उपराज्यपाल ने एसकेयूएएसटी जम्मू में कई नई इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का उद्घाटन किया
जम्मू, 21 अगस्त (हि.स.)।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एसकेयूएएसटी) जम्मू में कई नई इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने जेकेसीआईपी के तहत 'स्टार्टअप आउटरीच प्रोग्राम' की शुरुआत के मौके पर लोगों को संबोधित भी किया।
इस कार्यक्रम में जम्मू डिवीज़न के रिसर्चर, इनोवेटर, युवा उद्यमी और किसान शामिल हुए। नई शुरू की गई सुविधाओं में उन्नति गर्ल्स हॉस्टल, एग्रीकल्चर में एआई और एमएल के लिए सेंटर, मशरूम रिसर्च और इनोवेशन सेंटर, एडवांस्ड सेरीकल्चर लेबोरेटरी और डिजिटल मीडिया और पब्लिकेशन सेंटर शामिल हैं।
इस मौके पर बोलते हुए उपराज्यपाल ने इन नई सुविधाओं को सिर्फ़ फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर से कहीं ज़्यादा बताया। उन्होंने कहा कि ये इस क्षेत्र के इनोवेटर्स, उद्यमियों, रिसर्चर्स और किसान परिवारों के प्रति एक प्रतिबद्धता हैं। उपराज्यपाल ने टेक्नोलॉजी-आधारित खेती के ग्लोबल उदाहरणों का ज़िक्र किया जैसे नीदरलैंड में डेयरी इनोवेशन हब जो एआई-आधारित न्यूट्रिशन और पशु स्वास्थ्य समाधानों पर वैज्ञानिकों, कंपनियों और किसानों को एक साथ लाता है, इज़राइल में खेती और डेयरी में डेटा और स्मार्ट मैनेजमेंट का एकीकरण, न्यूज़ीलैंड में पशुपालन में डिजिटल पहल और ब्राज़ील का एक इरिगेशन स्टार्टअप जिसने किसान की रोज़मर्रा की समस्या को एक बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधान में बदल दिया। उपराज्यपाल ने कहा कि इन उदाहरणों से यह संदेश मिलता है कि खेती और उससे जुड़े सेक्टर दुनिया भर में इनोवेशन के लिए अगला बड़ा क्षेत्र हैं। साथ ही उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर के युवाओं को विदेशी मॉडलों की नकल करने के बजाय अपने खेतों, किसानों, मौसम और स्थानीय चुनौतियों को समझने और क्षेत्र की खास ज़रूरतों के हिसाब से समाधान तैयार करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज दुनिया स्टार्टअप खेती और उससे जुड़े सेक्टर में लगातार नई संभावनाओं की तलाश कर रही हैं। इन स्टार्टअप्स और नए इनोवेशन से सबसे बड़ा संदेश यह मिलता है कि खेती और उससे जुड़े सेक्टर खुद इनोवेशन के लिए अगला बड़ा क्षेत्र हैं। आपको अपना अगला समाधान तैयार करने के लिए अपने खेतों, किसानों, मौसम और स्थानीय समस्याओं को समझना होगा और जहाँ भी सही हो उन मॉडलों को अपने तरीके से कस्टमाइज़ करना होगा। मेरा मानना है कि अलग-अलग देशों ने अपनी समस्याओं के लिए इनोवेशन किए हैं और अब समय आ गया है कि जम्मू-कश्मीर भी अपने सवालों और चुनौतियों के लिए इनोवेशन करे।
उपराज्यपाल ने भारत की बदलती रोज़गार आकांक्षाओं पर भी ज़ोर दिया और कहा कि जम्मू-कश्मीर के युवा आज नौकरी के लिए लाइन में लगने के बजाय नौकरी पैदा करने की ओर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उम्मीदों में इस तरह का बदलाव 'आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर' के विज़न के लिए बहुत ज़रूरी है। मैं सभी छात्रों से कहना चाहता हूँ कि आपकी डिग्री आपकी मंज़िल नहीं है बल्कि यह आपकी सफलता की उड़ान के लिए एक रनवे की तरह है। विश्वविधालय आपको ज्ञान देगा लेकिन आपकी जिज्ञासा आपको नए विचार और आइडिया देगी।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह

