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उपमुख्यमंत्री ने भाजपा पर हीरानगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए एक प्रदर्शनकारी भेजने का लगया आरोप

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श्रीनगर, 10 जुलाई (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने शुक्रवार को भाजपा पर हीरानगर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यक्रम को बाधित करने के लिए एक प्रदर्शनकारी भेजने का आरोप लगाया। उन्होंने सुरक्षा चूक के लिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की और लोगों से पार्टी के राज्य का दर्जा बहाल करने के अभियान में शामिल होने की अपील की।

जम्मू में पत्रकारों को संबोधित करते हुए चौधरी ने कहा कि हीरानगर में हुई एक घटना को छोड़कर सांबा और कठुआ जिलों में नेशनल कॉन्फ्रेंस का दौरा सफल रहा। हीरानगर में उनके आरोप के अनुसार, एक भाजपा कार्यकर्ता ने हंगामा किया। उन्होंने दावा किया कि उस व्यक्ति की सोशल मीडिया प्रोफाइल से उसकी राजनीतिक संबद्धता का पता चलता है और कहा कि अगर वह भाजपा से जुड़ा नहीं है तो पार्टी को खुद उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करानी चाहिए।

इस व्यवधान को अलोकतांत्रिक बताते हुए चौधरी ने कहा कि राजनीतिक दलों को प्रतिद्वंद्वी कार्यक्रमों को बाधित करने के लिए कार्यकर्ताओं को नहीं भेजना चाहिए। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी ने अपने निजी सुरक्षा अधिकारियों द्वारा रोके जाने से पहले मंच पर चढ़ने का प्रयास किया था और स्थानीय एसएचओ और डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हुए पिछले हमले का जिक्र करते हुए चौधरी ने कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए सुरक्षा एजेंसियों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ राजनीतिक नेताओं को ही नहीं बल्कि हर नागरिक पर्याप्त सुरक्षा का हकदार है।

प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवाद पर चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा छात्रों को उनकी चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह मुद्दा प्रभावी रूप से सुलझ गया है। उन्होंने हीरानगर विरोध प्रदर्शन को विश्वविद्यालय से जोड़ने के सुझावों को खारिज कर दिया और सरकार द्वारा जम्मू के साथ भेदभाव करने के आरोपों को भी नकारते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा इस क्षेत्र के हितों के लिए संघर्ष किया है। चौधरी ने लोगों से 12 जुलाई को जम्मू के हरि सिंह पार्क में नेशनल कॉन्फ्रेंस की राज्य स्थापना रैली में शामिल होने का आग्रह किया और संसद के मानसून सत्र के दौरान 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विधानसभा चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था लेकिन यह वादा पूरा नहीं हुआ।

इस बात पर जोर देते हुए कि यह अभियान जम्मू और कश्मीर दोनों में चलाया जा रहा है चौधरी ने कहा कि राज्य का दर्जा पूरे केंद्र शासित प्रदेश की मांग है और बेहतर शासन, विकास और रोजगार के लिए आवश्यक है।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता