ईओडब्ल्यू कश्मीर ने नौकरी और ज़मीन से जुड़े दो बड़े धोखाधड़ी मामलों में आरोपियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की
श्रीनगर, 4 अक्टूबर(हि.स.)। जम्मू-कश्मीर क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (ईओडब्ल्यू) कश्मीर ने श्रीनगर के चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की कोर्ट में अब्दुल मजीद मीर पिता अब्दुल रहीम मीर निवासी कलारूस लिश्टियाल कुपवाड़ा के खिलाफ दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं।
ईओडब्ल्यू द्वारा जारी एक बयान के अनुसार
इन मामलों में धोखाधड़ी गलत पहचान बताना जाली दस्तावेज बनाना और नौकरी चाहने वालों से धोखे से पैसे वसूलने के आरोप हैं। जांच के अनुसार आरोपी ने सरकारी नौकरी और जमीन देने का झूठा वादा करके लोगों को निशाना बनाया और अपने दावों को सही साबित करने के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 318(4), 336(3), 340(2) और 238 के तहत दर्ज प्राथमिकी नंबर 13/2026 में जांच के दौरान यह आरोप सामने आया कि आरोपी ने नौकरी दिलाने के बहाने एक शिकायतकर्ता से 2.10 लाख लिए थे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि इस धोखाधड़ी वाले दावे को सही साबित करने के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी किया गया एक नकली अपॉइंटमेंट लेटर (नियुक्ति पत्र) दिया गया था। एक अलग मामले में आएपीसी की धाराओं 419, 420, 467, 468, 471 और 201 के तहत दर्ज प्राथमिकी नंबर 10/2025 में आरोपी पर जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल से जुड़े ड्यूटी ऑफिसर के तौर पर गलत पहचान बताने का आरोप है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि उसने इस झूठी पहचान का इस्तेमाल सरकारी नौकरी और एसडीए कॉलोनी, बेमिना में जमीन देने का वादा करने के लिए किया और लोगों से लगभग 60 लाख वसूले।
इस धोखाधड़ी के तहत पीड़ितों को नकली अपॉइंटमेंट लेटर और जमीन आवंटन के दस्तावेज दिए गए थे।
ईओडब्ल्यू ने बताया कि दोनों चार्जशीट अब कानून के मुताबिक न्यायिक फैसले के लिए सक्षम अदालत में पेश कर दी गई हैं। जांच में यह भी पता चला है कि अब्दुल मजीद मीर पर कश्मीर घाटी में दर्ज 15 अलग-अलग आपराधिक मामलों में शामिल होने का आरोप है जो उस पर लगे आरोपों की गंभीरता को दिखाता है।
इस बीच ईओडब्ल्यू कश्मीर ने लोगों से अपील की है कि वे पैसे के बदले सरकारी नौकरी, ज़मीन आवंटन या अन्य सरकारी लाभ देने का वादा करने वाले लोगों के साथ लेन-देन करते समय सावधानी बरतें।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

