वेद ज्ञान से ही संभव है सच्चा जीवन मार्ग-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 08 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 27वें दिन स्वामी राम स्वरूप, योगाचार्य ने ऋग्वेद मन्त्र 1/22/3 का भावार्थ समझाते हुए कहा कि बिना ज्ञान के किसी को भी ज्ञान की प्राप्ति संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि ज्ञान प्राप्ति के लिए एक ज्ञानी गुरु और एक जिज्ञासु शिष्य दोनों का होना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि सृष्टि के आरंभ में जब कोई गुरु या विद्वान नहीं था तब परमेश्वर ने अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ऋषियों के हृदय में वेदों का ज्ञान प्रकट किया। योग शास्त्र के अनुसार परमेश्वर ही प्रथम गुरु हैं जो निराकार होते हुए भी अपनी दिव्य शक्ति से ज्ञान प्रदान करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि ब्रह्मा ने इन ऋषियों से वेद ज्ञान प्राप्त कर गुरु-शिष्य परंपरा की शुरुआत की जो आज तक चली आ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनुष्य को आज भी विद्वानों से वेद ज्ञान प्राप्त कर उसका आचरण करना चाहिए तभी जीवन में सुख और शांति संभव है। उन्होंने वर्तमान समय की समस्याओं जैसे युद्ध, हिंसा, चोरी, नारी अपमान और प्राकृतिक आपदाओं का कारण वैदिक गुरु-शिष्य परंपरा से दूर होना बताया। उन्होंने आह्वान किया कि मानव समाज को पुनः इस परंपरा को अपनाकर वेद मार्ग पर चलना होगा, अन्यथा भविष्य में दुखों का सामना और बढ़ेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

