पनुन कश्मीर ने मुख्य सचिव के समक्ष उठाए विस्थापित कश्मीरी पंडितों के मुद्दे
जम्मू, 08 मई (हि.स.)। पनुन कश्मीर के एक प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर सरकार के मुख्य सचिव से मुलाकात कर विस्थापित कश्मीरी पंडित समुदाय से जुड़े विभिन्न लंबित मुद्दों, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के क्रियान्वयन, प्रवासी शिविरों की खराब होती आधारभूत सुविधाओं तथा प्रशासनिक समस्याओं को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले विस्थापित कश्मीरी पंडितों पर लागू वर्तमान एनएफएसए व्यवस्था को वापस लेने की मांग दोहराई। संगठन का कहना था कि समुदाय को सामान्य कल्याणकारी योजनाओं के दायरे में नहीं रखा जा सकता, क्योंकि यह समुदाय पिछले तीन दशकों से विस्थापन, हिंसा और निर्वासन की असाधारण परिस्थितियों से गुजर रहा है।
प्रतिनिधिमंडल में भुषण लाल भट्ट, एम.के. धर, बेबूजी जुत्शी, हरि कृष्ण कौल और बिटूजी भट्ट शामिल थे। उन्होंने मुख्य सचिव को बताया कि एनएफएसए लागू होने के बाद आधिकारिक रिकॉर्ड में आयु, लिंग, परिवार संरचना, श्रेणी और निवास संबंधी कई त्रुटियां सामने आई हैं, जिसके कारण कई पात्र परिवार लाभ से वंचित हो रहे हैं। प्रतिनिधियों ने राशन डिपो टैगिंग में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि जम्मू और आसपास के प्रवासी शिविरों में रहने वाले कई परिवारों को दूर-दराज जिलों के राशन डिपो से जोड़ा गया है, जिससे आवश्यक राशन प्राप्त करना मुश्किल हो गया है।
मुख्य सचिव ने इन मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए राहत आयुक्त को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही सभी पंजीकृत राहतधारी परिवारों को प्राथमिकता परिवार श्रेणी में शामिल करने के निर्देश भी जारी किए गए। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को एकीकृत डेटा समन्वय और रिकॉर्ड सत्यापन के लिए निर्धारित स्थानों पर तैनात करने का निर्णय भी लिया गया, ताकि मौके पर ही त्रुटियों को ठीक किया जा सके और शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित हो सके। प्रतिनिधिमंडल ने प्रवासी शिविरों में प्री-मानसून मरम्मत, खराब पड़े बोरवेलों की बहाली, जल आपूर्ति, आंतरिक सड़कों की मरम्मत तथा कंडोली रोड के मैकडमाइजेशन की मांग भी उठाई। इसके अलावा शिविरों में स्थित पार्क, खेल मैदान और स्टेडियमों की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए इनके सुधार की मांग की गई।
बैठक में पीएम पैकेज इंजीनियरों की लंबित पदोन्नति का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति न मिलने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा

