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मुख्य सचिव ने जीवंत ग्राम कार्यक्रम पर पहली यूटीएलएससी की अध्यक्षता की

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श्रीनगर, 14 जुलाई (हि.स.)। मुख्य सचिव अटल दुल्लू ने आज योजना विकास एवं निगरानी विभाग द्वारा आयोजित जीवंत ग्राम कार्यक्रम के तहत केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय स्क्रीनिंग समिति की पहली बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य जम्मू और कश्मीर के चिन्हित सीमावर्ती गांवों के लिए विकास रोडमैप की समीक्षा और उसे अंतिम रूप देना था।

बैठक में संबंधित प्रशासनिक सचिवों, विभागों के प्रमुखों और संबंधित जिलों के उपायुक्तों ने भाग लिया।

जिलावार प्रस्तावों की व्यापक समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने केंद्र शासित प्रदेश के आठ जिलों में फैले चिन्हित सीमावर्ती गांवों में कार्यक्रम के तहत परिकल्पित परियोजनाओं का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी विकासात्मक पहलों को मिशन मोड में लागू किया जाना चाहिए जिससे संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके और विभिन्न विभागों द्वारा समन्वित क्रियान्वयन हो सके ताकि इन दूरस्थ सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में ठोस सुधार लाया जा सके।

उन्होंने कहा कि जीवंत ग्राम कार्यक्रम एकीकृत योजना और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन के माध्यम से इन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण गांवों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदलने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है। उन्होंने सभी विभागों और जिला प्रशासनों से निर्बाध समन्वय सुनिश्चित करने का आह्वान किया ताकि विभिन्न केंद्रीय और केंद्र शासित प्रदेश योजनाओं का लाभ लक्षित आबादी तक प्रभावी और समयबद्ध तरीके से पहुंच सके।

बैठक के एजेंडा का परिचय देते हुए योजना विकास एवं निगरानी विभाग की आयुक्त सचिव, आर. एलिस वाज़ ने जीवंत ग्राम कार्यक्रम की दृष्टि और उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में चयनित सीमावर्ती गांवों में लक्षित हस्तक्षेपों की परिकल्पना की गई है जिनका उद्देश्य पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने कौशल विकास, उद्यमिता, सहकारी विकास, कृषि और बागवानी के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना है साथ ही औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों की खेती को प्रोत्साहित करना है।

उन्होंने आगे बताया कि कार्यक्रम में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने को प्राथमिकता दी गई है जिसके तहत वंचित बस्तियों तक सड़क संपर्क में सुधार, गुणवत्तापूर्ण आवास और ग्राम बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराना, नवीकरणीय ऊर्जा सहित ऊर्जा तक पहुंच बढ़ाना और टेलीविजन एवं दूरसंचार संपर्क सुनिश्चित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सभी उपायों का मुख्य उद्देश्य पर्याप्त आर्थिक अवसर पैदा करना और जीवन स्तर में सुधार लाना है जिससे लोगों को इन सीमावर्ती गांवों में रहना जारी रखने के लिए प्रोत्साहन मिले।

पीडी एंड एमडी में वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम के नोडल अधिकारी ओवैस अहमद ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए समिति को सूचित किया कि जिला प्रशासनों ने कार्यक्रम के विषयगत फोकस क्षेत्रों के अनुरूप विकास परियोजनाओं का एक व्यापक पोर्टफोलियो तैयार किया है।

उन्होंने बताया कि प्रस्तावित उपायों में बारामूला में 83 परियोजनाएं, बांदीपोरा में 57, जम्मू में 526, कठुआ में 117, पुंछ में 195, राजौरी में 92 और सांबा जिले में 121 परियोजनाएं शामिल हैं जो बुनियादी ढांचे के निर्माण, आजीविका सृजन और सार्वजनिक सेवा वितरण के व्यापक दायरे को कवर करती हैं।

बैठक में आगे बताया गया कि पीएमजीएसवाई-चार के तहत कार्यक्रम से अछूते 24 गांवों तक सड़क संपर्क का विस्तार प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त 8,513 परिवारों को ग्रिड से बिजली कनेक्शन प्रदान किए जाएंगे जबकि 16,702 परिवारों को सेट-टॉप बॉक्स उपलब्ध कराकर डायरेक्ट-टू-होम टेलीविजन कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा जिससे इन दूरस्थ क्षेत्रों में सूचना, शिक्षा और मनोरंजन तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार होगा।

बैठक प्रस्तावित परियोजनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श के साथ समाप्त हुई जिसमें मुख्य सचिव ने सभी संबंधित विभागों और जिला प्रशासनों को निर्देश दिया कि वे सटीक योजना, अंतर-विभागीय समन्वय और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करें ताकि जीवंत ग्राम कार्यक्रम के उद्देश्यों को अक्षरशः प्राप्त किया जा सके और सीमावर्ती गांवों को आर्थिक रूप से जीवंत, सामाजिक रूप से सशक्त और मुख्यधारा से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सके।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता