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जम्मू-कश्मीर में उद्योगों को बढ़ावा देने पर संसद की स्थायी समिति का मंथन

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जम्मू-कश्मीर में उद्योगों को बढ़ावा देने पर संसद की स्थायी समिति का मंथन


जम्मू, 22 मई (हि.स.)। सांसद और उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष, तिरुचि शिवा के नेतृत्व में सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने श्रीनगर के रैडिसन ब्लू होटल में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न औद्योगिक संघों के साथ एक संवाद बैठक की। बैठक के दौरान समिति अध्यक्ष तिरुचि शिवा ने जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक विकास, एमएसएमई सेक्टर की चुनौतियों और नीति संबंधी मुद्दों पर विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा की। इस संवाद में लघु उद्योग भारती के प्रतिनिधियों ने भी भाग लेते हुए एमएसएमई और उद्योगों से जुड़े प्रमुख मुद्दों तथा आवश्यक नीतिगत सुधारों को लेकर विस्तृत ज्ञापन सौंपा।

लघु उद्योग भारती का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य परवीन परगल, महासचिव आगम जैन तथा सदस्य फहाद भट ने किया।

प्रतिनिधिमंडल ने समिति को अवगत कराया कि जम्मू-कश्मीर में सतत औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और वास्तविक एमएसएमई निवेशकों के संरक्षण के लिए तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है। बैठक में न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत पंजीकरण प्रक्रिया अचानक बंद किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

प्रतिनिधियों ने कहा कि इस निर्णय से सैकड़ों वास्तविक एमएसएमई निवेशक असमंजस की स्थिति में हैं जबकि उन्होंने पहले ही भारी निवेश किया है।

इसके अलावा औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, औद्योगिक ढांचे के विकास, प्रोत्साहन योजनाओं में पारदर्शिता तथा सरकारी खरीद में एमएसएमई को मिलने वाली प्राथमिकता को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग भी उठाई गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

बैठक में भुगतान में देरी, जटिल टेंडर प्रक्रिया, डिजिटल अंतराल और सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता की कमी जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। साथ ही सीजीटीएमएसई योजना में सुधार कर बिना गारंटी ऋण सुविधा को आसान और पारदर्शी बनाने की मांग की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने जम्मू-कश्मीर में रेल कोच निर्माण फैक्ट्री स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा ताकि स्थानीय विनिर्माण और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त औद्योगिक ईंधन की ऊंची कीमतों, एलपीजी दरों में पड़ोसी राज्यों की तुलना में असमानता तथा पीएनजी ढांचे के विकास की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान बायो-सीएनजी, बायोगैस, बायोमास और वेस्ट-टू-एनर्जी जैसे वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने के सुझाव भी दिए गए ताकि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता कम हो और “आत्मनिर्भर भारत” के लक्ष्य को मजबूती मिल सके।

तिरुचि शिवा ने सभी संगठनों की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि बैठक में उठाए गए मुद्दों और सुझावों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा। बैठक का समापन जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने, कारोबार सुगमता बढ़ाने और समावेशी औद्योगिक विकास सुनिश्चित करने की सामूहिक अपील के साथ हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा