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सत शर्मा ने ‘प्रशिक्षण महाअभियान’ को राष्ट्र-केंद्रित राजनीति की रीढ़ बताया

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जम्मू, 24 फ़रवरी (हि.स.)। भाजपा ने जम्मू संसद क्षेत्र, नौशेरा, पुंछ और राजौरी के लिए महाअभियान के तहत शिक्षकों का प्रशिक्षण आयोजित किया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जम्मू और कश्मीर ने राष्ट्रव्यापी पंडित दीन दयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान के तहत जम्मू के त्रिकुटा नगर स्थित अपने मुख्यालय में प्रशिक्षकों के लिए एक गहन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला में जम्मू संसदीय क्षेत्र के साथ-साथ नौशेरा और पुंछ-राजौरी क्षेत्र शामिल थे। इसमें जिला प्रभारी, जिला अध्यक्ष, जिला सह-प्रभारी, नामित प्रशिक्षक और स्थानीय स्तर पर अभियान को लागू करने के लिए गठित चार सदस्यीय जिला दल ने भाग लिया।

सत्र को जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद सत शर्मा, विपक्ष के नेता सुनील शर्मा और भाजपा महासचिव (संगठन) अशोक कौल के साथ-साथ संजीता डोगरा, बलदेव सिंह बिल्लवारिया और गोपाल महाजन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने संबोधित किया।

सत शर्मा ने अपने संबोधन में प्रशिक्षण को एक जीवंत और प्रतिबद्ध राजनीतिक संगठन की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा की ताकत केवल चुनावी जीत में नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक नींव और समर्पित कार्यकर्ताओं में निहित है। उन्होंने कहा कि भाजपा का अस्तित्व केवल सरकार बनाने के लिए नहीं है, बल्कि अटूट प्रतिबद्धता के साथ समाज और राष्ट्र की सेवा करने के लिए है। “व्यक्ति निर्माण से संगठन निर्माण, और संगठन निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के मूल सिद्धांत पर जोर देते हुए शर्मा ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता का चरित्र निर्माण एक मजबूत संगठन का निर्माण करता है, जो अंततः राष्ट्र निर्माण में योगदान देता है। उन्होंने प्रशिक्षकों से कार्यकर्ताओं में वैचारिक दृढ़ विश्वास, अनुशासन और सेवाभाव विकसित करने का आग्रह किया ताकि वे जमीनी स्तर पर सुशासन और राष्ट्रवाद के दूत बन सकें।

सुनील शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा कार्यकर्ता को स्वयं एक संस्था के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अनुशासन, वैचारिक स्पष्टता और निरंतर जनभागीदारी भाजपा कार्यकर्ताओं को अन्य कार्यकर्ताओं से अलग करती है। उन्होंने कहा कि नियमित प्रशिक्षण बौद्धिक गहराई, संचार कौशल और संगठनात्मक दक्षता को बढ़ाता है, जिससे कार्यकर्ता गलत सूचनाओं का प्रभावी ढंग से मुकाबला कर पाते हैं और पार्टी के दृष्टिकोण को जनता के सामने आत्मविश्वास से प्रस्तुत कर पाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पार्टी की विश्वसनीयता उसके कार्यकर्ताओं के आचरण और समर्पण पर टिकी है। अशोक कौल ने संगठनात्मक सिद्धांतों, पंच परिवर्तन और 'राष्ट्र प्रथम' विचारधारा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विचारधारा का प्रसार बूथ संरचना में अंतिम कार्यकर्ता तक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब विचारधारा जमीनी स्तर तक पहुंचती है तो जनता का विश्वास स्वाभाविक रूप से मजबूत होता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता