पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा की मदद की, उर्दू का मुद्दा उठाकर ध्यान भटकाया: मुख्यमंत्री उमर
जम्मू, 01 मई (हि.स.)। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) पर राज्यसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की मदद करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि पीडीपी अब भाजपा की मदद करने में अपनी भूमिका से जनता का ध्यान भटकाने के लिए उर्दू का मुद्दा उठा रही है।
पत्रकारों से बात करते हुए उमर ने आरोप लगाया कि पीडीपी ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन किया इसीलिए वे उर्दू, उर्दू कह रहे हैं। एक हाथ से कुछ दिखा रहे हैं और दूसरे हाथ से कुछ और कर रहे हैं। उन्होंने राज्यसभा में भाजपा की मदद की, वे नहीं चाहते कि लोग इस पर ध्यान दें। वे उर्दू की बात कर रहे हैं। मैं पहले ही स्पष्ट कर चुका हूं कि उर्दू को लेकर उनके दावों में कोई सच्चाई नहीं है। वे इससे पीछे नहीं हटेंगे। वे अंदरूनी तौर पर उनकी मदद कर रहे हैं।
उमर ने आरटीआई आवेदन के माध्यम से राज्यसभा चुनावों से संबंधित हालिया खुलासों के बारे में कहा कि पिछले अनुभव बताते हैं कि एग्जिट पोल अक्सर वास्तविक परिणामों को प्रतिबिंबित करने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि जब पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए थे तो अधिकांश एग्जिट पोल भाजपा के पक्ष में थे, परिणाम क्या हुआ अब हमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, सोमवार तक परिणाम आ जाएंगे और ये एग्जिट पोल एक बार फिर गलत साबित हो जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि कम से कम एक पोलस्टर ने अपने निष्कर्ष जारी नहीं किए क्योंकि अनुमान उनके मन मुताबिक नहीं थे।
उर्दू भाषा को लेकर विवाद पर मुख्यमंत्री ने इसे हटाने के किसी भी निर्णय से इनकार करते हुए कहा कि सरकार ने केवल एक प्रस्ताव पर जनता की प्रतिक्रिया आमंत्रित की थी। उन्होंने कहा कि जनता की राय लेना और अंतिम निर्णय लेना दोनों में स्पष्ट अंतर है। बदलावों का प्रस्ताव अभी भी मेरे पास है और मैंने इसे मंज़ूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा कि झूठ फैलाने वालों को मैं चुनौती देता हूँ कि वे ऐसा कोई आदेश दिखाएँ जिसमें उर्दू शब्द हटाया गया हो। उमर ने कहा कि वे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के ज़रिए चुनाव पूर्व धांधली में विश्वास नहीं करते लेकिन उन्होंने मतदाता सूचियों में संशोधन के ज़रिए कथित हेरफेर की चेतावनी दी।उन्होंने कहा कि आज चिंता ईवीएम की नहीं है। असली मुद्दा मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम हटाना है। अगर ऐसा होता है तो यह लोकतंत्र के लिए एक गंभीर चुनौती होगी।
बढ़ती कीमतों पर उमर ने कहा कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि का असर पहले से ही रोज़मर्रा की ज़िंदगी और परिवहन किरायों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो बाकी सब कुछ भी बढ़ जाता है। लोग पहले से ही अनौपचारिक रूप से ज़्यादा किराया दे रहे थे; अब संशोधन अपरिहार्य हो गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि चल रहे संघर्ष बढ़ती कीमतों के पीछे एक प्रमुख कारण हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

