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सीयूजे में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ : मीडिया की भूमिका पर मंथन

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सीयूजे में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ : मीडिया की भूमिका पर मंथन


जम्मू, 18 मार्च (हि.स.)। जम्मू केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं नवीन मीडिया विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय केंद्र के सहयोग से दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने में मीडिया की भूमिका” का शुभारंभ हुआ। यह संगोष्ठी आर्यभट्ट भवन स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में हाइब्रिड मोड में आयोजित की जा रही है, जिसमें देशभर से शोधार्थियों, मीडियाकर्मियों और शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद राष्ट्रगीत और सरस्वती वंदना की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि पद्मश्री मोहन सिंह सलाथिया, मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार हरबंस नागोके, कुलसचिव प्रो. यशवंत सिन्हा, प्रो. भरत भूषण और विभागाध्यक्ष डॉ. अभय एस.डी. राजपूत सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में कुलपति प्रो. संजीव जैन के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि मीडिया आज भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रसार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। नई शिक्षा नीति 2020 के बाद इस क्षेत्र का महत्व और बढ़ गया है, जिसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्य अतिथि मोहन सिंह सलाथिया ने मातृभाषा, विशेषकर डोगरी भाषा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का वास्तविक संवहन मातृभाषा के माध्यम से ही संभव है। वहीं मुख्य वक्ता हरबंस नागोके ने अपने अनुभव साझा करते हुए पत्रकारिता में समर्पण और निरंतरता को सफलता की कुंजी बताया।

संगोष्ठी के संयोजक प्रो. परमवीर सिंह ने भारतीय ज्ञान प्रणाली की सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में भूमिका को रेखांकित किया। पहले दिन का समापन सह-संयोजक डॉ. उमेश सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस संगोष्ठी में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, शोधार्थियों और छात्रों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का दूसरा दिन 19 मार्च को तकनीकी सत्रों और समापन समारोह के साथ संपन्न होगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा