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जम्मू-कश्मीर में सहकारी ऋण संस्थानों की समीक्षा के लिए नाबार्ड समिति की बैठक

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जम्मू, 27 मार्च (हि.स.)। सहकारिता आयुक्त सचिव यशा मुद्गल ने आज जम्मू स्थित सिविल सचिवालय में एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में केंद्र शासित प्रदेश में स्थित सहकारी ऋण संस्थानों के प्रदर्शन और वित्तीय स्थिति की समीक्षा की गई जो 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए थी।

विकास मित्तल ने 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त तिमाही के लिए सहकारी बैंकों के वित्तीय प्रदर्शन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने इन संस्थानों की वित्तीय स्थिति और स्थिरता में सुधार लाने के उद्देश्य से लागू की गई सुधार योजनाओं के कार्यान्वयन में हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला।

आयुक्त सचिव ने जनसंख्या के अंतिम छोर तक ऋण पहुंचाने में ग्रामीण सहकारी बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने समिति को केंद्र सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और नाबार्ड द्वारा शुरू की गई कई रणनीतिक पहलों, जैसे ई-पीएसी, एम-पीएसी, कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस और सहकारी संस्थाओं के बीच सहकारी ढांचा, के बारे में जानकारी दी, जिनका उद्देश्य सहकारी ऋण संरचना का आधुनिकीकरण करना है।

याशा मुद्गल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में वित्तीय स्थिरता, बेहतर शासन और ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए सहकारी ऋण संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी सहकारी संस्थानों में सुधार योजनाओं के समय पर कार्यान्वयन, नियामक मानदंडों का कड़ाई से पालन और परिचालन दक्षता में सुधार के निर्देश दिए।

आयुक्त सचिव ने जम्मू सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के प्रबंध निदेशक को माइग्रेशन ऑडिट को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों की आवश्यकता पर भी बल दिया और प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के कम्प्यूटरीकरण में तेजी लाने, दैनिक कार्य-संचालन को लागू करने और ई-केवाईसी, ई-केसीसी और सहकार सेतु जैसे डिजिटल उपकरणों के उपयोग को बढ़ाने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / SONIA LALOTRA