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जम्मू-कश्मीर में नौकरियों पर पहला हक स्थानीय युवाओं का होना चाहिए — शिवसेना

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जम्मू, 15 अप्रैल (हि.स.)।

शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) जम्मू-कश्मीर इकाई के प्रदेश प्रमुख मनीश साहनी ने यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू में हाल ही में विज्ञापित शैक्षणिक पदों की भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग की है।

पार्टी के प्रदेश मध्यवर्ती कार्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति में साहनी ने कहा कि अखिल भारतीय स्तर पर भर्ती प्रक्रिया अपनाने के कारण जम्मू-कश्मीर के स्थानीय युवाओं को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे शिक्षित बेरोजगारों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

साहनी ने कहा कि देश के कई राज्यों ने अपने युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस और प्रभावी नीतियां लागू की हैं, जिनसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन को सीख लेनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि महाराष्ट्र में राज्य सरकार की नीतियों के तहत विश्वविद्यालयों और सरकारी विभागों में मराठी भाषा का ज्ञान तथा दीर्घकालिक निवास (डोमिसाइल) को महत्व दिया जाता है जिससे स्थानीय युवाओं को सीधा लाभ मिलता है।

इसी प्रकार उत्तराखंड के गढ़वाल यूनिवर्सिटी और कुमाऊँ यूनिवर्सिटी में कई पदों पर स्थानीय अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाती है और चयन प्रक्रिया में क्षेत्रीय समझ को महत्व दिया जाता है।

साहनी ने आगे कहा कि पंजाब में सरकारी नौकरियों और विश्वविद्यालयों में भर्ती के लिए पंजाबी भाषा (मैट्रिक स्तर तक) की अनिवार्यता स्थानीय युवाओं के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करती है, जबकि हिमाचल प्रदेश में ‘हिमाचली बोनाफाइड’ उम्मीदवारों को वरीयता और अतिरिक्त अंक देने की व्यवस्था है।

साहनी ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मांग की कि इन राज्यों के मॉडल का अध्ययन कर स्थानीय युवाओं के लिए विशेष प्राथमिकता/वेटेज नीति लागू की जाए ताकि उन्हें अपने ही प्रदेश में न्यायसंगत अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि अर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के बाद प्रदेश के युवाओं में रोजगार को लेकर असुरक्षा की भावना बढ़ी है। ऐसे में यदि स्थानीय शैक्षणिक संस्थानों में भी उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, तो यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।

साहनी ने स्पष्ट किया कि शिवसेना योग्यता (मेरिट) के खिलाफ नहीं है लेकिन समान अवसर के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन भी उतना ही आवश्यक है।

उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के हितों की रक्षा के लिए ठोस नीति लागू करने की मांग की।

अंत में साहनी ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय हितों की अनदेखी जारी रही, तो शिवसेना इस मुद्दे को लेकर सड़कों पर उतरकर व्यापक जन आंदोलन छेड़ेगी जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / रमेश गुप्ता