किसी के लिए भी आसान नहीं केरल की राह
योगेश कुमार सोनी
1957 में राज्य गठन के बाद से केरल राज्य में मुख्य रूप से वामपंथी और कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारें रही है जो अलग-अगल समय पर सत्ता में आती रही हैं, कभी-किसी का कालखंड ज्यादा समय के लिए वर्चस्व में नही रहा। लेकिन 2016 व 2021 से लगातार दो बार पिनाराई विजयन मुख्यमंत्री बन रहे हैं। अब सवाल यही उठता है कि क्या कांग्रेस पिनाराई विजयन के किले को भेद पाएगी? विजयन की स्थिति को इस बार भी मजबूत इसलिए माना जा रहा है चूंकि वह दशक भर से राज्य में अपने सार्थक शासन को संचालित करने में महारत हासिल कर चुके हैं। यदि कांग्रेस की बात करें तो बीते लोकसभा चुनाव में केरल के वायनाड से राहुल गांधी ने रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की थी जिससे वहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत देखकर सब आश्चर्यचकित रह गए थे। हालांकि केरल जैसे राज्य में कांग्रेस ने हार व जीत के साथ अपनी स्थिति को मजबूत बनाए रखा है लेकिन क्या अब इन दोनों पक्षों के समीकरणों के साथ केरल के किले को भेदने में कितना सार्थक हो पाती है?
मौजूदा मुख्यमंत्री अपने बीते दशक भर में किए गए कामों को कामों को मजबूती से गिनवा रहे हैं। जैसे कि लोगों की बढ़ाई हुई पेंशन, राज्य में बेहतर हुई स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और 'नवा केरलम' विजन सबसे खास हैं। इसके अलावा राज्य में सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए काम, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर करने की दिशा में बढ़ाए गए कदम और राज्म में आए निवेश को लाने का जिक्र भी किया गया है। इन मुद्दों के साथ में सत्तारूढ़ गठबंधन तीसरी बार केरल की सत्ता में वापसी करने पर मेहनत कर रहा है। लेकिन इसके विपरीत कांग्रेस ने सीपीआई-एम के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार पर पक्षपात और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है जिसके अहम रमुद्दे हैं यूडीएफ भ्रष्टाचार, वायनाड में भूस्खलन में अनियमितता, इनके अनुसार राज्य पहले की अपेक्षा अपराध बहुत बडे स्तर पर अपराध बढ़ा है, नौकरियों में लगातार कमी आ रही है जिससे युवा बेरोजगार हैं जिससे युवाओं को राज्य का छोड़ना लगातार जारी है, गुपचुप तरीके से अवैध रुप से नियुक्तियां जैसे मुद्दे हैं। यह सभी पार्टियों के लिए बड़ा मुद्दा है, लेकिन यूडीएफ इसे एलडीएफ सरकार की नाकामी बताकर उठा रही है।
इसके अलावा बीजेपी समर्थक थर्ड फ्रंड एक ऐसा मुद्दा उठा रही है जो पार्टियों को छोटा लग रहा था लेकिन वह अचानक बड़ा बन गया और वह है जानवरों से खेती की बर्बादी। बताया जा रहा है और वहां चित्रों से भी प्रतीत होता है कि वॉयनाड जिले का वडक्कनाड में किसानों ने घर छोड़ दिए। गांव में अधिकतर घर टूटी-फूटी हालात में खाली पडें हैं चूंकि वहां के रहने वाले किसानों का कहना है कि जब फसल कटने का समय आता है तो हाथी व अन्य जंगली जानवर सब बर्बाद कर देते हैं। यह कहानी वर्षों से चल रही है जो लेकर कई बार राज्य सरकार को अवगत कराया जा चुका है लेकिन उस पर किसी भी प्रकार की मदद नही मिली जिससे वहां के लोगों बहुत आक्रोश है।
इसके अलावा भी कई ऐसे छोटे-छोटे मुद्दे हैं जो अब बड़े बनते जा रहे हैं। राज्य की वृद्ध आबादी 16.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है जो देश में सबसे अधिक है और वरिष्ठ नागरिक एक प्रभावशाली मतदाता वर्ग बन गए हैं जिसकी नकारात्मकता यह है कि केरल से युवाओं का पलायन लगातार जारी है। यदि लड़कियों की बात करें केरल से देश से सबसे ज्यादा नर्सें बनती हैं और देश व दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में चली जाती हैं वही लडकों की बात करें तो यहां नौकरी व उतना रोजगार नही है जिसकी वजह से वो भी यहां से पलायन कर जाते हैं।
कुल मिलाकर राज्य ने अपने अंदर ऐसा कुछ नही समाया हुआ जिससे वहां की जनता को वहां रुकने का मौका मिले। बहरहाल, अब देखना यह होगा कि कौन सी पार्टी किन मुद्दों को जनता को समझाने या मनाने के लिए सार्थक सिध्द होती है चूंकि कई बार बडे मुद्दों से ज्यादा छोटे मुद्दे कारगर साबित हो जाते हैं। लेकिन अब देखना यह है कि पिनाराई विजयन अपना किला बचा पाते हैं या कांग्रेस पुन अपने आप को स्थापित करती है।
(लेखक, स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)
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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव पाश

