा बेहिसाब बढ़ा है। इसी के चलते सत्येन्द्र जैन की गिरफ्तारी पर केजरीवाल बौखलाकर भाजपा की अगुवाई वाली केन्द्र सरकार पर आरोप लगा रहे हैं। दिल्ली जल बोर्ड की अवजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) परियोजना की निविदा प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार होने के आरोप में दिल्ली की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा(एसीबी) ने 10 मई 2024 को सत्येन्द्र जैन, जल बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) उदित प्रकाश राय आदि के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। उन्हें पांच अगस्त को पूछताछ के लिए बुलाया। 18 अगस्त को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाकर उनके साथ पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, नगेन्द्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा को गिरफ्तार कर 19 अगस्त को विशेष न्यायाधीश विनय सिंह की अदालत में पेश किया। न्यायाधीश ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
इस गिरफ्तारी से आम आदमी पार्टी पर संकट बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। संयोग से आम आदमी पार्टी ने सत्येन्द्र जैन को पंजाब का उप प्रभारी भी बनाया है। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस गिरफ्तारी के लिए भाजपा पर पहले की तरह जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं का आरोप है कि पंजाब विधानसभा में आम आदमी पार्टी की बढ़त से परेशान भाजपा एसीबी अधिकारियों पर दबाव डालकर गिरफ्तारी करवाई गई, जबकि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा का आरोप है कि आम आदमी पार्टी शासन में दिल्ली जल बोर्ड लूट का केन्द्र बना दिया गया था। सरकारी ऑडिट (सीएजी) की जांच में आम आदमी पार्टी के दस साल के शासन में साठ हजार करोड़ का घोटाला सामने आया है। माना जा रहा है कि यह भी शराब घोटाले जैसा आम आदमी पार्टी के लिए भारी संकट खड़ा करने वाला साबित होगा।
वर्ष 2022 में शराब घोटाले की जांच शुरु होने के बाद ईडी ने बड़ी तादात में गिरफ्तारी की, लेकिन 26 फरवरी 2023 को मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी से आम आदमी पार्टी को भारी झटका लगा। उनको 17 महीने बाद जमानत मिली। दूसरे आर्थिक मामले में केजरीवाल के दूसरे मंत्री रहे सतेन्द्र जैन मई 2022 से जेल में थे। वे दो साल से जेल में रहे। इसी तरह संजय सिंह को शराब घोटाले में ही 4 अक्टूबर 2023 को गिरफ्तार किया गया। उन्हें छह महीने बाद विभिन्न पाबंदियों के साथ जमानत मिली। अरविंद केजरीवाल को ईडी ने बातचीत के लिए अनेक सम्मन भेजे। ईडी में पेश न होने के लिए अदालत भी गए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। आखिरकार ईडी ने उन्हें 21 मार्च 2024 को गिरफ्तार किया। अपनी गिरफ्तारी को उन्होंने उच्चतम न्यायालय तक में चुनौती दी। उच्चतम न्यायालय ने पहली बार किसी नेता को केवल चुनाव प्रचार के लिए तीन हफ्ते की जमानत दे दी। वे जमानत पर 10 मई को बाहर आए और दो जून को वापस जेल गए। 26 जून को सीबीआई ने उन पर दूसरा मामला दायर कर दिया। वे करीब पांच महीने जेल में रहने के बाद भारी प्रयास के बाद 13 सितंबर 2024 को उन्हें उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर बाहर आए। अभी फरवरी 2026 में ट्रायल कोर्ट ने सबूत के अभाव में शराब घोटाले के सभी 23 आरोपितों को बरी कर दिया। उनके खिलाफ सीबीआई ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। याचिका विचाराधीन है।
आम आदमी पार्टी और उसके सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल सत्ता के लिए बने हैं इसे इस राजनीतिक पार्टी के 14 साल के इतिहास ने साबित किया है। समाजसेवी अण्णा हजारे की अगुवाई में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के सहारे राजनीति में आने वाले केजरीवाल ने वह सभी काम किए जो इस देश के आम राजनेता करते रहे हैं या इसके लिए राजनेता बदनाम हैं। कई मामलों में तो केजरीवाल ने परंपरागत दलों के नेताओं को भी पीछे छोड़ दिया है। सत्ता में आने के लिए उन्होंने जो वायदे किए थे, सत्ता में आने के बाद सारे आचरण उसके उलट किए। दिल्ली की सत्ता से बाहर होने के बाद भी उनका व्यवहार नहीं बदला। उन पर शराब घोटाला से लेकर अपने सरकारी आवास को करोड़ों खर्च करके शीश महल बनवाने आदि के अनेक आरोप लगे। बावजूद इसके पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मिले सरकारी आवास में उनपर फिर से लाखों रुपये लगाने का आरोप लगा।
सत्ता ने उन्हें आम आदमी से खास आदमी बना दिया। सुरक्षा के भारी ताम-झाम से उनकी लोगों से दूरी बढ़ी और जिस वीआईपी कल्चर का विरोध करके राजनीति में आए उसी कल्चर के प्रतीक बन गए। शराब घोटाले में कई बड़े नेताओं के जेल जाने के बाद खुद केजरीवाल जेल गए। वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव और 2015 के विधानसभा चुनाव में केजरीवाल ने अपने को प्रताड़ित करने का मुद्दा बनाने की असफल कोशिश की। 70 सदस्यों वाली विधानसभा चुनाव में भाजपा 48 सीटों के साथ 27 साल बाद सत्ता में लौटी। आम आदमी पार्टी को 22 सीटें मिली। मतों का अंतर केवल दो फीसदी का था। पहली बार आम आदमी पार्टी 2022 के दिल्ली नगर निगम चुनाव जीती थी। उसे 250 में से 134 सीटें मिली थी। भाजपा को 104 सीटें मिली थी। केन्द्र में भाजपा की सरकार होने का लाभ उसे मिलता रहा। बहुमत के बावजूद महीनों कवायत के बाद आम आदमी पार्टी का मेयर बना। इन ढाई सालों में आम आदमी पार्टी के पार्षद भाजपा में आते रहे। इतना ही नहीं आम आदमी पार्टी में जाकर पार्षद बने 16 निगम पार्षद अलग दल बनाकर आम आदमी पार्टी से अलग हो गए। वे सभी भाजपा में शामिल हो गए। निगम में दलबदल विरोधी कानून नहीं लागू है। अब निगम में भी भाजपा बहुमत में है।
आम आदमी पार्टी पूरी तरह से अरविंद केजरीवाल की पार्टी है। वह न तो किसी विचारधारा से जुड़ी है, न जाति आधारित या कैडर आधारित पार्टी है। दिल्ली में सरकार जाने के बाद पार्टी के साथ मुट्ठी भर लोग दिखते हैं। अब केवल पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है। पंजाब सरकार के खिलाफ भी पार्टी में आवाज उठने लगी है। आम आदमी पार्टी के विधायक जेल गए। मंत्री संजीव अरोड़ा पर केन्द्रीय एजेंसियों का छापा पड़ा है। जो हालात दिख रहे हैं उसमें तो यही लग रहा है कि शराब घोटाले की आंच अभी इस पार्टी को और झुलसाएगी। कई और मामले सामने आने वाले हैं। इसकी शुरुआत 19 अगस्त को सत्येन्द्र जैन के जेल जाने से हो गई है। जो नेता जमानत पर जेल से बाहर हैं, वे वापस कब जेल चले जाएं कहा नहीं जा सकता है। दो फीसदी मतों के अंतर से सरकार बनाने वाली भाजपा दिल्ली में अपनी राजनीतिक हैसियत बढ़ाने में लगी है।
राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा देश के करीब ज्यादातर राज्यों में सत्ता में आ गई है। नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केन्द्र की सरकार लगातार रिकार्ड बना रही है। इस सरकार की धमक ऐसी है कि एक के बाद एक करके विपक्ष के बड़े-बड़े दिग्गज पराजित होते जा रहे हैं। कभी विपक्ष की राजनीति के प्रभावशाली नेता रहे कई नाम अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का हिस्सा बन चुके हैं। कई बड़े नेता बढ़ते उम्र या बिगड़ते समीकरण के चलते अप्रासंगिक हो चुके हैं। वामपंथी दल इतिहास बनते जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की अपनी सीमा है। ममता बनर्जी और एम के स्टालिन अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव में खुद अपना चुनाव हार कर अपने राज्य की सत्ता से बाहर हो चुके हैं। समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और मायावती जैसे नेता अभी सत्ता से बाहर हैं और अगले साल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इनके सत्ता में आने की उम्मीद नहीं है। कई और नेताओं के भी यही हाल हैं। अरविंद केजरीवाल भी खुद अपने विधानसभा क्षेत्र से पराजित होकर खुद वे और उनकी पार्टी दिल्ली की सत्ता से बाहर हैं। आम आदमी पार्टी उनकी पार्टी है इसलिए वे पंजाब के अघोषित मुख्यमंत्री माने जाते हैं। पंजाब चुनाव नतीजे आम आदमी पार्टी के पक्ष में न आने पर न केवल आम आदमी पार्टी के बिखरने के साथ-साथ बल्कि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक पारी का समापन भी होने का खतरा है।
(लेखक, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह

