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जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उपराज्यपाल सक्सेना ने हिम सरोवर परियोजना का किया शुभारंभ

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लेह, 10 अप्रैल (हि.स.)। शीत रेगिस्तानी क्षेत्र में दीर्घकालिक जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक सक्रिय कदम उठाते हुए केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आज हिम सरोवर परियोजना का शुभारंभ किया। इस परियोजना का उद्देश्य वैज्ञानिक तरीके से बर्फ का संग्रहण करना और जल निकायों का निर्माण करना है ताकि लद्दाख में जल संकट की गंभीर समस्या का समाधान किया जा सके। यह पहल लद्दाख में जल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बर्फ संग्रहण और पिघली हुई बर्फ के पानी के संरक्षण पर केंद्रित है जहां अद्वितीय जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण जल की उपलब्धता एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

सक्सेना ने लेह और कारगिल में एक साथ 50 जल निकायों के निर्माण के लिए खुदाई कार्य शुरू करके परियोजना का शुभारंभ किया। 40×30 मीटर आकार और 2 मीटर गहरे ये जल निकाय हर साल बर्बाद होने वाले बर्फ/हिमनद के पिघले पानी को संग्रहित करने के लिए बनाए गए हैं। इससे लद्दाख के लोगों को सिंचाई के लिए पानी का एक विश्वसनीय स्रोत मिलेगा। इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि हिम सरोवर परियोजना लद्दाख में पानी की बढ़ती समस्या से निपटने के लिए एक निर्णायक और वैज्ञानिक उपाय है जहां पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं बल्कि लोगों के लिए जीवन रेखा है।

गौरतलब है कि 13 मार्च को लद्दाख के उपराज्यपाल का पदभार संभालने के तुरंत बाद सक्सेना ने मुख्य सचिव को केंद्र शासित प्रदेश में 50 छोटे जल निकायों के निर्माण के लिए स्थानों की पहचान करने और कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह लद्दाख की जल सुरक्षा से सीधे तौर पर जुड़ी है और सीमित जल स्रोतों पर निर्भर किसानों द्वारा सामना की जाने वाली सिंचाई संबंधी चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने जोर दिया कि ये जल निकाय वर्षा जल और वार्षिक बर्फ पिघलने से होने वाले पानी के संरक्षण में मदद करेंगे जो अन्यथा बर्बाद हो जाता है जिससे कृषि उद्देश्यों के लिए पानी का एक विश्वसनीय स्रोत तैयार होगा। उन्होंने कहा कि हिम सरोवर परियोजना न केवल सिंचाई की जरूरतों को पूरा करेगी बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर भी पैदा करेगी।

लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग करके तैयार किया जा रहा है। उपराज्यपाल ने कहा कि हिम सरोवर परियोजना भूमि के क्षरण को रोकने के व्यापक लक्ष्य को पूरा करेगी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर खराब भूमि को पुनर्स्थापित करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

उपराज्यपाल ने आगे कहा कि इस पहल को भारतीय सेना, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) और स्थानीय लोगों सहित विभिन्न हितधारकों का भरपूर समर्थन मिला है। उन्होंने हिम सरोवर परियोजना के प्रति लद्दाख के लोगों के उत्साहजनक समर्थन की भी सराहना की।

सक्सेना ने बताया कि हिम सरोवर परियोजना की परिकल्पना लद्दाख की अनूठी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि इन जल निकायों का विकास स्थानीय समुदायों के परामर्श से किया जाएगा ताकि ये क्षेत्रीय आवश्यकताओं को पूरा कर सकें।

जल संरक्षण के अलावा यह परियोजना सड़कों के किनारे वृक्षारोपण प्रयासों को भी बढ़ावा देगी और हरियाली बढ़ाएगी। व्यापक पर्यावरणीय संदर्भ को संबोधित करते हुए उपराज्यपाल ने लद्दाख में जलवायु परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रभावों की ओर इशारा किया जिनमें घटती हिमपात, पिघलते ग्लेशियर, बढ़ता तापमान और गिरता जलस्तर शामिल हैं। उन्होंने इन चुनौतियों से निपटने के लिए सतत जल प्रबंधन पद्धतियों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उपराज्यपाल ने आधुनिक जल संचयन और संरक्षण तंत्र विकसित करते हुए पारंपरिक सिंचाई प्रणालियों के संरक्षण के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने दीर्घकालिक पारिस्थितिक संतुलन में योगदान देने वाली नई हरित और नीली संपत्तियों का निर्माण करके लद्दाख के प्राकृतिक परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता