home page

जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन तेज

 | 

जम्मू, 31 अगस्त (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर में इंटर्न डॉक्टरों का विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है। प्रदेश के जिला जम्मू के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बक्शी नगर में यह विरोध-प्रदर्शन गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, जम्मू के ओपीडी के सामने हुआ। यह एमबीबीएस इंटर्न जिन्हें बीडीएस इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन का समर्थन प्राप्त है द्वारा पूरे जम्मू-कश्मीर में किए जा रहे आंदोलन का हिस्सा है। यह केवल जीएमसी जम्मू तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में काम कर रहे इंटर्न डॉक्टरों की सामूहिक मांग है।

प्रदर्शनकारी एमबीबीएस इंटर्न को मिलने वाले मासिक स्टाइपेंड (भत्ते) में लंबे समय से लंबित बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। रहने-सहने, आवास, भोजन, परिवहन और अन्य जरूरी खर्चों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद, 12,300 प्रति माह का मौजूदा स्टाइपेंड 2019 (लगभग सात साल) से नहीं बदला गया है। उनका कहना है कि एक जैसी क्लिनिकल ड्यूटी, काम के लंबे घंटे (जिसमें नाइट ड्यूटी, इमरजेंसी, वार्ड, ओपीडी और आईसीयू शामिल हैं) और एक जैसी एमबीबीएस डिग्री होने के बावजूद कई अन्य राज्यों में इंटर्न को काफी ज़्यादा वेतन/भत्ता मिलता है। कुछ राज्यों में स्टाइपेंड लगभग 43,000–44,000 प्रति माह तक है जो जम्मू-कश्मीर में मिलने वाले स्टाइपेंड से लगभग 350% ज़्यादा है जम्मू-कश्मीर में मिलने वाला स्टाइपेंड देश में सबसे कम स्टाइपेंड में से एक है।

उनका कहना है कि सरकार द्वारा बनाई गई एक समिति ने पहले इसमें काफी बढ़ोतरी की सिफारिश की थी हालांकि यह मामला अभी भी लंबित है। लंबे समय से कोई कार्रवाई न होने और अधिकारियों द्वारा हमारी बात न सुनने के कारण, हमारे पास अपनी रोजमर्रा की ड्यूटी से हटने और तब तक यह शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है जब तक कि स्टाइपेंड बढ़ाने का औपचारिक आदेश जारी नहीं हो जाता।

हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि हम मरीजों को दी जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बाधा नहीं डालना चाहते। सरकारी अस्पतालों में क्लिनिकल देखभाल में इंटर्न एक अहम भूमिका निभाते हैं। हमें यह सामूहिक कदम उठाने के लिए इसलिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि पिछले कई वर्षों में बार-बार अपनी बात रखने, ज्ञापन सौंपने और अपील करने के बावजूद कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। हमारी मांग है कि अनिवार्य एक साल की इंटर्नशिप के दौरान हम जो जरूरी सेवाएं देते हैं उसके लिए हमें उचित मुआवजा, सम्मान और पहचान मिले।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता