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राष्ट्रीय हित राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से ऊपर होना चाहिए:सुनील सेठी

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जम्मू, 12 अक्टूबर (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील सेठी ने आईएनडीआई गठबंधन के राजनीतिक रवैये पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने सवाल किया है कि क्या गठबंधन की टकराव वाली राजनीति, राष्ट्रीय हित, आंतरिक स्थिरता और संस्थागत जिम्मेदारी जैसे बड़े मुद्दों पर पक्षपातपूर्ण विचारों को हावी होने दे रही है। सेठी ने कहा कि लोकतंत्र निस्संदेह हर राजनीतिक दल को सरकार का विरोध करने, उसकी नीतियों पर सवाल उठाने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का अधिकार देता है। हालांकि उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध को उन कार्यों से अलग देखा जाना चाहिए जो लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकते हैं या अनावश्यक अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संवैधानिक संस्थाओं और भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा से जुड़े राजनीतिक विवाद तेजी से तीखे पक्षपातपूर्ण टकराव का विषय बनते जा रहे हैं। सेठी ने कहा कि भारत के खिलाफ काम करने वाली विरोधी ताकतों ने ऐतिहासिक रूप से आंतरिक मतभेदों, राजनीतिक असहमति और सामाजिक तनाव का फायदा उठाने की कोशिश की है। ऐसे में उन्होंने तर्क दिया कि सभी राजनीतिक दलों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे यह सुनिश्चित करें कि देश को कमजोर करने की चाहत रखने वाले तत्व वैध लोकतांत्रिक मतभेदों का फायदा न उठा सकें।

उन्होंने आईएनडीआई गठबंधन के नेतृत्व से राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और राजनीतिक टकराव के दौरान संस्थागत स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर अपना रुख स्पष्ट करने का आह्वान किया। सेठी ने कहा कि सरकार का विरोध करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है लेकिन देश की रक्षा करना हर राजनीतिक दल की साझा जिम्मेदारी है। राजनीतिक मतभेदों के कारण भारत की सुरक्षा, संप्रभुता या संवैधानिक संस्थाओं से कभी भी समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि घरेलू राजनीतिक नेताओं और भारत विरोधी ताकतों के बीच मिलीभगत के आरोप बेहद गंभीर हैं और इन्हें केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय विश्वसनीय सबूतों के साथ साबित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गैर-कानूनी सहयोग, विदेशी हस्तक्षेप या हिंसा भड़काने की किसी भी विशिष्ट घटना की जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा कानून के अनुसार की जानी चाहिए। सेठी ने जोर देकर कहा कि शांतिपूर्ण असहमति और लोकतांत्रिक विरोध संवैधानिक अधिकार हैं, जबकि हिंसा, डराने-धमकाने और सार्वजनिक व्यवस्था में जानबूझकर व्यवधान डालने को केवल राजनीतिक विरोध का हवाला देकर उचित नहीं ठहराया जा सकता।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या आईएनडीआई अलायंस रोज़गार, आर्थिक विकास, जन-कल्याण और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर रचनात्मक नीतिगत विकल्पों पर पर्याप्त ध्यान दे रहा है या फिर वे सार्वजनिक चर्चा में राजनीतिक टकराव को ही हावी होने दे रहे हैं

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता