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एसएमवीडीयू के शोधार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया औषधीय पौधों पर शोध

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एसएमवीडीयू के शोधार्थियों ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किया औषधीय पौधों पर शोध


जम्मू, 08 मार्च (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की टीम ने हाल ही में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर में आयोजित “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन रिसेंट एडवांसेज इन प्लांट एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज” में सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। इस सम्मेलन का आयोजन बॉटनिकल एंड एनवायरनमेंटल साइंसेज विभाग द्वारा रूसा 2.0 के सहयोग से किया गया, जिसमें भारत सहित कई देशों के शिक्षाविद, वैज्ञानिक और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हुए।

सम्मेलन के दौरान एसएमवीडीयू की बायोटेक्नोलॉजी लैब की टीम ने क्षेत्र के चयनित देशी औषधीय पौधों पर किए जा रहे अपने शोध कार्य को प्रस्तुत किया। शोध में पौध ऊतक संवर्धन, संरक्षण तकनीकों, फाइटोकेमिकल अध्ययन तथा स्मरण शक्ति बढ़ाने वाले संभावित गुणों पर प्राप्त परिणाम साझा किए गए। यह कार्य जम्मू-कश्मीर सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा समर्थित “ट्रांसडिसिप्लिनरी रिसर्च एंड इनोवेशन हब” परियोजना के अंतर्गत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जम्मू संभाग के उच्च शिक्षण संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

टीम का शोध मुख्य रूप से ऐसे औषधीय पौधों पर केंद्रित है जिनमें एंटी-डायबिटिक और हेपाटोप्रोटेक्टिव गुण पाए जाते हैं। नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में इन पौधों के मेटाबोलाइट्स की मात्रा बढ़ाने तथा उनके चिकित्सीय उपयोग की संभावनाओं को समझने पर भी अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित पौध नमूनों के आणविक अध्ययन के माध्यम से उनकी विविधता और औषधीय क्षमता का विश्लेषण किया जा रहा है।

सम्मेलन में प्रो. शारदा एम. पोटुकुची के मार्गदर्शन में कार्य कर रहे शोधार्थी अभिषेक बोकेडिया और नंदिता शर्मा ने मौखिक प्रस्तुति दी, जबकि पीजी विद्यार्थियों पलवीन कौर, मधु शर्मा, विशाली और विकास ताक ने पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से अपने शोध निष्कर्ष साझा किए। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रगति कुमार तथा विज्ञान संकाय के डीन और स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के नेतृत्व द्वारा दिए गए प्रोत्साहन को टीम ने अपनी उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया। सम्मेलन में भागीदारी से शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिला, जिससे उनके चल रहे प्रयोगों में नई तकनीकों और विचारों को अपनाने की दिशा में प्रेरणा मिली।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा