उपराज्यपाल ने अनंतनाग के श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम में कई आधारशिला रखी
अनंतनाग, 17 अगस्त (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज समाधि प्रतिष्ठा दिवस, नाग पंचमी महोत्सव और यज्ञ की पूर्णाहुति के शुभ अवसर पर अनंतनाग स्थित श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम का दौरा किया। उन्होंने विरासत और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए समर्पित पहलों की आधारशिला भी रखी।
अपने संबोधन में उपराज्यपाल ने आश्रम के प्रति गहरी श्रद्धा व्यक्त की जिसने ऋषियों के ज्ञान को संरक्षित रखा है।
स्वामी अशोकनंद जी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उपराज्यपाल ने 1937 में उनके दूरदर्शी संकल्प को याद किया जिसने आश्रम को एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र में बदल दिया। उन्होंने कहा कि स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने केवल एक पूजा स्थल की कल्पना नहीं की थी बल्कि एक जीवंत संस्था की कल्पना की थी जो समाज की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए सनातन धर्म के शाश्वत संदेश को आगे बढ़ाए।
उनकी सेवा, अनुशासन और समर्पण की विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
उन्होंने कहा कि जब स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने 1971 में अपना नश्वर शरीर त्यागा तो वे सेवा, अनुशासन, साधना और समर्पण की एक जीवंत परंपरा छोड़ गए जिसे आज भी इस आश्रम की हर गतिविधि में महसूस किया जा सकता है।
उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सभ्यता ने हमेशा आध्यात्मिकता और प्रकृति को अविभाज्य माना है। ईशा उपनिषद का हवाला देते हुए उन्होंने सभा को याद दिलाया कि ईश्वर समस्त सृष्टि में व्याप्त है। वैश्विक जलवायु चुनौतियों के संदर्भ में उपराज्यपाल ने युवाओं से नदियों, जंगलों, जानवरों और सभी जीवित प्राणियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का आग्रह किया यह सुनिश्चित करते हुए कि विकास सतत और प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण बना रहे।
आश्रम में शुरू की गई नई पहलों जिनमें यात्री निवास का निर्माण, जीर्णोद्धार कार्य, भोजनालय परिसर और यज्ञशाला का विस्तार शामिल हैं पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि ये परियोजनाएं आस्था को कर्म में रूपांतरित करने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिकता का अर्थ है विश्व के प्रति उत्तरदायित्व जिसे निस्वार्थ सेवा के साथ निभाया जाना चाहिए। उपराज्यपाल ने भगवान कृष्ण की शिक्षाओं को दोहराया और रेखांकित किया कि जब कर्म सेवा बन जाता है और सेवा समर्पण बन जाती है तो साधारण कार्य भी साधना बन जाता है।
उपराज्यपाल ने कन्याकुमारी स्थित स्वामी विवेकानंद केंद्र से आश्रम के जुड़ाव की प्रशंसा की जो आत्मनो मोक्षार्थम जगद् हितय च के सिद्धांत पर कार्य करता है यानी स्वयं की मुक्ति और विश्व के कल्याण के लिए।
उपराज्यपाल ने युवाओं से स्वामी विवेकानंद के आत्मविश्वास, निर्भीकता और निस्वार्थ सेवा के संदेश से प्रेरणा लेने का आग्रह किया और उन्हें याद दिलाया कि सच्ची शक्ति भीतर में निहित है और प्रत्येक व्यक्ति अपने भाग्य का निर्माता है।
भारत के शाश्वत दर्शन, विविधता में एकता, को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत की शक्ति विविधता का सम्मान करते हुए एक साथ आगे बढ़ने में निहित है। उन्होंने कहा कि सर्व धर्म समभाव (सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान) का संदेश भारत का विश्व को दिया गया उपहार है।
इसलिए आश्रम के स्वयंसेवकों, भक्तों और पदाधिकारियों के सत्संग के माध्यम से समाज को निस्वार्थ कार्यों के लिए प्रेरित करना आवश्यक है।
इस अवसर पर पद्म श्री बृज लाल भट्ट अध्यक्ष प्रशासनिक समिति श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम, विवेकानंद केंद्र नागदंडी, ब्रिज मोहन शर्मा प्रधान सचिव संस्कृति विभाग, अंशुल गर्ग संभागीय आयुक्त कश्मीर, जाविद इकबाल मट्टू डीआइजी दक्षिण कश्मीर, आमोद अशोक नागपुरे एसएसपी अनंतनाग, डॉ. बिलाल मोहिउद्दीन भट उपायुक्त अनंतनाग, शिवानंद रोहित रैना श्री रामकृष्ण महासम्मेलन आश्रम और विवेकानन्द रॉक मेमोरियल तथा विवेकानन्द केन्द्र, कन्याकुमारी के सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

