पीओजेके विस्थापितों को भूमि अधिकार देने में अनावश्यक शर्तें हटाई जाएं
जम्मू, 29 अक्टूबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) के मुख्य प्रवक्ता एवं पूर्व एमएलसी रविंदर शर्मा ने 1947 में पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) से विस्थापित परिवारों को आवंटित भूमि पर अधिकार देने की प्रक्रिया में अनावश्यक शर्तें लगाए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने सरकार से मांग की कि लंबे समय से आवंटित भूमि पर काबिज परिवारों को नए अधिकार देने के लिए दोबारा पुराने दस्तावेज जमा करने की बाध्यता समाप्त की जाए।
रविंदर शर्मा ने कहा कि कैबिनेट आदेश संख्या 578-सी (1954) के तहत विस्थापित परिवारों को आवंटित निकासी भूमि पर काबिज लोगों को कृषि सुधार अधिनियम, 1976 की धारा 3- ए के तहत अधिकार दिए गए थे। इसके बावजूद अब उनसे वर्ष 1947 के फॉर्म-ए, भूमि आवंटन रिकॉर्ड और रजिस्टर रद्द किए जाने से संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये परिवार 1950 के दशक से भूमि पर खेती कर रहे हैं और तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुके हैं। लंबे समय के कारण कई पुराने दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं या नष्ट हो चुके हैं ऐसे में उन्हें दोबारा रिकॉर्ड जुटाने के लिए बाध्य करना परेशानी बढ़ाता है।
उन्होंने सरकार से आवंटित भूमि पर काबिज पात्र परिवारों को अतिरिक्त दस्तावेजों की शर्त के बिना नए भूमि अधिकार देने का आग्रह किया। साथ ही राजस्व मंत्री से विस्थापित समुदाय के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक बुलाकर लंबित समस्याओं का समाधान करने की मांग की।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

