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महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच बढ़ती दूरी के लिए एनसी के नेतृत्व को ठहराया जिम्मेदार

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श्रीनगर, 02 नवंबर(हि.स.)। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस की आलोचना की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर और केंद्र के बीच बढ़ती दूरी के लिए एनसी के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया।

श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर पार्क में पीडीपी के स्थापना दिवस के मौके पर आयोजित कार्यकर्ताओं के एक बड़े सम्मेलन को संबोधित करते हुए महबूबा ने सवाल किया कि कश्मीरियों को लगातार शक की नजर से क्यों देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि युवाओं को परेशान कियाजा रहा है, कश्मीरी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा रहा है और आदिवासी समुदायों को उनकी जगहों से बेदखल किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान को हमारे ऊपर इतना शक क्यों है हमारे युवाओं को पीटा जा रहा है, कश्मीरी अधिकारियों को नौकरी से हटाया जा रहा है और आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है। इस पर सोचने की जरूरत है।

एनसी पर निशाना साधते हुए महबूबा ने कहा कि 'प्रधानमंत्री' (वजीरे-आजम) के पद से हटकर 'मुख्यमंत्री' (वजीरे-आला) की व्यवस्था अपनाने के बाद इस पार्टी ने स्वायत्तता (ऑटोनॉमी) की मांग को ही दफना दिया।

उन्होंने कश्मीर में उग्रवाद (मिलिटेंसी) के मुश्किल दौर के लिए भी एनसी के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि उनके शासनकाल में लोगों ने बहुत कष्ट झेले और आरोप लगाया कि उस दौरान पार्टी ने 'इख्वान' बलों का इस्तेमाल किया था।

पाकिस्तान पर एनसी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के बयानों का जिक्र करते हुए महबूबा ने कहा कि कश्मीरियों ने पहले ही अपना फैसला ले लिया है और वे भारत के साथ खड़े हैं।

जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय में शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की भूमिका को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने देश पर भरोसा जताया था। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के साथ उनके संबंधों का भी जिक्र किया। महबूबा ने बताया कि शेख अब्दुल्ला ने शांति बहाल करने में मदद के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को जम्मू-कश्मीर बुलाया था। उन्होंने 'मुगल रोड' के निर्माण का भी उल्लेख किया।

महबूबा ने कहा कि पीडीपी की स्थापना जम्मू-कश्मीर की गरिमा और पहचान को बहाल करने के उद्देश्य से की गई थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी ने कभी कोई दोहरा एजेंडा नहीं अपनाया।

उन्होंने भारत सरकार से जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ बातचीत शुरू करने का आग्रह किया और सवाल किया कि आखिर कब तक इस क्षेत्र पर ताकत के दम पर शासन किया जा सकता है।

10 अक्टूबर को दिल्ली में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों के गुस्से और चिंताओं को समझना चाहिए न कि जबरदस्ती के तरीकों से शांति दिखाने की कोशिश करनी चाहिए। महबूबा ने जम्मू-कश्मीर की पहचान बदलने की कोशिशों के खिलाफ भी चेतावनी दी और कहा कि जो लोग इस क्षेत्र को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें खुद इसके नतीजे भुगतने पड़ेंगे।

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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता