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रात के अंधेरे में ओवरलोड ट्रकों का तांडव, आरटीओ/डीटीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल- जम्मू पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कानून बेबस, हादसों को न्योता

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रात के अंधेरे में ओवरलोड ट्रकों का तांडव, आरटीओ/डीटीआई की कार्यप्रणाली पर सवाल- जम्मू पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर कानून बेबस, हादसों को न्योता


कठुआ, 18 जनवरी (हि.स.)। जम्मू कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर से लेकर कालीबाड़ी तक जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के अंधेरे में ओवरलोड वाहनों का खुलेआम तांडव देखने को मिल रहा है। तस्वीरें इस बात की गवाही दे रहे हैं कि किस तरह भूसे से लदे तीन से चार बड़े ट्रक तेज रफ्तार में नियमों को रौंदते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पर दौड़ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो इन वाहनों ने पूरे राजमार्ग का टैक्स चुका दिया हो और बाकी वाहन चालक यहां मेहमान बनकर चल रहे हों।

हैरानी की बात यह है कि यातायात नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी निभाने वाले आरटीओ और डीटीआई विभाग, जो आए दिन यातायात सुरक्षा अभियान और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए नसीहतें देते नजर आते हैं, जमीनी हकीकत में कहीं दिखाई नहीं देते। कठुआ आरटीओ और डीटीआई द्वारा आयोजित किए जाने वाले ये कार्यक्रम क्या महज अखबारों की सुर्खियां बटोरने तक सीमित हैं, यह सवाल अब आम लोगों की जुबान पर है। हमारे संवाददाता द्वारा रात के समय बनाई गई वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि हटली मोड़ से लेकर लखनपुर तक भूसे से भरे ओवरलोड ट्रक तेज गति से गुजर रहे हैं। न तो वजन की सीमा का ध्यान रखा जा रहा है और न ही रफ्तार पर कोई नियंत्रण है। ऐसे में छोटे वाहन चालकों और आम यात्रियों की जान हर पल खतरे में बनी हुई है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन ओवरलोड वाहनों की वजह से कोई बड़ा हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या तब भी विभागीय अधिकारी केवल औपचारिक बयान देकर अपने कर्तव्यों से पल्ला झाड़ लेंगे? स्थानीय लोगों और यात्रियों की मांग है कि रात के समय राष्ट्रीय राजमार्ग पर सख्त चेकिंग अभियान चलाया जाए, ओवरलोड वाहनों पर कठोर कार्रवाई हो और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। जब तक कानून का डर नहीं होगा, तब तक ऐसे बेलगाम ट्रकों का तांडव यूं ही जारी रहेगा और राष्ट्रीय राजमार्ग हादसों का हाईवे बना रहेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन खजूरिया