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जम्मू में 5.91 करोड़ रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्यों का उद्घाटन

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जम्मू,, 18 अक्टूबर (हि.स.)।

जम्मू में बाढ़ और नदी के कटाव से प्रभावित इलाकों को सुरक्षित बनाने के लिए जल शक्ति, वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण तथा जनजातीय मामलों के मंत्री जावेद अहमद राणा ने रविवार को 5 करोड़ 91 लाख रुपये की लागत वाले तीन बाढ़ सुरक्षा कार्यों का उद्घाटन किया। ये कार्य निक्की तवी और वड्डी तवी नदी के संवेदनशील हिस्सों में किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य आसपास की बस्तियों, कृषि भूमि और सार्वजनिक संपत्तियों को बाढ़ से होने वाले नुकसान से बचाना है।

बेलीचराना में 2.29 करोड़ रुपये का बाढ़ सुरक्षा कार्य

पहली परियोजना के तहत बेलीचराना में चौथे पुल के नीचे निक्की तवी नदी के बाएं किनारे पर लगभग 2 करोड़ 29 लाख 94 हजार रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य पूरा किया गया है। इसका उद्देश्य नदी के कटाव को रोकना और आसपास की बस्तियों तथा खेतों को सुरक्षित रखना है। इस कार्य के उद्घाटन के दौरान बाहु के विधायक विक्रम रंधावा भी मौजूद रहे।

चन्नी नानके में बनाए जाएंगे दो सुरक्षा स्पर

दूसरी परियोजना के तहत चन्नी नानके, नंदनी में वड्डी तवी नदी के बाएं किनारे पर 69 लाख रुपये की लागत से दो सुरक्षा स्पर बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक स्पर की लंबाई 18 मीटर होगी। इनका उद्देश्य नदी के तेज बहाव से किनारों के कटाव को कम करना है। मंत्री ने इस परियोजना का बाकी काम प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए।

सीमावर्ती गांव मकवाल में 2.92 करोड़ रुपये की परियोजना

तीसरी परियोजना के तहत सीमावर्ती गांव मकवाल में निक्की तवी नदी के दाएं किनारे पर ओम्मन पोस्ट से मकवाल फॉरवर्ड पोस्ट तक लगभग 2 करोड़ 92 लाख रुपये की लागत से बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे हैं। इस अवसर पर मढ़ के विधायक सुरिंदर कुमार भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान मंत्री जावेद अहमद राणा ने कहा कि बदलते मौसम और लगातार सामने आ रही प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए बाढ़ से बचाव के लिए पहले से तैयारी करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूरे किए जाएं और गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता न हो।

राणा ने कहा कि बाढ़ आने के बाद राहत कार्य करने के बजाय संवेदनशील इलाकों की पहले से पहचान कर सुरक्षा उपाय करना जरूरी है। उन्होंने संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, नियमित निगरानी और निर्माण कार्यों को तय समय पर पूरा करने पर जोर दिया।

इन परियोजनाओं से जम्मू के नदी किनारे बसे गांवों, कृषि भूमि और सार्वजनिक ढांचे को बाढ़ तथा मिट्टी के कटाव से होने वाले नुकसान का खतरा कम होने की उम्मीद है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अश्वनी गुप्ता