नाटक ‘चेता’ : वृद्धावस्था की पीड़ा और सामाजिक संवेदनहीनता को प्रभावशाली ढंग से किया प्रस्तुत
जम्मू, 10 मई (हि.स.)। जम्मू के नटरंग द्वारा आयोजित साप्ताहिक संडे थिएटर श्रृंखला के अंतर्गत नटरंग स्टूडियो थिएटर में रविवार को डोगरी नाटक ‘चेता’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। यह नाटक प्रसिद्ध साहित्यकार जोगिंदर छत्रपाल की इसी नाम की चर्चित डोगरी कहानी पर आधारित था जिसे डिंपल शर्मा ने रूपांतरित किया और निर्देशन पवन वर्मा ने किया।
उल्लेखनीय है कि इस कृति के लिए जोगिंदर छत्रपाल को वर्ष 2016 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
‘चेता’ एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक प्रस्तुति है जो वृद्धावस्था में मानसिक और भावनात्मक संघर्षों को मार्मिक ढंग से सामने लाती है। नाटक में बुजुर्गों के प्रति समाज और परिवार की संवेदनहीनता, उपेक्षा और उनकी मानसिक पीड़ा को गहराई से दर्शाया गया। नाटक की कहानी एक सेवानिवृत्त वृद्ध अध्यापक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने मित्र की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए दूरस्थ गांव जाने का निर्णय करता है। भूलने की बीमारी से जूझ रहे इस बुजुर्ग का परिवार उसकी कमजोरी का मजाक उड़ाता है लेकिन वह अकेले ही साड़ी और राजमा का साधारण उपहार लेकर यात्रा पर निकल प5ड़ता है। बस अड्डे पर अपने मित्र अबरोल का इंतजार करते हुए वह अपने अतीत और अपमानजनक अनुभवों को याद करता है। गंतव्य का नाम और मित्र का फोन नंबर तक याद न रहने की स्थिति उसकी बेबसी को और गहरा कर देती है।
नाटक ने दर्शकों को वृद्धावस्था, डिमेंशिया और पारिवारिक संवेदनशीलता जैसे विषयों पर गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया। कलाकारों के सशक्त अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक में नीरज कांत, पवन वर्मा, महिक्षित सिंह, मिहिर गुर्जाल, आदेश धर, आकाश वधावन, अर्नव धोतरा और गौतम रत्तन ने अभिनय किया। संगीत और प्रकाश व्यवस्था का संचालन आकाश वधावन ने किया, जबकि प्रस्तुतिकरण मिहिर गुर्जाल द्वारा किया गया।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

