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मीरवाइज़ डॉ. मौलवी उमर फारूक ने हज़रत इमाम हुसैन को उनके द्वितीय बलिदान के लिए भावभीनी श्रद्धांजलि दी

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श्रीनगर, 24 जून (हि.स.)। कश्मीर के मीरवाइज़ डॉ. मौलवी मुहम्मद उमर फारूक ने कर्बला के शहीदों विशेष रूप से पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के प्रिय पोते हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अनहु) को इस्लाम के मूलभूत सिद्धांतों को कायम रखने के लिए उनके अद्वितीय बलिदान के लिए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मीरवाइज़ ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (रज़ियल्लाहु अनहु) ने अत्याचार, अन्याय और झूठ के आगे झुकने से इनकार कर दिया और ऐसा करके उन्होंने साहस, दृढ़ता और सत्य के प्रति समर्पण का एक शाश्वत उदाहरण स्थापित किया।

उन्होंने कहा कि कर्बला की त्रासदी इस्लामी और मानवीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है जो विश्वासियों को बलिदान, न्याय, धैर्य और नैतिक जिम्मेदारी के मूल्यों की याद दिलाती है।

बता दें कि सदियों पुरानी मीरवाइज़ियों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मीरवाइज़ डॉ. उमर फारूक यौम-ए-आशूरा के अवसर पर 10 मुहर्रम-उल-हराम 1448 हिजरी (शुक्रवार, 26 जून, 2026) को श्रीनगर के नरवारा स्थित अस्तन-ए-आलिया आलम साहिब में एक विशेष प्रवचन देंगे। प्रवचन शाम 4:30 बजे शुरू होगा और अस्र की नमाज़ तक चलेगा। प्रवचन के दौरान, मीरवाइज़ यौम-ए-आशूरा के गुणों और महत्व पर प्रकाश डालेंगे और हज़रत इमाम हुसैन (रह.) और कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे इस पवित्र अवसर पर सामूहिक प्रार्थना का नेतृत्व भी करेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह