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रियासी जिले के पंथल में सरकारी स्कूलों के कामकाज की समीक्षा

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पंथल,12 अगस्त,(हि.स.)। विद्यालय शिक्षा निदेशक जम्मू डॉ. नसीम जावेद चौधरी व संयुक्त निदेशक विद्यालय शिक्षा उधमपुर-रियासी डॉ. जगदीश चंद्र ने रियासी जिले के सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय पंथल और पीएम श्री सरकारी मध्य विद्यालय पंथल का व्यापक निरीक्षण किया।

छात्रों से बातचीत के दौरान निदेशक ने उनकी पढ़ने और लिखने की क्षमताओं का आकलन किया और उनसे निर्धारित पाठ्यक्रम से परे विषयों पर चर्चा की। उन्होंने छात्रों को कक्षा चर्चाओं और सहपाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें याद दिलाया कि शिक्षा का पूर्ण अर्थ तभी प्राप्त होता है जब ज्ञान के साथ अभिव्यक्ति, जिज्ञासा और भाग लेने का साहस हो।

निदेशक ने विद्यालय परिसर की सामान्य देखरेख और स्वच्छता का निरीक्षण करने के अलावा कर्मचारियों और छात्रों दोनों के ऑनलाइन और ऑफलाइन उपस्थिति अभिलेखों की विस्तृत समीक्षा भी की।

समय-समय पर जारी विभागीय परिपत्रों और निर्देशों के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई साथ ही यूडीआईएसई डेटा अद्यतन की स्थिति का भी जायजा लिया गया जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता और संस्थागत जवाबदेही दोनों पर विभाग के निरंतर जोर को रेखांकित किया गया।

संवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा विद्यालय शिक्षा विभाग की मेंटरशिप पहल को समर्पित था एक ऐसा प्रयास जो शिक्षा के आंकड़ों के बीच अक्सर भुला दिए जाने वाले एक सत्य को पहचानता है। प्रत्येक बच्चे को न केवल निर्देश की आवश्यकता होती है बल्कि ऐसे व्यक्ति की भी आवश्यकता होती है जो सुन सके, मार्गदर्शन कर सके प्रोत्साहित कर सके और अनिश्चितता को संभावना में बदलने में मदद कर सके।

डॉ. चौधरी ने इस पहल के संबंध में छात्रों से बातचीत की और उनके आत्मविश्वास, संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास और समग्र विकास को मजबूत करने में मेंटरशिप की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ऐसे छात्र तैयार करना नहीं है जो प्रश्नों के उत्तर दे सकें बल्कि ऐसे युवा व्यक्तियों का निर्माण करना है जो सार्थक प्रश्न पूछने में सक्षम हों, अपनी क्षमता को समझ सकें और भविष्य की अनिश्चितताओं का दृढ़ता से सामना कर सकें।

संस्थान प्रमुखों और कर्मचारियों को विद्यालयों के शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को और मजबूत करने के लिए मौके पर ही निर्देश जारी किए गए। स्वच्छ, जीवंत और स्वागतयोग्य विद्यालयी वातावरण बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि विभागीय पहल केवल कागज़ पर लिखे निर्देशों के रूप में ही नहीं बल्कि जीवंत प्रथाओं के रूप में कक्षा तक पहुंचे जिससे विद्यार्थियों के जीवन में स्पष्ट बदलाव आए।

डॉ. चौधरी ने शिक्षकों से समर्पण, नवाचार और अटूट प्रतिबद्धता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आग्रह किया और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, सतत मूल्यांकन और प्रत्येक शिक्षार्थी के सर्वांगीण विकास के महत्व पर बल दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता