लद्दाख में पेयजल आपूर्ति के लिए प्रशासन का केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ समझौता
लेह, 06 मई (हि.स.)। केंद्र शासित लद्दाख प्रशासन ने स्थायी और विश्वसनीय पेयजल आपूर्ति के लिए बुधवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू की सबसे खास विशेषताओं में से एक लद्दाख में प्रत्येक घर में पानी के कनेक्शन के लिए 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्त पोषण है।
मंत्रालय लद्दाख में प्रति जल कनेक्शन 4 लाख रुपये की पूरी लागत वहन करेगा। उपराज्यपाल ने लगातार लद्दाख में विकास परियोजनाओं में केंद्रीय सहायता और हस्तक्षेप को बढ़ाने की वकालत की है, जो इसके अद्वितीय पारिस्थितिक और भौगोलिक संदर्भ के अनुरूप है। एमओयू के अनुसार ग्राम पंचायतों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों जैसे स्थानीय संस्थानों को पाइप जल आपूर्ति प्रणालियों की कमीशनिंग और हैंडओवर सुनिश्चित करने के लिए एक संरचित ढांचा स्थापित किया गया है।
जल शक्ति मंत्रालय के तहत पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस) और यूटी प्रशासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग (पीएचई) और सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण (आई एंड एफसी) विभाग के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल से कठिन इलाके, कठोर जलवायु परिस्थितियों और सीमित मीठे पानी के संसाधनों से उत्पन्न होने वाली अनूठी जल चुनौतियों का समाधान करके लद्दाख को महत्वपूर्ण लाभ होने की उम्मीद है। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कुशल जल प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देकर एमओयू ग्रामीण परिवारों के लिए साल भर पीने योग्य पानी की पहुंच सुनिश्चित करने, टैंकर आधारित आपूर्ति और मौसमी स्रोतों पर निर्भरता को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह समझौता ज्ञापन लद्दाख में जल सुरक्षा प्राप्त करने की दिशा में हमारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। जल जीवन मिशन के तहत मजबूत सहयोग और बर्फ और हिमनद पिघलने के लिए हाल ही में शुरू की गई परियोजना हिम सरोवर जैसी पहल के माध्यम से, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि लद्दाख पानी में आत्मनिर्भर बने।
एलजी विनय सक्सेना ने कहा कि लद्दाख की अनूठी चुनौतियों को देखते हुए यह साझेदारी हमें भविष्य के लिए टिकाऊ लचीला और समुदाय-संचालित जल बुनियादी ढांचे का निर्माण करने में सक्षम बनाएगी। एमओयू का उद्देश्य घरेलू स्थानों पर परीक्षण के लिए एकत्र किए गए पानी के नमूनों की टैगिंग के साथ जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी प्रणाली स्थापित करना भी है। इससे उपचारात्मक कार्रवाइयों की प्रभावी निगरानी हो सकेगी और दीर्घकालिक जल स्थिरता सुनिश्चित हो सकेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राधा पंडिता

