वेद मन्त्रों से ही करें परमेश्वर की शुद्ध उपासना-स्वामी राम स्वरूप जी
कठुआ, 10 मई (हि.स.)। वेद मन्दिर योल में आयोजित 78 दिवसीय चारों वेदों के यज्ञानुष्ठान के 29वें दिन स्वामी राम स्वरूप योगाचार्य ने श्रद्धालुओं को वेदों के मूल स्वरूप और उनकी महत्ता से अवगत कराया। इस अवसर पर उन्होंने ऋग्वेद मन्त्र 8/95/7 का उल्लेख करते हुए कहा कि सभी उपासकों को एकजुट होकर शुद्ध परमेश्वर की स्तुति शुद्ध वेद मन्त्रों और सामगान के माध्यम से करनी चाहिए।
स्वामी जी ने मन्त्र “शुद्धम् इन्द्रम् शुद्धेन स्तवाम” का भाव समझाते हुए बताया कि परमेश्वर सदा से शुद्ध और निराकार है, जिसे किसी प्रकार की बाहरी शुद्धि या आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए उसकी उपासना भी शुद्ध वेद मन्त्रों के माध्यम से ही की जानी चाहिए।
उन्होंने आगे सामवेद के मन्त्र 382, 376 और 257 का संदर्भ देते हुए कहा कि इन सभी में स्पष्ट निर्देश है कि ईश्वर की उपासना केवल वेद मन्त्रों से ही करनी चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान समय में लोग वेद ज्ञान से दूर होकर मनुष्य द्वारा रचित श्लोकों और ग्रंथों के माध्यम से उपासना कर रहे हैं जो मूल वेद मार्ग से भटकाव है।
स्वामी राम स्वरूप ने कहा कि सृष्टि के आरंभ में जब मनुष्य का अस्तित्व नहीं था, तब ईश्वर ने स्वयं चारों वेदों का प्रकट कर उपासना का सही मार्ग बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने विचारों के आधार पर विभिन्न मत और ग्रंथ बना सकता है लेकिन परमेश्वर द्वारा दिए गए वेद ज्ञान में किसी प्रकार का भेदभाव या मतभेद नहीं होता।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं से उन्होंने वेदों का अध्ययन करने और शुद्ध वेद मार्ग अपनाने का आह्वान किया ताकि समाज में एकता, शुद्धता और सच्ची उपासना का भाव स्थापित हो सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया

